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जूनियर डॉक्टर का तीन सप्ताह का वेतन काटा, कोविड ब्लॉक में ड्यूटी लगाई
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जूनियर डॉक्टर का तीन सप्ताह का वेतन काटा, कोविड ब्लॉक में ड्यूटी लगाई
मेरठ। मेडिकल के प्राचार्य ने जूनियर डॉक्टर उत्कर्ष का तीन सप्ताह का वेतन काट दिया है। साथ ही इमरजेंसी से हटाकर 14 दिन के लिए कोविड ब्लॉक में उसकी ड्यूटी लगा दी है। मेडिकल में घायल मरीज को भर्ती नहीं किया गया था। निजी अस्पताल ले जाते हुए उसकी मौत हो थी। इसका वीडियो वायरल हो गया था। इसमें जूनियर डॉक्टर कह रहा था कि नहीं हो पाएगा ऑपरेशन, मरीज को कहीं और ले जाओ।
यह खबर अमर उजाला ने रविवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की। इसके बाद प्राचार्य ने जांच कराई। प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि जूनियर डॉक्टर को तीमारदारों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था। इसलिए यह कार्रवाई की गई है।
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यह था मामला
मुजफ्फनगर के रहने वाले 25 वर्षीय अंकुश सड़क हादसे में घायल हो गए थे, जिनको शुक्रवार रात मुजफ्फरनगर के जिला अस्पताल से मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया था। लेकिन मेडिकल कॉलेज में सुविधा ना होने का हवाला देते हुए मरीज को भर्ती करने से इंकार कर दिया था। पीड़ित परिवार के तमाम गिड़गिड़ाने के बाद भी जूनियर डॉक्टर ने न सिर्फ भर्ती करने से इंकार किया, बल्कि अभद्र भाषा में भी बात की थी। परेशान परिजन अंकुश को मजबूरन प्राइवेट अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया था।
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मेरठ। मेडिकल के प्राचार्य ने जूनियर डॉक्टर उत्कर्ष का तीन सप्ताह का वेतन काट दिया है। साथ ही इमरजेंसी से हटाकर 14 दिन के लिए कोविड ब्लॉक में उसकी ड्यूटी लगा दी है। मेडिकल में घायल मरीज को भर्ती नहीं किया गया था। निजी अस्पताल ले जाते हुए उसकी मौत हो थी। इसका वीडियो वायरल हो गया था। इसमें जूनियर डॉक्टर कह रहा था कि नहीं हो पाएगा ऑपरेशन, मरीज को कहीं और ले जाओ।
यह खबर अमर उजाला ने रविवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की। इसके बाद प्राचार्य ने जांच कराई। प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि जूनियर डॉक्टर को तीमारदारों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था। इसलिए यह कार्रवाई की गई है।
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यह था मामला
मुजफ्फनगर के रहने वाले 25 वर्षीय अंकुश सड़क हादसे में घायल हो गए थे, जिनको शुक्रवार रात मुजफ्फरनगर के जिला अस्पताल से मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया था। लेकिन मेडिकल कॉलेज में सुविधा ना होने का हवाला देते हुए मरीज को भर्ती करने से इंकार कर दिया था। पीड़ित परिवार के तमाम गिड़गिड़ाने के बाद भी जूनियर डॉक्टर ने न सिर्फ भर्ती करने से इंकार किया, बल्कि अभद्र भाषा में भी बात की थी। परेशान परिजन अंकुश को मजबूरन प्राइवेट अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया था।
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