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हर उम्र के कद्रदानों को अपना बना लेते थे राहत इंदौरी

Wed, 12 Aug 2020 02:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2020 02:03 AM IST
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Relief Indore made Kadradan of every age their own
हर उम्र के कद्रदानों को अपना बना लेते थे राहत इंदौरी
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मेरठ। नौचंदी का मुशायरा हो या फिर मेरठ में विवि का ऑडीटोरियम। राहत इंदौरी माइक थामते तो हर कोई उनका दीवाना हो जाता। देशभक्ति का आयोजन हो या फिर किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में जश्न की शाम। वह हर उम्र के कद्रदानों को अपना बना लेते थे। राजनीति पर तंज कसती उनकी शायरी बेमिसाल थी तो वहीं उनकी रूमानियत भरी गजल सुनकर युवा प्यार में डूब जाते थे। मेरठ से जब भी उनको बुलावा जाता, वह इंकार नहीं करते।
शहर में शायद ही कोई ऐसा बड़ा कवि सम्मेलन या मुशायरा हुआ हो, जिसमें उन्होंने शिरकत न की हो। हाल ही में 13 फरवरी को एमआईईटी इंजीनियरिंग कॉलेज के कार्यक्रम में उन्होंने मेरठ में आखिरी बार शायरी पढ़ी। युवाओं से कहकर गए थे कि सलामत रहे तो कहीं किसी न किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी। लेकिन उनकी यह आखिरी महफिल बन गई। राहत इंदौरी का मेरठ से चार दशक से भी पुराना नाता रहा है। 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर होने वाले कवि सम्मेलन-मुशायरे हों या फिर सीसीएसयू में चौधरी चरण सिंह की जयंती के कार्यक्रम। उनको यहां के कॉलेजों में पढ़ने वाले युवाओं ने भी खूब सुना। अमर उजाला के मां तुझे प्रणाम कार्यक्रम में उन्होंने साल 2014, 2015 और 2017 में शिरकत की।
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मेरा तो बड़ा भाई-दोस्त चला गया
उर्दू अदब का बड़ा नाम चला गया। हम उनको उर्दू मौसी का बेटा कहते थे। हिंदी के मंचों पर भी बहुत लोकप्रिय थे। मेरा उनसे बड़े भाई और दोस्त का व्यक्तिगत रिश्ता था। मंगलवार सुबह ही बेटे से बात हुई तो कहा कि बस दुआ कीजिए सब ठीक हो। उसकी यह बात सुनकर ही मन घबरा रहा था। उनका जाना हिंदी-उर्दू के मंचों के लिए बड़ी क्षति है। - हरिओम पंवार, कवि
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दिल्ली में बस में बैठकर आ गए थे मेरठ
जब से कविता से जुड़ा, तब से मेरे प्रिय शायरों में सबसे बड़ा नाम राहत इंदौरी का रहा। मेरठ से खास नाता था उनका। हिंदी-उर्दू दोनों के ही मंचों पर उन्हें बेहद मन से सुना जाता रहा। 2004 में मैंने भगत सिंह बलिदान दिवस का पहला कार्यक्रम किया था तो उसमें वह दिल्ली से बस में बैठकर आ गए थे। जमीन से जुड़ा हुआ सितारा थे राहत इंदौरी। - सौरभ जैन सुमन, कवि
राहत इंदौरी की कमी पूरी नहीं की जा सकती
राहत इंदौरी के साथ कई बार मुशायरों का स्टेज साझा कर चुके मारूफ शायर अजहर इकबाल ने राहत साहब को याद करते हुए कहा खबर नहीं के अभी कोरोना हमारे और कितने इम्तहान लेने वाला है। राहत इंदौरी के इंतकाल की खबर से दुनिया ए अदब में मातम छाया हुआ है। उनकी शायरी ने अवाम में सियासी और समाजी शऊर पैदा किया।
जब सुह आया राहत इंदौरी का नंबर...
बुलाती है मगर जाने का नहीं...विश्व प्रख्यात उर्दू शायर राहत इंदौरी की इन मशहूर चंद लाइनों ने युवाओं में भी इस अजीम शायर को नई पहचान दी। टिकटॉक से लेकर अन्य एप पर युवाओं ने इस शेर पर जमकर ठहाके लगाए। पूर्व मंत्री डॉ. मेराजुद्दीन अहमद ने नौचंदी में आयोजित 2 मई 2008 की राहत इंदौरी की यादें साझा की। मुशायरा कमेटी के अध्यक्ष डॉ. मेराजुद्दीन थे। पटेल मंडप में रात के 9 बजे मुशायरा हुआ जो सुबह तक चला। लेकिन राहत इंदौरी को सुनने के लिए जनता सुबह तक इंतजार करती रही। सुबह की फज्र अजान के बाद राहत इंदौरी का नंबर आया। जिस पर इंदौरी ने मेरठ की जनता के प्यार और लगाव की सराहना की।
शोक सभा में किया याद
मंगलवार को निधन के बाद डॉ मेराजुद्दीन के आवास पर शोक सभा हुई। जिसमें राहत इंदौरी को याद किया गया। डॉ मेराजुद्दीन के पिता पद्मश्री हकीम सैफुद्दीन के नाम से मुशायरे आयोजित हुए हैं, जिसमें राहत इंदौरी ने कई बार शिरकत की। शोक सभा में मौ. सलीम सिद्दीकी, चौ. यशपाल सिंह, कुंवर रईस अहमद, हाजी मईनुद्दीन, सिराज अहमद, बदर महमूद, हनीफ पहलवान आदि शामिल रहे।
सोशल मीडिया पर दी अंतिम विदाई
ट्विटर पर जैसे ही राहत इंदौरी के निधन की खबर पोस्ट हुई एक घंटे में एक लाख से ज्यादा लोगों ने खबर को देखा और री-ट्वीट किया। उनके फैंस ने शायरी के साथ राहत इंदौरी को अंतिम विदाई दी। ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया पर राहत इंदौरी को याद किया गया। मेरठ के कई खिलाड़ियों और सामाजिक संस्थाओं से जुडे़ लोगों ने राहत इंदौरी को श्रद्धांजलि दी।
राहत इंदौरी का यूं जाना, आंखें नम कर गया
विश्व प्रसिद्ध हास्य कवि सैयद एजाजुद्दीन शाह उर्फ पापुलर मेरठी ने शायर राहत इंदौरी के जाने पर उर्दू और हिंदी को बड़ा नुकसान बताया। मेरठ के फैज ए आम इंटर कॉलेज में 1979 में हुए मुशायरे में उन्होंने पहली बार राहत इंदौरी को सुना। कहा वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे, ये बात कहते हुए पापुलर मेरठी की आंखें नम हो गई। डॉ. यूसुफ कुरैशी ने भी राहत इंदौरी के निधन पर दुख जताया। बॉडी बिल्डिंग एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी अरशद मक्की ने राहत इंदौरी को खिराज ए अकीदत पेश की।

कौमी एकता समिति ने दुख जताया
कौमी एकता सद्भावना समिति ने शायर राहत इंदौरी के निधन पर दुख जताया। समिति अध्यक्ष नायब शहरकाजी जैनुर राशिद्दीन, महामंत्री अमित अग्रवाल, हाजी इमरान सिद्दीकी, हाजी शीराज रहमान, एडवोकेट राजीवकान्त शर्मा, राजेश दीवान, फारूख अंसारी सहित अन्य सदस्यों ने राहत इंदौरी के निधन पर दुख जताया।
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