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Meerut News: आरएसएस ने ढूंढी सनातन और इतिहास का दुष्प्रचार रोकने की काट

Mon, 21 Oct 2024 05:58 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 21 Oct 2024 05:58 AM IST
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RSS finds solution to stop propaganda of Sanatan and Itihas
मेरठ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने सोशल मीडिया पर सनातन संस्कृति, धार्मिक विश्वासों, प्रमाणित इतिहास के बारे में किए जा रहे दुष्प्रचार की काट ढूंढ ली है। आरएसएस अपने स्वयंसेवकों को सोशल मीडिया के संचालन में पारंगत करके सकारात्मक संदेश देने की कोशिश में जुटा है। इसके लिए नगर से लेकर प्रांत स्तर तक कार्यशालाओं का आयोजन कर स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
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आरएसएस अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। शताब्दी वर्ष के लिए संघ ने पंच परिवर्तन को आधार बनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की पहल की है। इसके लिए स्वयंसेवकों को आधुनिक तकनीक अपना कर परिवर्तन का वाहक बनाने का प्रयास हो रहा है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर सनातन संस्कृति पर लगातार प्रहार हो रहे हैं। धार्मिक विश्वासों को लेकर भी भ्रामक तथ्यों के जरिए झूठ फैलाया जा रहा है।
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इसके साथ ही देश के प्रमाणित इतिहास को लेकर भी गलत तथ्य सोशल मीडिया पर परोसे जा रहे हैं। इस नकारात्मक प्रचार की धार को कुंद करने के लिए आरएसएस अपने स्वयंसेवकों को सोशल मीडिया के गुर सिखा रहा है। इसके लिए सोशल मीडिया की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।
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निचले स्तर पर भी आयोजित हो रही कार्यशालाएं
सोशल मीडिया पर नकारात्मक बातों का प्रचार रोकने, लोगों को सही तथ्यों की जानकारी देने के लिए स्वयंसेवकों को सही बातों की जानकारी दी जा रही है। इन कार्यशालाओं में बताया जा रहा है कि भ्रामक तथ्यों की काट करके अपनी बात स्पष्ट रूप से सोशल मीडिया पर रखें। स्वयंसेवकों को सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपने अकाउंट बनाने, नकारात्मक प्रचार को हटाने के बारे में बताया जा रहा है।


विविधताओं की जगह समानताओं पर जोर
आरएसएस के प्रचार विभाग के पदाधिकारियों का कहना है कि आजादी के बाद से अभी तक देश में विविधताओं की बात होती थी, लेकिन अब देश में समानताओं की बात होनी चाहिए। सकारात्मक प्रचार के कारण ही दक्षिण भारत का इडली, डोसा जैसा खानपान पूरे देश में लोकप्रिय हो गया है। इसी तरह से लिट्टी चोखा, वड़ा पाव, भजिया, पाव भाजी जैसे खानपान भी राष्ट्रीय खाद्य पदार्थों में शुमार हो गए हैं। दक्षिण भारत का धोती का पहनावा भी दूसरे क्षेत्रों में लोकप्रिय हो रहा है। इसी तरह से सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे सनातन धर्म को बांटने, जातिवाद फैलाने, आरएसएस के बारे में फैलाए जा रहे गलत तथ्य को रोकने के लिए स्वयंसेवकों को तैयार किया जा रहा है। मेरठ प्रांत के अंतर्गत पिछले एक वर्ष में लगभग 12 कार्यशालाओं का आयोजन किया जा चुका है।
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