सेंट्रल मार्केट विवाद: 40 साल बाद क्यों टूटा भरोसा, सेट बैक पर मचा बवाल, आशियाना बचाने को सड़क पर उतरे लोग
मेरठ के शास्त्रीनगर में सेट बैक विवाद को लेकर लोगों में भय और नाराजगी बढ़ रही है। 40 वर्षों से रह रहे परिवारों ने आवास विकास परिषद की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए राहत और न्याय की मांग की है।
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मेरठ के शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट और सेक्टर-3 व सेक्टर-4 के निवासियों में अपने घरों और दुकानों को लेकर चिंता बढ़ गई है। आवास विकास परिषद की कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने भवनों में बने व्यावसायिक हिस्सों को स्वयं हटाना शुरू कर दिया है। वहीं कई परिवारों का कहना है कि दशकों से बसे उनके आशियानों पर अब संकट खड़ा हो गया है।
शनिवार को गोल मंदिर के पास सेक्टर-3 और सेक्टर-4 चौराहे पर धरने पर बैठी महिलाओं ने पत्रकार वार्ता कर अपनी पीड़ा व्यक्त की और प्रशासन से मानवीय आधार पर समाधान की मांग की।
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40 साल तक नहीं मिला कोई नोटिस, अब कार्रवाई क्यों?
धरने में शामिल महिलाओं का कहना था कि वे पिछले 40 वर्षों से इन मकानों में रह रही हैं। इस दौरान कभी भी आवास विकास परिषद की ओर से सेट बैक छोड़ने को लेकर कोई नोटिस या स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया।
उनका आरोप है कि अब अचानक नियमों का हवाला देकर मकानों और दुकानों पर कार्रवाई की जा रही है, जिससे हजारों परिवारों के सामने आवास और रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। कई लोगों ने कार्रवाई के डर से अपनी दुकानों के शटर हटाकर वहां खिड़कियां, दरवाजे और दीवारें लगा दी हैं, जबकि कुछ ने निर्माण स्वयं तोड़ना भी शुरू कर दिया है।
गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों में बढ़ी चिंता
बीना भार्गव, पूनम गुप्ता, मोनू और अन्य महिलाओं ने कहा कि अधिकांश मकान अल्प आय और मध्यम वर्गीय परिवारों के हैं। वर्तमान परिस्थितियों के कारण लोग मानसिक तनाव और असुरक्षा की भावना में जीवन यापन कर रहे हैं। परिवारों का कहना है कि जिन मकानों में वे कई दशकों से रह रहे हैं, अब उन्हीं को नियमों के नाम पर विवादित बताया जा रहा है। इससे लोगों में भविष्य को लेकर चिंता और भय बढ़ गया है।
कर जमा किए, रजिस्ट्री हुई, फिर भी कार्रवाई पर सवाल
अधिवक्ता राकेश कुमार पाठक ने कहा कि योजना विकसित होने के बाद लगभग पांच दशकों तक परिषद की ओर से कभी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संबंधित भवनों में सेट बैक अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से निवासी नियमित रूप से जलकर, गृहकर और सीवर कर का भुगतान करते रहे हैं। इतना ही नहीं, कई संपत्तियों की फ्री होल्ड रजिस्ट्री भी हो चुकी है और संबंधित कॉलोनियां नगर निगम को हस्तांतरित की जा चुकी हैं। ऐसे में लोगों को हमेशा यही विश्वास रहा कि उनके निर्माण वैध और स्वीकृत हैं।
जनप्रतिनिधियों ने भी किया मंथन
सेट बैक विवाद को लेकर कैंट विधायक अमित अग्रवाल और राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने भी मामले पर विचार-विमर्श किया। बताया गया कि जनसमस्या के समाधान और प्रभावित लोगों को राहत दिलाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन से हस्तक्षेप कर न्यायोचित समाधान निकालने की मांग की है।
कार्रवाई से पहले पक्ष सुनने की मांग
धरने में शामिल महिलाओं ने कहा कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों का पक्ष अवश्य सुना जाए। उनका कहना है कि मानवीय आधार पर इस पूरे प्रकरण की समीक्षा की जानी चाहिए और गरीब तथा कमजोर वर्ग के परिवारों को राहत दी जानी चाहिए।
धरने में शालिनी गौतम, मिथिलेश गोयल, कौशल त्यागी, अनीता, उषा पांडे, अलका, सोनिया, बबीता, नीलम गुप्ता, मुकेश, पूनम, लक्ष्मी, रंजन, हेमलता, सोनिया, सोनम, नीता, अनु, सीमा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।