गणतंत्र दिवस 2019: डाकू सुल्ताना के खौफ से अंग्रेजों ने बनाए थे थाने
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर समेत कई जिलों में ब्रिटिशकाल में डाकू सुल्ताना के खौफ से ब्रिटिश शासनकाल में थानों की स्थापना हुई थी। 1868 में सहारनपुर पुलिस लाइन बनाई गई थी। इतिहास के पन्नों पर इसका ब्योरा काफी विस्तृत है।
जानकार बताते हैं कि ब्रिटिश शासन में डाकुओं का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी आतंक था। अंग्रेजी शासक भी डाकुओं से भयभीत थे। उस समय अपराध कम थे, लेकिन दस्यु गिरोह ज्यादा सक्रिय थे। आजादी के दीवाने भी अपनी ताकत से अंग्रेजों के पांव उखाड़ रहे थे। डाकुओं से सुरक्षा और आंदोलनकारियों पर दबाव बनाने के लिए थानों की स्थापना करनी पड़ी थी। तब देहरादून और हरिद्वार सहारनपुर जिले के का हिस्सा हुआ करते थे। मुजफ्फरनगर भी जिला नहीं था। वेस्ट यूपी का लंबा चौड़ा क्षेत्र मेरठ कमिश्नरी के अंतर्गत आता था। जिले में पुलिस लाईन के भवन का निर्माण 1868 में हुआ था। इसका प्रमाण आंकिक कार्यालय के द्वार पर लगा शिलापट है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की स्थापना 1909 में हुई थी। फिर 1907 में थाना बड़गांव, 1912 में थाना चिलकाना, बिहारीगढ़, मिर्जापुर, नकुड़, गंगोह कोतवाली, नगर कोतवाली, देहरादून कोतवाली, हरिद्वार व रुड़की थाने बनाए गए थे। देश आजाद होने के बाद आबादी बढ़ने के साथ अन्य थानों की स्थापना हुई थी।
वर्तमान में जनपद में थानों की संख्या 22 तक पहुंच गई है। महानगर में थाना कुतुबशेर, कोतवाली देहात, थाना जनकपुरी आजादी के काफी समय बाद बने है। कभी जिले में सिर्फ एक कप्तान हुआ करता था, अब यहां एसएसपी के साथ दो अपर पुलिस अधीक्षक और चार से सात तक सीओ तैनात हैं।
यंग ने किया था सुल्ताना को गिरफ्तार
आजादी के आंदोलन की लड़ाई में अंग्रेजों की नाक में दम करने वालों के लिए इंग्लैंड से पुलिस अफसर बुलाए जाते थे। सुल्ताना डाकू को पकड़ने के लिए डीआईजी मिस्टर यंग को विशेष तौर पर यहां बुलाया गया था। यंग ने ही सुल्ताना को बिजनौर जिले में मुआना से गिरफ्तार किया था। उसके बाद सुल्ताना को आगरा जेल में फांसी दी गई थी।
पहले कप्तान बने थे हांडू
15 अगस्त 1947 में देश के आजाद होने के बाद सहारनपुर जिले में कप्तान के रूप में पहली तैनाती जीके हांडू को मिली थी। इनके बाद एलबी बेजाल, आईएच किंग, एके गुप्ता और 1950 में बीएस चतुर्वेदी कप्तान बने थे। 28 वें कप्तान एससी रावत के कार्यकाल में पुलिस अधीक्षक के स्थान पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की तैनाती का दर्जा मिला। जनपद में वर्तमान में तैनात दिनेश कुमार 71 वें एसएसपी हैं।
वर्जन ----
थानों और पुलिस लाइन का इतिहास आजादी के पहले का है। पुलिस रिकार्ड में भी यह दर्ज है। डाकू सुल्ताना को पकड़ने के लिए ब्रिटिश शासनकाल में ज्यादातर थानों की स्थापना हुई। इसके बाद आबादी बढ़ने के साथ थानों की संख्या बढ़ती चली गई। - शरद सचान, आईजी, सहारनपुर परिक्षेत्र
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