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Meerut News: रोहटा 11 माह से ब्लॉक मिशन प्रबंधक पद खाली, महिला समूह परेशान
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रोहटा। विकास खंड रोहटा में करीब 11 महीने से ब्लॉक मिशन प्रबंधक का पद खाली होने से महिला स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहटा। विकास खंड रोहटा में पिछले 11 महीने से ब्लॉक मिशन प्रबंधक का पद खाली है। इससे महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है। इन महिलाओं ने जिला पंचायत प्रशासक गौरव चौधरी को प्रार्थनापत्र सौंपा है।
प्रार्थनापत्र में पूर्व ब्लॉक मिशन प्रबंधक को दोबारा सेवा का अवसर देने पर विचार करने की मांग की गई है। महिलाओं का कहना है कि अधिकारी की तैनाती न होने से समूहों को योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पा रही है। इससे बैठकों और वित्तीय कार्यों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रोहटा में करीब 650 महिला स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इन समूहों से लगभग सात से आठ हजार गरीब और वंचित महिलाएं जुड़ी हुई हैं। मिशन का उद्देश्य महिलाओं की आजीविका बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। पद खाली होने से उन्हें सरकारी सुविधाओं की जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही है, जिससे मिशन के उद्देश्य पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
महिलाओं ने समूहों के गठन से संबंधित कार्यों को गति देने की मांग की है। रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड और कैश क्रेडिट लिमिट के कार्य भी तेज किए जाएं। इससे निर्धारित लक्ष्य समय से पूरे हो सकेंगे और आमदनी में वृद्धि होगी। आजीविका से जुड़े कार्य बढ़ने पर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। इस मौके पर डूंगर, शाहपुर जैनपुर, बाडम, इदरीशपुर, भोला सहित कई गांवों की महिलाएं शामिल थीं।
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रोहटा। विकास खंड रोहटा में पिछले 11 महीने से ब्लॉक मिशन प्रबंधक का पद खाली है। इससे महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है। इन महिलाओं ने जिला पंचायत प्रशासक गौरव चौधरी को प्रार्थनापत्र सौंपा है।
प्रार्थनापत्र में पूर्व ब्लॉक मिशन प्रबंधक को दोबारा सेवा का अवसर देने पर विचार करने की मांग की गई है। महिलाओं का कहना है कि अधिकारी की तैनाती न होने से समूहों को योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पा रही है। इससे बैठकों और वित्तीय कार्यों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रोहटा में करीब 650 महिला स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इन समूहों से लगभग सात से आठ हजार गरीब और वंचित महिलाएं जुड़ी हुई हैं। मिशन का उद्देश्य महिलाओं की आजीविका बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। पद खाली होने से उन्हें सरकारी सुविधाओं की जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही है, जिससे मिशन के उद्देश्य पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
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महिलाओं ने समूहों के गठन से संबंधित कार्यों को गति देने की मांग की है। रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड और कैश क्रेडिट लिमिट के कार्य भी तेज किए जाएं। इससे निर्धारित लक्ष्य समय से पूरे हो सकेंगे और आमदनी में वृद्धि होगी। आजीविका से जुड़े कार्य बढ़ने पर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। इस मौके पर डूंगर, शाहपुर जैनपुर, बाडम, इदरीशपुर, भोला सहित कई गांवों की महिलाएं शामिल थीं।
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