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समागम से मिलेगी डेढ़ हजार करोड़ की संजीवनी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Feb 2018 01:16 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आरएसएस के मेरठ में होने जा रहे समागम से आवास विकास परिषद् को करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये की संजीवनी मिलेगी। समागम के बाद करीब 18 लाख वर्ग मीटर जमीन पर आवास विकास द्वारा विकास का खाका खींचकर भूखंड योजना शुरू करने का प्लान है। योजना यह कि समागम के लिए मुक्त कराई जमीन परकिसानों को फिर से कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।
जागृति विहार एक्सटेंशन में 25 फरवरी को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का समागम होने जा रहा है। इसके लिए वृहद स्तर पर तैयारियां हो गई हैं। दरअसल जिस जमीन पर समागम हो रहा है इसके लिए किसानों के साथ आवास विकास परिषद का पुराना विवाद चल रहा है। गांव सरायकाजी, काजीपुर आदि गांव के किसानों का कहना है कि उन्हें इस जमीन के बदले अतिरिक्त अनुग्रह राशि नहीं दी गई। किसानों ने 666 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अनुग्रह राशि के साथ कई अन्य मांगे उठाई थीं। इस मांग को लेकर लखनऊ तक वार्ता चली। बाद में सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर पर आवास विकास अधिकारी सहमत हो गए। उस समय किसानों ने इससे इंकार कर दिया। बाद में आवास विकास अधिकारी सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर के वायदे से भी मुकर गए।
500 एकड़ से ज्यादा जमीन आई हाथ
पांच सौ एकड़ से ज्यादा इस अधिग्रहीत जमीन पर किसानों ने कब्जा नहीं दिया था। किसान अपनी मांग पर अड़े थे। यहां आरएसएस के समागम की बात आई तो प्रशासन ने सख्ती दिखाई। किसानों ने विरोध किया पर उनकी फसल पर बुलडोजर चलाकर प्रशासन ने जमीन पर कब्जा ले लिया। अब जमीन प्रशासन के हाथ में है।
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भूखंड योजना शुरू करने का प्लान
आवास विकास परिषद् ने इस जमीन पर विकास का खाका खींचा डाला है। यदि कुल जमीन में 40 प्रतिशत जमीन डेवलेपमेंट के लिए छोड़ दी जाए तो विशुद्ध रूप से 10 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा ऐसे बचेगी जिस पर भूखंड काटे जा सकते हैं। आवास बनाए जा सकते हैं। वहां की वर्तमान न्यूनतम दर यदि 15 हजार रुपये वर्ग मीटर लगाई जाए तो यह जमीन डेढ़ हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की है। यदि आवास विकास सही तरह से इसे नियोजित करने में सफल हो गया तो परिषद इस योजना से मालामाल हो जाएगा। इसका प्लान भी आवास विकास ने बनाया है। यहां सड़कों के अलावा, भूखंड योजना पर काम किया जा रहा है।
किसान कर रहे आंदोलन की तैयारी
इस प्रकरण में भले ही आवास विकास ने डेवलेपमेंट प्लान तैयार कर लिया हो पर किसानों का कहना है कि जमीन केवल समागम के लिए खाली की है। समागम के बाद फिर से किसान इस पर कब्जा ले लेंगे। किसान नेता मास्टर रणपाल सिंह, रोहित गुर्जर आदि का कहना है कि किसानों की मांग पूरी होने के बाद ही जमीन पर आवास विकास का अधिकार बनता है। किसानों का कहना है कि इस योजना से आवास विकास पर धनवर्षा होने वाली है तो किसानों को पैसा देने में क्या हर्ज है।
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जागृति विहार एक्सटेंशन में 25 फरवरी को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का समागम होने जा रहा है। इसके लिए वृहद स्तर पर तैयारियां हो गई हैं। दरअसल जिस जमीन पर समागम हो रहा है इसके लिए किसानों के साथ आवास विकास परिषद का पुराना विवाद चल रहा है। गांव सरायकाजी, काजीपुर आदि गांव के किसानों का कहना है कि उन्हें इस जमीन के बदले अतिरिक्त अनुग्रह राशि नहीं दी गई। किसानों ने 666 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अनुग्रह राशि के साथ कई अन्य मांगे उठाई थीं। इस मांग को लेकर लखनऊ तक वार्ता चली। बाद में सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर पर आवास विकास अधिकारी सहमत हो गए। उस समय किसानों ने इससे इंकार कर दिया। बाद में आवास विकास अधिकारी सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर के वायदे से भी मुकर गए।
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500 एकड़ से ज्यादा जमीन आई हाथ
पांच सौ एकड़ से ज्यादा इस अधिग्रहीत जमीन पर किसानों ने कब्जा नहीं दिया था। किसान अपनी मांग पर अड़े थे। यहां आरएसएस के समागम की बात आई तो प्रशासन ने सख्ती दिखाई। किसानों ने विरोध किया पर उनकी फसल पर बुलडोजर चलाकर प्रशासन ने जमीन पर कब्जा ले लिया। अब जमीन प्रशासन के हाथ में है।
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भूखंड योजना शुरू करने का प्लान
आवास विकास परिषद् ने इस जमीन पर विकास का खाका खींचा डाला है। यदि कुल जमीन में 40 प्रतिशत जमीन डेवलेपमेंट के लिए छोड़ दी जाए तो विशुद्ध रूप से 10 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा ऐसे बचेगी जिस पर भूखंड काटे जा सकते हैं। आवास बनाए जा सकते हैं। वहां की वर्तमान न्यूनतम दर यदि 15 हजार रुपये वर्ग मीटर लगाई जाए तो यह जमीन डेढ़ हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की है। यदि आवास विकास सही तरह से इसे नियोजित करने में सफल हो गया तो परिषद इस योजना से मालामाल हो जाएगा। इसका प्लान भी आवास विकास ने बनाया है। यहां सड़कों के अलावा, भूखंड योजना पर काम किया जा रहा है।
किसान कर रहे आंदोलन की तैयारी
इस प्रकरण में भले ही आवास विकास ने डेवलेपमेंट प्लान तैयार कर लिया हो पर किसानों का कहना है कि जमीन केवल समागम के लिए खाली की है। समागम के बाद फिर से किसान इस पर कब्जा ले लेंगे। किसान नेता मास्टर रणपाल सिंह, रोहित गुर्जर आदि का कहना है कि किसानों की मांग पूरी होने के बाद ही जमीन पर आवास विकास का अधिकार बनता है। किसानों का कहना है कि इस योजना से आवास विकास पर धनवर्षा होने वाली है तो किसानों को पैसा देने में क्या हर्ज है।