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देखिए कैसे चल रहा था घोटाला, पांच हजार मृतक किसान डाल रहे थे गन्ना

Tue, 31 Oct 2017 05:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ राजदीप जाखड़, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ राजदीप जाखड़, मेरठ Updated Tue, 31 Oct 2017 05:49 PM IST
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Revealing : five thousand dead farmers were putting sugarcane
गन्ना डालने जाते किसान

मेरठ में गन्ना विभाग में लंबे समय से चला आ रहा पर्ची घोटाला पकड़ में आया है। विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए उप गन्ना आयुक्त द्वारा कराए गए मंडल के सर्वे में 5 हजार से ज्यादा मृतक किसानों के बांड चलते पाए गए तो वहीं 3139 हेक्टेयर रकबा फर्जी मिली। इतने बड़े फर्जी रकबे को दर्शाकर किसानों को पर्ची जारी की जा रही थी। 625 किसानों के डबल बांड मिले। प्रदेश में भी यही स्थिति है। अगर सही तरीके से जांच कराई जाए तो अन्य मंडलों में भी भारी धांधली मिलेगी और गन्ना माफियाओं का खेल उजागर हो सकेगा।

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उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग द्वारा संचालित गन्ना विकास समितियां शुगर मिल और किसान के बीच सेतु का काम करती है। गन्ना एक्ट के मुताबिक प्रदेश के किसान शुगर मिलों को सीधे गन्ना ना देकर समिति के माध्यम से मिलों को अपना गन्ना आपूर्ति करते हैं। इसके लिए किसानों को निर्धारित फीस अदा करके गन्ना विकास समिति का सदस्य बनना पड़ता है। समिति अपने सदस्यों को गन्ना आपूर्ति करने के लिए बांड (अनुबंध पत्र) जारी करती है, जिसके आधार पर किसान अपना गन्ना मिल को सप्लाई करते हैं। गन्ना माफिया और रसूखदार किसान समिति कर्मचारियों की मिलीभगत से बांड में खेल कराते हैं। मंडल के किसान हर साल वास्तविक रकबे से ज्यादा रकबा होने, कुछ किसानों के डबल बांड होने और मृतक किसानोें के भी बांड चलने की शिकायत करते रहे हैं। मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने शिकायतों को देखते हुए रकबे और बांड की जांच कराई थी। जांच में बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए। 
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5030 मृतक किसानों के मिले बांड, 3139 हेक्टेयर रकबा फर्जी
जांच में 5030 मृतक किसानों के बांड चलते मिले। ये बांड पिछले कई सालो से चालू थे और इन पर लगातार पर्ची जारी की जा रही थी। इसके अलावा मंडल के वास्तविक गन्ना रकबे से 3139 हेक्टेयर रकबा अधिक मिला जो फर्जी तरीके से दर्शाकर रसूखदार किसानों और गन्ना माफियाओं ने अपने बांड बढ़ाए हुए थे।

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राजस्व विभाग की क्रास चेकिंग से हुआ खुलासा 

Revealing : five thousand dead farmers were putting sugarcane
गन्ना लेकर जाते किसान

इस साल गन्ना विभाग ने गन्ना रकबा की सही तस्वीर जानने के लिए किसानों की खसरा और खतौनी आदि की जांच राजस्व विभाग से कराई थी। इस क्रास जांच में यह पूरा खेल सामने आया। वास्तविक रकबे से 3139 हेक्टेयर रकबा अधिक मिला। 

625 किसानों के मिले डबल बांड 
मंडल में 625 किसानों के डबल बांड भी मिले हैं। ये बांड फर्जीवाडा करके बनवाए गए थे। इसमें गन्ना विभाग से जुड़े कर्मचारी भी शामिल रहे हैं। एक ही किसान के नाम में कुमार और सिंह आदि लगाकर डबल बांड बनाए गए थे। डबल बांड से किसान की कम रकबे में ही दोगुनी पर्ची हो जाती है। इससे वह समय से पहले ही अपना गन्ना डालकर अलग हो जाता है और बची हुई पर्चियां गन्ना माफिया के काम आती है। 

मृतक किसानों के परिजनों को देनी चाहिए सूचना, वरना नहीं मिलेगा फायदा
गन्ना विभाग के मुताबिक मृतक किसान के परिवार को उसके मरने की सूचना तुरंत देनी चाहिए ताकि उसके बांड को बंद कर दिया जाए। लेकिन जो परिवार ऐसा नहीं करते और मृतक किसान के नाम पर ही बांड चलाते रहते हैं तो अनहोनी होने पर उसके परिजनों को विभाग की ओर से दिया जाना वाला मुआवजा और राहत नहीं मिल पाती है। 

क्या कहते हैं अधिकारी 
उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र हरपाल सिंह का कहना है कि इस बार किसानों के भू अभिलेखों की वास्तविक जानकारी करने के लिए राजस्व विभाग से भी जांच कराई गई थी। इसमें 3139 हेक्टेयर रकबा फर्जी मिला। जांच में 5 हजार से ज्यादा मृतक किसानों के बांड चलते मिले। रिकार्र्ड को दुरुस्त करा दिया गया है। ऐसे मामले मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

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