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Meerut News: क्रांतिकारियों के बलिदान को इतिहास से किया जा रहा विलुप्त
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जानीखुर्द। अमर शहीद क्रांतिकारी धनसिंह कोतवाल के बलिदान दिवस पर मंगलवार को गांव पांचली खुर्द में क्रांति तीर्थ अमृत महोत्सव आयोजन समिति के प्रदेशव्यापी आयोजनों का शुभारंभ हुआ। समिति के मेरठ प्रांतीय प्रभारी अश्वनी त्यागी ने कहा कि क्रांतिकारियों के बलिदानी इतिहास को जानबूझकर इतिहास से विलुप्त किया जा रहा है। जिन बलिदानी क्रांतिकारियों को इतिहास से निकाल दिया गया है उन्हें उचित स्थान देने हेतु अनेक प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए समिति गांव पांचली खुर्द से एक महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत कर रही है।
उन्होंने कहा कि अभियान के अंतर्गत प्रत्येक जिले के क्रांतिकारियों के गांव की मिट्टी लेकर 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया जाएगा। इस मिट्टी के ऊपर एक बरगद का पौधा लगाया जाएगा। उस गांव को क्रांति तीर्थ के रूप में भी स्थापित किया जाएगा। इससे क्रांतिकारियों को तो सम्मान मिलेगा ही साथ ही क्रांति तीर्थ के रूप में स्थापित हुए गांवों को भी सम्मान प्राप्त होगा। सह संयोजक तथा क्रांतिनायक धन सिंह कोतवाल के वंशज तस्वीर सिंह चपराना ने कहा कि किस प्रकार अंग्रेजों से लड़ने के बहुत दिनों तक पांचली खुर्द गांव को बागी गांव के रूप में देखा जाता रहा। बागी कहकर बुलाते थे। विशिष्ट वक्ता प्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ. राकेश कुमार आर्य ने कहा कि धन सिंह कोतवाल एक इतिहास का नाम है।
कार्यक्रम में क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल के परिजन जयकरण सिंह, वीर महेंद्र सिंह, अजीत सिंह, हंसराज सिंह, सोनपाल सिंह, ओमवीर सिंह, अनिल कुमार, सोहन वीर सिंह, रमेश कुमार, शिव कुमार, सुखपाल सिंह, रोहताश कुमार भी उपस्थित रहे। इस दौरान नरेश गुर्जर, प्रो. देवेश शर्मा, आरएसएस कार्यकर्ता नवीन चंद्र गुप्ता, विजय सिंह गुर्जर, जितेंद्र सिंह, कुमारपाल शास्त्री, पूर्व कमांडिंग अफसर बालेसिंह, बृज भूषण गर्ग, कैप्टन सुभाष चंद्र आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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संचालन सह संयोजक प्रो. नवीन चंद्र गुप्ता और 1857 के क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान के चेयरमैन तस्वीर सिंह चपराना ने किया। मेरठ विभाग के संयोजक वरुण अग्रवाल, इंजीनियर सुरेंद्र वर्मा, कैप्टन सुभाष चंद्र, विजय सिंह रिश्तल, कैप्टन सुभाष चंद्र नागर, इंद्रपाल पावरटी, सुनील महलकी, जयराज सिंह, मनोज धामा, प्रधानाचार्य संजीव नागर, नरेंद्र सिंह, योगेंद्र कुमार, आदि कार्यक्रम मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि अभियान के अंतर्गत प्रत्येक जिले के क्रांतिकारियों के गांव की मिट्टी लेकर 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया जाएगा। इस मिट्टी के ऊपर एक बरगद का पौधा लगाया जाएगा। उस गांव को क्रांति तीर्थ के रूप में भी स्थापित किया जाएगा। इससे क्रांतिकारियों को तो सम्मान मिलेगा ही साथ ही क्रांति तीर्थ के रूप में स्थापित हुए गांवों को भी सम्मान प्राप्त होगा। सह संयोजक तथा क्रांतिनायक धन सिंह कोतवाल के वंशज तस्वीर सिंह चपराना ने कहा कि किस प्रकार अंग्रेजों से लड़ने के बहुत दिनों तक पांचली खुर्द गांव को बागी गांव के रूप में देखा जाता रहा। बागी कहकर बुलाते थे। विशिष्ट वक्ता प्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ. राकेश कुमार आर्य ने कहा कि धन सिंह कोतवाल एक इतिहास का नाम है।
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कार्यक्रम में क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल के परिजन जयकरण सिंह, वीर महेंद्र सिंह, अजीत सिंह, हंसराज सिंह, सोनपाल सिंह, ओमवीर सिंह, अनिल कुमार, सोहन वीर सिंह, रमेश कुमार, शिव कुमार, सुखपाल सिंह, रोहताश कुमार भी उपस्थित रहे। इस दौरान नरेश गुर्जर, प्रो. देवेश शर्मा, आरएसएस कार्यकर्ता नवीन चंद्र गुप्ता, विजय सिंह गुर्जर, जितेंद्र सिंह, कुमारपाल शास्त्री, पूर्व कमांडिंग अफसर बालेसिंह, बृज भूषण गर्ग, कैप्टन सुभाष चंद्र आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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संचालन सह संयोजक प्रो. नवीन चंद्र गुप्ता और 1857 के क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान के चेयरमैन तस्वीर सिंह चपराना ने किया। मेरठ विभाग के संयोजक वरुण अग्रवाल, इंजीनियर सुरेंद्र वर्मा, कैप्टन सुभाष चंद्र, विजय सिंह रिश्तल, कैप्टन सुभाष चंद्र नागर, इंद्रपाल पावरटी, सुनील महलकी, जयराज सिंह, मनोज धामा, प्रधानाचार्य संजीव नागर, नरेंद्र सिंह, योगेंद्र कुमार, आदि कार्यक्रम मौजूद रहे।