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बवाल के बाद बवाल.. मजबूत शिकंजे का अभाव
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बवाल के बाद बवाल.. मजबूत शिकंजे का अभाव
मेरठ। इस शहर ने कई उपद्रव झेले। लेकिन उपद्रवियों पर कड़ा शिकंजा कसने के दावे करने वाला पुलिस प्रशासन कुछ दिनों की सख्ती के बाद हर बार बैकफुट पर आता दिखाई दिया है। हर बार कहा जाता है कि उपद्रव में जितनी भी संपत्ति का नुकसान हुआ है, वह नामजद उपद्रवियों से वसूला जाएगा। लेकिन हर बार दावे हवा होने पर उपद्रवियों का दुस्साहस बढ़ता जाता है।
पिछले सप्ताह हुआ उपद्रव कोई पहला मामला नहीं है, जब उपद्रवियों ने शहर की शांति व कानून व्यवस्था को चुनौती दी हो और सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया हो। कई बार ऐसे उपद्रवों में पुलिस चौकियों में आगजनी की गई, पुलिस और आम लोगों के वाहन तोड़े गए। लोगों की दुकानें जलाई गईं। सड़क पर डिवाइडर तोड़कर ग्रिल उखाड़ी गई। पुलिस पर जमकर पथराव किया गया। हर बार पुलिस प्रशासन ने कहा कि उपद्रवियों पर ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो नजीर बनेगी। लेकिन हकीकत यही है कि मामला शांत होते-होते ये दावे भी ठंडे बस्ते में चले गए।
24 अप्रैल 2011 को काजीपुर में दो वर्गों के बीच हुए झगड़े ने उपद्रव का रूप ले लिया था। जो एल ब्लॉक से होता हुआ हापुड़ अड्डा तक पहुंच गया था। उपद्रवियों ने तीन पुलिस चौकियां फूंकीं। कई दुकानों और वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी कही। पुलिस पर जमकर पथराव और फायरिंग की। इस उपद्रव के बाद कुछ दिन पुलिस प्रशासन ने उपद्रवियों को चिह्नित कर ठोस कार्रवाई करने के दावे किए। लेकिन बाद में सब दावे धरे रह गए। उपद्रवी खुलेआम घूमते देखे गए। किसी से कोई वसूली नहीं हुई।
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10 मई 2014 को धार्मिक स्थल के बाहर सरकारी जमीन पर प्याऊ लगाने को लेकर हुए विवाद के बाद कोतवाली के तीरगरान इलाके में बवाल, तोड़फोड़, आगजनी हुई थी। पुलिस के आला अधिकारियों के सामने ही उपद्रवियों ने अवैध हथियारों से जमकर फायरिंग की थी। इस हिंसा में सराफ सुशील रस्तोगी के इकलौते युवा बेटे शुभम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। थाना कोतवाली में 35 मुकदमे दर्ज हुए थे। जिनमें 13 मुकदमों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। 250 आरोपी नामजद और 12 सौ से ज्यादा अज्ञात पर मुकदमे हुए। लेकिन पुलिस ने 15 आरोपियों के बाद किसी की गिरफ्तारी नहीं की। किसी उपद्रवी से उपद्रव के दौरान हुए नुकसान की वसूली भी नहीं की।
दो अप्रैल 2018 को एससीएसटी एक्ट में संशोधन को लेकर बवाल हुआ। हाईवे पर कंकरखेड़ा थाने की शोभापुर चौकी समेत एक दर्जन बसों को फूंक दिया गया। शहर में कचहरी स्थित आंबेडकर चौक पर नौचंदी थाने की सरकारी गाड़ी जला दी गई। पुलिस पर जमकर पथराव किया गया। पुलिस ने पहले दिन जो गिरफ्तारी की, वही जेल भेजे। उसके बाद न तो एक भी उपद्रवी चिह्नित किया और न किसी से वसूली की गई।
30 जून 2019 को युवा सेवा समिति के अध्यक्ष बदर अली ने धारा 144 का उल्लंघन कर फैज-ए-आम कॉलेज में मीटिंग की। उसके बाद पांच हजार से ज्यादा लोगों ने शहर में शांति मार्च के नाम पर जबरन जुलूस निकालने की कोशिश की। इस दौरान उपद्रव हुआ। बदर अली आदि पर कार्रवाई हुई। लेकिन अन्य उपद्रवियों पर शिकंजा नहीं कसा गया।
अब 20 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को लेकर जमकर उपद्रव हुआ। दो पुलिस चौकी फूंक दी गईं। पुलिस और जनता के दो दर्जन से ज्यादा वाहन तोड़े गए। हापुड़ रोड व लिसाड़ीगेट में डिवाइडर तोड़कर पथराव किया गया। अब तक 405 नामजद और पांच हजार अज्ञात लोगों पर कई थानों में केस दर्ज किया गया है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि एक करोड़ रुपये से ज्यादा की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। अब फिर से अफसरों ने बयान दिया कि जो भी सरकारी और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ, उसकी बवालियों से ही भरपाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने 150 से अधिक आरोपियों को नोटिस भी भेजे हैं। लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या इस बार उपद्रवियों पर शिकंजा कसा जा सकेगा।
