मुजफ्फरनगर: रिया हत्याकांड में तीनों अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा, लगाया तीन लाख 95 हजार का जुर्माना
मुजफ्फरनगर की बहादुर बेटी रिया हत्याकांड में एडीजे प्रथम कोर्ट ने तीनों गुनहगारों रोहताश, सुनील, ललित पुत्रगण रामस्वरूप निवासी मुंडभर को उम्र कैद की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने तीनों को विभिन्न धाराओं में तीन लाख 95 हजार का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने में से डेढ़ लाख मृतका के पिता सुरेशपाल और 50 हजार मां अनीता को दिए जाने के आदेश दिए हैं। पांच साल पहले 10 मार्च 2014 को भोराकला थाना क्षेत्र के गांव मुंडभर में रिया हत्याकांड हुआ था।
पांच साल पहले दस मार्च 2014 की सुबह सात बजे का वक्त था। मुंडभर गांव स्थित अपने घर पर किसान सुरेशपाल अपने परिजनों के साथ बैठा था। जमीन की रंजिश में कुटुंब के लोग उससे दुश्मनी रखते थे। कुटुंब के ही हमलावर धारदार हथियारों और तमंचों से लैस होकर मकान में घुस आए और परिजनों पर हमला कर दिया। फिर जमकर फायरिंग की। हमलावरों ने मकान में बैठे इंद्रपाल को घेर लिया। इसका सुरेशपाल ने विरोध किया।
हमलावरों ने कहा, तूने ही इसे अपने यहां पनाह दे रखी है, तू ही इसकी पैरवी करता है। आज पहले तेरा ही काम तमाम करेंगे। हमलावरों ने सुरेशपाल की ओर तमंचा तान दिया। हमलावरों के इरादे भांप कर बहादुर बेटी रिया तेजी से दौड़ी और पिता को धक्का देकर हमलावरों द्वारा चलाई गोली अपने सीने पर खाकर पिता सुरेशपाल की जान बचा ली।
प्रोफेसर बनना चाहती थी रिया
छात्रा रिया उच्च शिक्षा हासिल कर रुड़की आईआईटी में अपने दादा डॉ. आरएस वर्मा की तरह प्रोफेसर बनना चाहती थी। वह ज्ञान दीप पब्लिक स्कूल लालूखेड़ी की इंटर की होनहार छात्रा थी। हाईस्कूल की परीक्षा में भी उसने 96 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल टॉप किया था।
उसे मरणोपरांत कई पुरस्कार दिए गए। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उसे मरणोपरांत बाल वीरता पुरस्कार दिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने उसके माता-पिता को बापू जयधानी अवार्ड दिया। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने भी उसे रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड दिया था। 2016 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ की ओर से उसे जीवन रक्षक पदक दिया गया था।