बांग्लादेशी आतंकियों का एक बड़ा 'तंत्र' हमारे बीच ऐसे कर रहा काम
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पिछले दिनों मुजफ्फरनगर में बांग्लादेशी आतंकवादी अब्दुल्ला अल मामून की गिरफ्तारी ने बांग्लादेशियों की घुसपैठ को लेकर खुफिया सिस्टम के कान खड़े कर दिए हैं। अब्दुल्ला ने पूछताछ में जो किस्सा बयां किया, वह बताता है कि घुसपैठ मुश्किल नहीं है। उनकी मदद के लिए बीच में बड़ा तंत्र काम कर रहा है। मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्टडी विभाग द्वारा बांग्लादेशियों की घुसपैठ को लेकर की गई रिसर्च कई अहम बातों का खुलासा करती है। रिसर्च बताती है कि बांग्लादेशियों के समर्थन में एक बड़ा तंत्र काम कर रहा है। राशन कार्ड से लेकर वोटर कार्ड तक आसानी से बन जाता है। बांग्लादेश के अवैध मदरसों में आतंकियों को ट्रेनिंग दी जा रही है।
आतंकी ट्रेनिंग का गढ़ बना बांग्लादेश
मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्टडी विभाग के शिक्षक डॉ. संजय कुमार ने आईसीएसएसआर की वित्तीय मदद से भारत की सुरक्षा ग्राहता में बांग्लादेश एक कारक: भू स्ट्रेटजी एवं भू आर्थिक आयाम से एक विश्लेषण विषय पर शोध किया। इस प्रोजेक्ट में नार्थ ईस्ट के असम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिजोरम, और मेघालय राज्यों को शामिल किया गया। शोध का निचोड़ यह है कि अमेरिका में आतंकवादी हमले के बाद बांग्लादेश आतंकी ट्रेनिंग कैंप का गढ़ बन चुका है। आतंकवादी संगठन वहां के मदरसों से जुड़े हैं। बांग्लादेश में करीब 20 हजार अवैध मदरसे चल रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है 50 मदरसे ऐसे हैं जिनका संचालन अफगानिस्तान से भागकर आए बांग्लादेशी मुजाहिद्दीन कर रहे हैं।
घुसपैठिए भी बड़े वोट बैंक
डॉ. संजय कुमार का कहना है बांग्लादेश से घुसपैठ की वजह से जम्मू-कश्मीर के बाद असम दूसरा राज्य बन गया है, जहां सबसे ज्यादा मुस्लिम हैं। असम के मूल निवासी अल्पसंख्यक हो गए हैं। पश्चिम बंगाल की 54 विधानसभा क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठिए निर्णायक भूमिका में हैं। राशन कार्ड बनाने से लेकर मतदाता सूची में नाम शामिल करने तक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। राजनीतिक दलों ने वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है।
जागरूकता से लगेगी रोक
नॉर्थ ईस्ट में ईस्टर्न कमांड की स्थापना करने वाले सेना के पूर्व डीजी मिलिट्री इंटेलीजेंस रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह का कहना है बांग्लादेश से घुसपैठ करना मुश्किल नहीं है। फेंसिंग है, लेकिन उसके ऊपर और नीचे से घुसपैठ के जुगाड़ घुसपैठियों ने खोज रखे हैं। सीमा क्षेत्र के दो-तीन किमी के दायरे में अगर लोग जागरूक होंगे और चौकसी बढ़ाई जाएगी तो घुसपैठ को कम किया जा सकता है। लोगों को जागरूक करने के साथ पूरे सिस्टम को अलर्ट होने की जरूरत है।
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