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मेरठ। इस शहर ने कई उपद्रव झेले। लेकिन उपद्रवियों पर कड़ा शिकंजा कसने के दावे करने वाला पुलिस प्रशासन कुछ दिनों की सख्ती के बाद हर बार बैकफुट पर आता दिखाई दिया है। हर बार कहा जाता है कि उपद्रव में जितनी भी संपत्ति का नुकसान हुआ है, वह नामजद उपद्रवियों से वसूला जाएगा। लेकिन हर बार दावे हवा होने पर उपद्रवियों का दुस्साहस बढ़ता जाता है।
पिछले सप्ताह हुआ उपद्रव कोई पहला मामला नहीं है, जब उपद्रवियों ने शहर की शांति व कानून व्यवस्था को चुनौती दी हो और सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया हो। कई बार ऐसे उपद्रवों में पुलिस चौकियों में आगजनी की गई, पुलिस और आम लोगों के वाहन तोड़े गए। लोगों की दुकानें जलाई गईं। सड़क पर डिवाइडर तोड़कर ग्रिल उखाड़ी गई। पुलिस पर जमकर पथराव किया गया। हर बार पुलिस प्रशासन ने कहा कि उपद्रवियों पर ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो नजीर बनेगी। लेकिन हकीकत यही है कि मामला शांत होते-होते ये दावे भी ठंडे बस्ते में चले गए।
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24 अप्रैल 2011 को काजीपुर में दो वर्गों के बीच हुए झगड़े ने उपद्रव का रूप ले लिया था। जो एल ब्लॉक से होता हुआ हापुड़ अड्डा तक पहुंच गया था। उपद्रवियों ने तीन पुलिस चौकियां फूंकीं। कई दुकानों और वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी कही। पुलिस पर जमकर पथराव और फायरिंग की। इस उपद्रव के बाद कुछ दिन पुलिस प्रशासन ने उपद्रवियों को चिह्नित कर ठोस कार्रवाई करने के दावे किए। लेकिन बाद में सब दावे धरे रह गए। उपद्रवी खुलेआम घूमते देखे गए। किसी से कोई वसूली नहीं हुई।
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10 मई 2014 को धार्मिक स्थल के बाहर सरकारी जमीन पर प्याऊ लगाने को लेकर हुए विवाद के बाद कोतवाली के तीरगरान इलाके में बवाल, तोड़फोड़, आगजनी हुई थी। पुलिस के आला अधिकारियों के सामने ही उपद्रवियों ने अवैध हथियारों से जमकर फायरिंग की थी। इस हिंसा में सराफ सुशील रस्तोगी के इकलौते युवा बेटे शुभम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। थाना कोतवाली में 35 मुकदमे दर्ज हुए थे। जिनमें 13 मुकदमों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। 250 आरोपी नामजद और 12 सौ से ज्यादा अज्ञात पर मुकदमे हुए। लेकिन पुलिस ने 15 आरोपियों के बाद किसी की गिरफ्तारी नहीं की। किसी उपद्रवी से उपद्रव के दौरान हुए नुकसान की वसूली भी नहीं की।
दो अप्रैल 2018 को एससीएसटी एक्ट में संशोधन को लेकर बवाल हुआ। हाईवे पर कंकरखेड़ा थाने की शोभापुर चौकी समेत एक दर्जन बसों को फूंक दिया गया। शहर में कचहरी स्थित आंबेडकर चौक पर नौचंदी थाने की सरकारी गाड़ी जला दी गई। पुलिस पर जमकर पथराव किया गया। पुलिस ने पहले दिन जो गिरफ्तारी की, वही जेल भेजे। उसके बाद न तो एक भी उपद्रवी चिह्नित किया और न किसी से वसूली की गई।
30 जून 2019 को युवा सेवा समिति के अध्यक्ष बदर अली ने धारा 144 का उल्लंघन कर फैज-ए-आम कॉलेज में मीटिंग की। उसके बाद पांच हजार से ज्यादा लोगों ने शहर में शांति मार्च के नाम पर जबरन जुलूस निकालने की कोशिश की। इस दौरान उपद्रव हुआ। बदर अली आदि पर कार्रवाई हुई। लेकिन अन्य उपद्रवियों पर शिकंजा नहीं कसा गया।
अब 20 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को लेकर जमकर उपद्रव हुआ। दो पुलिस चौकी फूंक दी गईं। पुलिस और जनता के दो दर्जन से ज्यादा वाहन तोड़े गए। हापुड़ रोड व लिसाड़ीगेट में डिवाइडर तोड़कर पथराव किया गया। अब तक 405 नामजद और पांच हजार अज्ञात लोगों पर कई थानों में केस दर्ज किया गया है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि एक करोड़ रुपये से ज्यादा की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। अब फिर से अफसरों ने बयान दिया कि जो भी सरकारी और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ, उसकी बवालियों से ही भरपाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने 150 से अधिक आरोपियों को नोटिस भी भेजे हैं। लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या इस बार उपद्रवियों पर शिकंजा कसा जा सकेगा।