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मेरठ में बड़ा हादसा टला, टूटी पटरी पर रात भर दौड़ती रहीं ट्रेनें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Nov 2016 07:14 PM IST
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सकौती में टूटी पटरी
- फोटो : अमर उजाला
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कुछ ही घंटे पहले हुए कानपुर ट्रेन हादसे के बाद भी रेलवे के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। मेरठ-सहारनपुर रेल मार्ग पर बड़ा हादसा होते-होते बचा। रात भर सकौती-दादरी के बीच में टूटी पड़ी पटरी से ट्रेन गुजरती रहीं। सोमवार सुबह 11 बजे की-मैन ने पेट्रोलिंग केे बाद इसकी सूचना दी तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन फानन में पटरी ठीक कराई और कॉसन लगाकर अन्य ट्रेनों को गुजरा गया।
रविवार की रात सकौती स्टेशन से पांच सौ मीटर की दूरी पर पटरी टूटी हुई थी। दरार आने से ग्लूड ज्वाइंट टूट गया। रविवार रात शताब्दी, जन शताब्दी, शालीमार, जालंधर एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस टूटी पटरी से ही गुजरीं। सुबह 11 बजे पेट्रोलिंग टीम ने इसे देखा तो रेलवे अधिकारियों को सूचना दी। सेक्शन इंजीनियर की टीम और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। करीब तीन घंटे तक चले काम के बीच पटरी में सपोर्ट लगाकर चालू किया गया। वहां पर कॉसन लगा दिया गया, जिससे 30 की स्पीड पर ट्रेन को निकाला जा रहा है। दोपहर में दो बजे के करीब यातायात को सामान्य किया गया। रात में पटरी टूटी देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस के अलावा सभी ट्रेनों को निकाला गया।
हो सकता था बड़ा हादसा
इस ट्रैक पर 60 ट्रेनें 24 घंटे में अप और डाउन करती हैं। सूत्रों का कहना है कि रात में ट्रेन अपनी पूरी गति से गुजरी, जिससे पटरी टूटकर अलग होने पर बड़ा हादसा हो सकता था। पटरी बदलने के दौरान इस रूट की सभी ट्रेनों को कॉसन में अधिकतम 30 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारा गया। रेल पटरी को सही करने के लिए पांच से अधिक कर्मचारी लगे रहे।
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ऐसे निकालनी पड़ती हैं ट्रेन
जब रेलवे पटरी टूट जाती है तो उसके बाद ट्रेन को धीमी गति से निकाला जाता है। टूटने से पहले जो स्टेशन होता है, वहां पर रेल चालक को लिखित में पत्र दिया जाता है, और कहा जाता है कि उस स्थान पर पटरी टूटी हुई है, जिसके कारण वहां से रेल को आराम से निकाला जाता है। कानपुर देहात के पुखरायां स्टेशन के पास हुए रेल हादसे में भी रेलवे विभाग की भारी चूक मानी जा रही है। इस घटना के बाद भी रेलवे विभाग अलर्ट नहीं है।
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रविवार की रात सकौती स्टेशन से पांच सौ मीटर की दूरी पर पटरी टूटी हुई थी। दरार आने से ग्लूड ज्वाइंट टूट गया। रविवार रात शताब्दी, जन शताब्दी, शालीमार, जालंधर एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस टूटी पटरी से ही गुजरीं। सुबह 11 बजे पेट्रोलिंग टीम ने इसे देखा तो रेलवे अधिकारियों को सूचना दी। सेक्शन इंजीनियर की टीम और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। करीब तीन घंटे तक चले काम के बीच पटरी में सपोर्ट लगाकर चालू किया गया। वहां पर कॉसन लगा दिया गया, जिससे 30 की स्पीड पर ट्रेन को निकाला जा रहा है। दोपहर में दो बजे के करीब यातायात को सामान्य किया गया। रात में पटरी टूटी देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस के अलावा सभी ट्रेनों को निकाला गया।
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हो सकता था बड़ा हादसा
इस ट्रैक पर 60 ट्रेनें 24 घंटे में अप और डाउन करती हैं। सूत्रों का कहना है कि रात में ट्रेन अपनी पूरी गति से गुजरी, जिससे पटरी टूटकर अलग होने पर बड़ा हादसा हो सकता था। पटरी बदलने के दौरान इस रूट की सभी ट्रेनों को कॉसन में अधिकतम 30 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारा गया। रेल पटरी को सही करने के लिए पांच से अधिक कर्मचारी लगे रहे।
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ऐसे निकालनी पड़ती हैं ट्रेन
जब रेलवे पटरी टूट जाती है तो उसके बाद ट्रेन को धीमी गति से निकाला जाता है। टूटने से पहले जो स्टेशन होता है, वहां पर रेल चालक को लिखित में पत्र दिया जाता है, और कहा जाता है कि उस स्थान पर पटरी टूटी हुई है, जिसके कारण वहां से रेल को आराम से निकाला जाता है। कानपुर देहात के पुखरायां स्टेशन के पास हुए रेल हादसे में भी रेलवे विभाग की भारी चूक मानी जा रही है। इस घटना के बाद भी रेलवे विभाग अलर्ट नहीं है।