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Meerut News: रावण ने कुटुंब की मुक्ति के लिए लिया श्रीराम से वैर
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मेरठ। जेलचुंगी रामलीला में 25 साल से रावण का किरदार निभा रहे अजय वर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम ही उनके आदर्श हैं। अजय वर्मा ने बताया कि जेलचुंगी रामलीला 1960 में शुरू हुई। 2017 किडनी इंफेक्शन के चलते तबीयत बहुत खराब थी। ऐसे में तैयारी का मौका नहीं मिला। परिजनों के विरोध के बाद भी रावण का रोल किया और दर्शकों ने खूब सराहा। समय के साथ बीमारी भी खत्म हो गई।
अजय वर्मा ने कहा कि रावण बहुत बड़ा ज्ञानी और तपस्वी था। भगवान श्रीराम के हाथों की जिसका संहार हो उसे तो वैकुंठ में ही स्थान मिलता है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि रावण ने सोच समझकर श्रीराम से बैर लिया और अपने पूरे कुटुंब को मुक्ति के साथ वैकुंठ में स्थान पा लिया। हम तो 25 साल से मंच पर श्रीराम के हाथों अपने अंदर छिपे रावण को मारते हैं। अजय वर्मा ने बताया कि बचपन में रामलीला देखने आते थे तो जिज्ञासा हुई कि हम भी ऐसा ही रोल करें।
1983 में पहली बार रामलीला में किरदार निभाने का मौका मिला। परिवार की भी तब आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पूरे दिन मेहनत करते थे और अर्ध रात्रि तक मंच पर प्रस्तुति देकर अगले दिन पुन: कार्य पर चले जाते थे। अब ट्रांसपोर्ट का अच्छा कारोबार और बर्फ की ठेकेदारी भी करते हैं। श्रीराम की कृपा से पूरा परिवार समृद्ध हो गया है।
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जोकर बनकर हंसाता हूं, भरपेट भोजन खिलाता हूं
जेलचुंगी रामलीला में जोकर का किरदार निभाने वाले 65 वर्षीय गौरी शंकर लोधी ने कहा कि ‘कहता है जोकर सारा जमाना आधी हकीकत आधा फंसाना, चश्मा उतारो फिर देखो यारो, दुनिया नई है चेहरा पुराना’। वह रामलीला में सालों से जोकर की भूमिका निभाकर बच्चों को रामलीला से जोड़ते हैं। उन्होंने बताया कि मेरा नाम जोकर मूवी देखकर उन्हें यह प्रेरणा मिली। हर रामलीला में बच्चों के लिए कुछ हटकर किया जाता है। इसी क्रम में हमारी रामलीला में बच्चों को हंसाने के लिए जोकर दर्शकों के बीच जाकर बच्चों को हंसाते हैं।
इसके अलावा वह रामलीला में सुग्रीव, खर, दूषण, बाली और ताड़का का भी रोल करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका जेलचुंगी चौराहे पर ही भोला होटल हैं। उन्होंने बताया कि उनके होटल में खाना खाने आने वाले किसी भी व्यक्ति को 50 रुपये में भरपेट भोजन मिलता है। समय के साथ रामलीला में भी बदलाव आया है। बच्चे रामलीला से दूर होकर मोबाइल तक सीमित हो गए हैं।
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अजय वर्मा ने कहा कि रावण बहुत बड़ा ज्ञानी और तपस्वी था। भगवान श्रीराम के हाथों की जिसका संहार हो उसे तो वैकुंठ में ही स्थान मिलता है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि रावण ने सोच समझकर श्रीराम से बैर लिया और अपने पूरे कुटुंब को मुक्ति के साथ वैकुंठ में स्थान पा लिया। हम तो 25 साल से मंच पर श्रीराम के हाथों अपने अंदर छिपे रावण को मारते हैं। अजय वर्मा ने बताया कि बचपन में रामलीला देखने आते थे तो जिज्ञासा हुई कि हम भी ऐसा ही रोल करें।
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1983 में पहली बार रामलीला में किरदार निभाने का मौका मिला। परिवार की भी तब आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पूरे दिन मेहनत करते थे और अर्ध रात्रि तक मंच पर प्रस्तुति देकर अगले दिन पुन: कार्य पर चले जाते थे। अब ट्रांसपोर्ट का अच्छा कारोबार और बर्फ की ठेकेदारी भी करते हैं। श्रीराम की कृपा से पूरा परिवार समृद्ध हो गया है।
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जोकर बनकर हंसाता हूं, भरपेट भोजन खिलाता हूं
जेलचुंगी रामलीला में जोकर का किरदार निभाने वाले 65 वर्षीय गौरी शंकर लोधी ने कहा कि ‘कहता है जोकर सारा जमाना आधी हकीकत आधा फंसाना, चश्मा उतारो फिर देखो यारो, दुनिया नई है चेहरा पुराना’। वह रामलीला में सालों से जोकर की भूमिका निभाकर बच्चों को रामलीला से जोड़ते हैं। उन्होंने बताया कि मेरा नाम जोकर मूवी देखकर उन्हें यह प्रेरणा मिली। हर रामलीला में बच्चों के लिए कुछ हटकर किया जाता है। इसी क्रम में हमारी रामलीला में बच्चों को हंसाने के लिए जोकर दर्शकों के बीच जाकर बच्चों को हंसाते हैं।
इसके अलावा वह रामलीला में सुग्रीव, खर, दूषण, बाली और ताड़का का भी रोल करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका जेलचुंगी चौराहे पर ही भोला होटल हैं। उन्होंने बताया कि उनके होटल में खाना खाने आने वाले किसी भी व्यक्ति को 50 रुपये में भरपेट भोजन मिलता है। समय के साथ रामलीला में भी बदलाव आया है। बच्चे रामलीला से दूर होकर मोबाइल तक सीमित हो गए हैं।