स्मरण: पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की 119वीं जयंती आज, ईमानदारी और सादगी की मिसाल थे चौधरी साहब
रालोद के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने जातिविहीन समाज का सपना देखा था। वह नौकरियों में गांवों के लिए 50 फीसदी आरक्षण चाहते थे। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर आज सीसीएसयू के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में दो बजे कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
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किसान मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की आज 119वीं जयंती है। किसानों की लड़ाई लड़ने वाले चौधरी चरण सिंह ईमानदारी और सादगी की मिसाल थे।
पूर्व एमएलसी चौधरी जगत सिंह और छपरौली से पांच बार विधायक रहे चौधरी नरेंद्र सिंह बताते हैं कि 1977 में मेरठ के कुछ किसान नहर के पानी का मसला लेकर दिल्ली कोठी पर पहुंच गए। सुनने के बाद चौधरी साहब ने कहा कि आने-जाने में कितना किराया लगेगा।
किसानों ने बताया कि 120 रुपये लगेंगे। इस पर चौधरी साहब ने कहा कि जो काम पांच पैसे के पोस्टकार्ड से हो जाता, उसके लिए 120 रुपये क्यों खर्च किए। बनारस निवासी राजनारायण को एक समय चौधरी साहब का हनुमान कहा जाता था। लेकिन किन्हीं कारणों से राजनारायण उनसे नाराज हो गए और 1984 के लोकसभा चुनाव में उनकी सीट बागपत से चुनाव लड़ने आ गए। संयोग से दोनों एक ही दिन नामांकन करने पहुंच गए। पहले पर्चा भरने के चलते दोनों के समर्थक कहीं भिड़ न जाएं, ये सोचकर चौधरी साहब ने कहा कि हम स्थानीय है और राजनारायण हमारे मेहमान हैं। मेहमान होने के नाते उन्हें पहले पर्चा भरने दें, हम उनके बाद पर्चा भरेंगे।
जातिविहीन और खुशहाल समाज का देखा था सपना
रालोद के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने जातिविहीन समाज का सपना देखा था। वह नौकरियों में गांवों के लिए 50 फीसदी आरक्षण चाहते थे। अभावों से लड़ते हुए उन्होंने पढ़ाई की और आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। प्रदेश के सीएम और देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे।
चौधरी चरण सिंह का जन्म 1902 को नूरपुर में हुआ था। अपने पिता चौधरी मीर सिंह को किसानी जीवन से उत्पन्न कष्टों के बीच जीते हुए देख बड़े हुए चौधरी चरण सिंह आगरा कालेज से बीएससी और मेरठ कालेज मेरठ से एलएलबी करने के पश्चात वकील के रूप में प्रैक्टिस करने लगे। 1929 में उन्होंने गाजियाबाद में स्थानीय स्तर पर टाउन कांग्रेस कमेटी की स्थापना करके राजनीति में प्रवेश किया।
गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन से ईमानदारी, निर्भिकता का जो अध्याय शुरू हुआ व ताउम्र चलता रहा। भारतीय राजनीति में आज जहां भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और हिंसा सामान्य व्यवहार हो गई है वहीं चौधरी चरण सिंह इनसे हमेशा दूरी बनाए रखी। आत भी किसानों के जीवन में चौधरी साहब के रास्ते पर चलकर ही बदलाव आ सकता है।
चौ. चरण सिंह की जयंती पर कवि सम्मेलन आज
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर बृहस्पतिवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में सुबह 8:45 पर महापुरुषों की मूर्ति पर माल्यार्पण किया जाएगा। 9:00 बजे हवन होगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में दो बजे कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।