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यूपी: दुर्लभ कछुओं की बड़ी तस्करी का भंडाफोड़, रेलवे पार्सल लाए गए थे मेरठ, दो गिरफ्तार  

Sat, 03 Nov 2018 01:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 03 Nov 2018 01:35 PM IST
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rare turtles smuggling was busted Meerut  brought by railway parcels one arrested
गिरफ्तार किया गया आरोपी - फोटो : अमर उजाला
वन विभाग की टीम ने मेरठ में कछुओं की बड़ी तस्करी का भंडाफोड़ किया है। टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर इनके पास 13 स्टार प्रजाति के दुर्लभ कछुए बरामद किए गए हैं। इसके अलावा पांच रेड इयर्ड स्लाइडर भी बरामद किए गए हैं। इन कछुओं को चेन्नई से रेलवे पार्सल द्वारा दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मंगाया गया था। वहां से इनको कछुआ तस्कर मेरठ में सप्लाई करने के लिए ला रहा था। डीएफओ अदिति शर्मा ने बताया कि आरोपी दो साल से मेरठ में कछुआ सप्लाई कर रहा था। 
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डीएफओ अदिति शर्मा के मुताबिक वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो से मिली जानकारी के बाद वाइल्ड ट्रस्ट ऑफ इंडिया नामक संस्था के साथ वन विभाग मेरठ और वन्य जीव एवं अपराध अनुसंधान नोएडा की टीम रेकी कर रही थी। बृहस्पतिवार को टीम ने सिविल लाइन क्षेत्र में हजारी की प्याऊ के पास शास्त्रीनगर सेक्टर तीन निवासी सुमित गर्ग को दबोच लिया।
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उसके बैग की तलाशी ली गई तो उसमें गत्ते के डिब्बे में 12 स्टार प्रजाति के कछुए और पांच रेड इयर्ड स्लाइडर बरामद हुए। आरोपी से पूछताछ के बाद उसके एक अन्य साथी जागृति विहार सेक्टर आठ निवासी शुभम गोस्वामी के घर दबिश दी गई तो एक स्टार प्रजाति का कछुआ उसके घर से बरामद हुआ। 
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पूछताछ में आरोपी सुमित गर्ग ने बताया कि इन कछुओं को चेन्नई से रेलवे पार्सल द्वारा मंगाया गया था। सुमित दिल्ली से इन्हें मेरठ लेकर आया और यहां पर इनको सप्लाई किया जाना था। टीम का मानना है कि वो सौ से ज्यादा कछुए मेरठ में सप्लाई कर चुका है। इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं, जानकारी की जा रही है।

सुमित को टीम ने भारतीय वन अधिनियम 1972 की धारा 2, 9, 50(1) एवं 51 के अर्न्तगत एसीजेएम न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। जांच आईएफएस अधिकारी आकाश दीप बधावन को सौंपी गई है। डीएफओ अदिति शर्मा ने बताया कि स्टार प्रजाति के कछुए उत्तर भारत में नहीं मिलते हैं। ये स्थलीय कछुआ है। जो रेड इयर्ड स्लाइडर कछुए मिले हैं, वे विदेशी हैं। 

लखनऊ में रखे जाएंगे सारे कछुए 
13 स्टार प्रजाति और पांच रेड इयर्ड स्लाइडर क्यूंकि यहां नहीं मिलते ऐसे में इनको ऐसी जगह छोड़ा जाएगा जहां ये सुरक्षित रह सकें। फिलहाल लखनऊ वन विभाग के सेंटर में भेजा जा रहा है। इन्हें सुरक्षित जगहों पर छोड़ा जाएगा। 

rare turtles smuggling was busted Meerut  brought by railway parcels one arrested
बरामद किए गए कछुए

समंदर के रास्ते मैक्सिकन कछुओं की भारत में बड़े पैमाने पर तस्करी की जा रही है। चेन्नई इसका बड़ा केंद्र बना हुआ है। वहां से वन्य जीवों की सप्लाई करने वाले तस्कर इन्हें ट्रेन के जरिए देश के अन्य शहरों में भेज रहे हैं। मेरठ में भी मैक्सिको में पाए जाने वाले रेड इयर्ड स्लाइडर कछुए बरामद हुए हैं। इन कछुओं को मेरठ के बड़े व्यापारियों को सप्लाई किया जाना था। वन विभाग की टीम इस बात की जानकारी में जुटी है कि इससे पहले शहर में किन-किन लोगों को कछुए सप्लाई किए गए हैं। इसके साथ ही किन-किन लोगों ने उन्हें पाला हुआ है।  

कछुओं की तस्करी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंधविश्वास है। वास्तु शास्त्रियों की सलाह पर घरों में कांच के बर्तनों में कछुओं को रखे जाने का चलन बढ़ रहा है। इसके पीछे अंधविश्वास यह भी माना जाता घरों में रखने वाले इन कछुओं के बलबूते परिवार में सुख-समृद्धि आती है साथ ही धन की भी बढ़ोतरी होती है। इस तरह की ही भ्रांतियों के कारण दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की तस्करी हो रही है। इसमें मैक्सिकन रेड इयर्ड स्लाइडर कछुओं और स्टार टोरटॉइज की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है।

स्टार टोरटॉइज स्थलीय कछुआ है। ये पानी में नहीं रहता। इसके ऊपर स्टार नुमा चिन्ह बने होते हैं। यही वजह है कि लोग इसे घर में रख रहे हैं। डीएफओ अदिति शर्मा बताती हैं कि ये दुर्लभ प्रजाति में आता है, इसको कोई पाल नहीं सकता है। रेड इयर्ड कछुए पानी और जमीन दोनों पर रह लेते हैं। ये छोटा होता है, ऐसे में इसको भी लोग घरों में पाल लेते हैं। टीम इस बात का पता लगाने में जुटी है कि पहले किन लोगों को कछुए सप्लाई किए गए हैं। 

कछुओं को मारने वाला गिरोह तो सक्रिय नहीं  
चीन में अंधविश्वास के चलते लोग कई तरह के पूजा-पाठ और भविष्यवाणी के लिए कछुओं की खाल का इस्तेमाल लंबे समय से करते हैं। कछुए की खाल के जरिए भविष्य बताने की बात कही जाती है। इसमें कछुए के खोल को गर्म करके उस पर पड़ने वाली दरारों और धारियों को पढ़ने की बात कही जाती है।

इसी तरह चीन के लोग कछुए के खोल की जेली बनाकर शक्तिवर्धक दवाओं में भी इस्तेमाल करते हैं। कछुओं के खोल से तरह-तरह का सजावटी सामान, आभूषण, चश्मों के फ्रेम आदि भी बनाए जा रहे हैं। कछुओं के चिप्स भी चीन में बहुत खाए जाते हैं। ऐसे में टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं मेरठ में तो ऐसा गिरोह तो सक्रिय नहीं है जो ऐसा काम कर रहा हो। 

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