फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Samadhi of Acharya Nishank Bhushan Maharaj was executed

आचार्य निशंक भूषण महाराज का समाधि मरण किया गया

Mon, 01 Mar 2021 01:55 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Mar 2021 01:55 AM IST
विज्ञापन
Samadhi of Acharya Nishank Bhushan Maharaj was executed
आचार्य निशंक भूषण महाराज का समाधि मरण किया गया
विज्ञापन

हस्तिनापुर। प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पर विराजित आचार्य श्री 108 निशंक भूषण महाराज शनिवार रात आत्मध्यान में लीन हो गए। उसके बाद संतों के सानिध्य में उनका समाधि मरण किया गया।
समाधि मरण के दौरान आचार्य भारत भूषण, आचार्य संयम सागर, महाराज, मुनि प्रणम्य सागर महाराज, मुनि चंद्र सागर, मुनि भाव भूषण, मुनि भव्य भूषण एवं आर्यिका 105 चंदनामती माता एवं आर्यिका 105 विद्या माता के आदि संतों रहे। भक्तों ने गुरु की डोली को अपने कंधों पर विराजमान कर जयकारे लगाते हुए प्रथम निशायां पर गुरु का मृत्यु महोत्सव मनाया। डोली उठाने का सौभाग्य सुशील जैन, पंकज जैन, निखिल जैन, संजीव जैन, राकेश जैन, राकेश जैन आदि को प्राप्त हुआ। निशंक भूषण गुरु के परिवार से गृहस्थ जीवन के बेटों में अतुल जैन, बिजेंद्र जैन व अन्य भक्तों ने अग्निकुंड बनाकर एवं गुरु की पूजा कर पुण्य का संचय किया। समाधि मरण की समस्त क्रियाएं पंड़ित आशीष जैन शास्त्री व पंडित नरेश कांसल ने संपन्न कराई।
विज्ञापन

इस मौके पर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री मुकेश जैन सराफ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, मंत्री राजीव जैन, विजय कुमार जैन, सुनील जैन, सुनील कुमार जैन प्रवक्ता, प्रमोद जैन, राजेंद्र जैन, संजय जैन, अखिलेश जैन, सुशील जैन, सौरभ जैन व अन्य भक्तों ने पुण्य का संचय किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

सिंचाई विभाग से 2005 में हुए सेवानिवृत्त
प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर के प्रबंधक मुकेश जैन ने बताया कि आचार्य निशांत भूषण महाराज गृहस्थ जीवन में सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त होकर संयम के मार्ग पर आगे बढ़े। 25 जुलाई, 2005 को आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने कांधला में उन्हें दीक्षा दी। वह हस्तिनापुर में रहकर साधना कर रहे थे।

समतापूर्वक देह को छोड़ना समाधि मरण
मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि वे मुनि धन्य हैं, जिन्होंने समाधि मरण ग्रहण करके दर्शन, ज्ञान, चरित्र व तप कर आराधना रूपी पताका को फहराया। वे ही भाग्यशाली और ज्ञानी हैं, जिन्होंने दुर्लभ भगवती आराधना (संलेखना) को प्राप्त किया। संलेखना में बाह्य शरीर और आंतरिक कार्यों का त्याग करके समतापूर्वक देह को छोड़ना समाधि मरण है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed