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रैपिड रेल : नौ स्टेशनों के लिए निजी भूमि की दरें तय नहीं, कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने दिए निर्देश

Fri, 04 Jun 2021 08:05 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 04 Jun 2021 08:05 PM IST
सार

रैपिड रेल के निर्माण में अभी भी कई पेंज फंसे हुए हैं। पढ़िए रैपिड रेल के निर्माण को लेकर क्या नया अपडेट है।

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Rapid Rail Update: Rates of private land have not been fixed for nine stations in Meerut
रैपिड रेल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रैपिड रेल के 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के काम में अभी भी पेच फंसे हैं। मेरठ शहर के नौ स्टेशन निजी भूमि पर बनाए जाने हैं। इनके लिए निजी भू-स्वामियों से दरें तय करने की बातचीत फाइनल नहीं हो सकी है। हाल ही में कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने इस बारे में एडीएम वित्त और सब रजिस्ट्रार को निर्देश दिए हैं।

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निजी भूमि स्वामियों के साथ पहली बैठक नौ जुलाई 2019 और दूसरी 28 जनवरी, 20 को हुई थी। तब से फाइल इधर-उधर हो रही है। 28 मई कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने प्रोजेक्ट की समीक्षा की थी। अब एनसीआरटीसी को मेरठ में ही कार्य की रफ्तार बढ़ानी है। एडीएम वित्त सुभाष चंद प्रजापति ने बताया कि निजी भूमि वाले स्वामियों से संपर्क किया गया है। अगले दो-तीन दिन में इसका निपटारा हो जाएगा।  
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एक भूमिगत, बाकी सब एलीवेटेड
निजी भूमि पर नौ में से आठ स्टेशन एलीवेटेड हैं। एक स्टेशन मेरठ सेंट्रल भूमिगत है। एलीवेटेड स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार के लिए निजी भूमि की जरूरत होगी। इसके अलावा मोदीपुरम डिपो के लिए जमीन की आवश्यकता होगी।
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निजी जमीन पर यहां बनेंगे स्टेशन
मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, डौरली, मेरठ नॉर्थ और मोदीपुरम। इसके अलावा मोदीपुरम डिपो के लिए भी 71.58 हेक्टेयर निजी भूमि की आवश्यकता है।  

कार्यालय साकेत से मोदीपुरम स्थानांतरित  
रैपिड रेल कॉरिडोर की रफ्तार बढ़ाने के लिए गाजियाबाद और मेरठ में कार्यालय बनाकर चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर तैनात किए थे। मेरठ के लिए कार्यालय साकेत में खोला गया था। यहां स्थान कम होने के कारण अब कार्यालय मोदीपुरम स्थित राष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र में स्थानांतरित कर दिया गया है। 

चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर के निर्देशन में इंजीनियर यहीं से काम की रफ्तार बढ़ाएंगे। अगले 10-15 दिन में टीपीनगर से ट्रैफिक मेट्रो प्लाजा पर लाया जाएगा। नवीन मंडी के आगे से भूमिगत स्टेशन और टनल का कार्य शुरू किया जाना है। कॉरिडोर में शहर में कुल तीन भूमिगत स्टेशन बनाए जाने हैं। एक बेगमपुल में कैंट बोर्ड की जमीन पर बनेगा, जबकि दूसरा भैसाली का भूमिगत स्टेशन सदर तहसील की सरकारी जमीन पर है। मेरठ सेंट्रल स्टेशन निजी जमीन पर बनाया जाएगा। 

टीम का विस्तार किया
जैसे-जैसे रैपिड रेल के काम की रफ्तार बढ़ रही है, एनसीआरटीसी टीमों का पुनर्गठन कर रहा है। एनसीआरटीसी ने कुछ दिन पहलेे एनसीआरटीसी एक्सप्रेस ट्रांजिट लिमिटेड का गठन किया था। इसमें एक चेयरमैन के साथ पांच डायरेक्टर थे। अब टीम का विस्तार करते हुए सीईओ के साथ 15 और की टीम बनाई गई है। इसमें मेेंटीनेंस, सिग्नलिंग, व्यावसायिक, आधारभूत ढांचा, ऑपरेशन और सूचना आदि विभागों के अधिकारियों की तैनाती की गई है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर: सैदपुर में रखा गया 135 टन का गर्डर 
मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने के लिए 225 किलोमीटर के ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में खुर्जा से पिलखनी के बीच गुरुवार को 135 टन का सबसे भारी गर्डर रखा गया। इसकी लंबाई 34 मीटर, ऊंचाई 2.3 मीटर है। गर्डर को मोहिउद्दीनपुर के पास स्थित सैदपुर गांव में नहर पर रखा गया। डीएफसी के अधिकारियों के मुताबिक इस चरण का ये सबसे भारी गर्डर था। इसके लिए 350 और 400 टन की दो हाइड्रोलिक क्रेन का उपयोग किया गया।

इस चरण को जून, 2022 तक पूरा करना है। पिछले दिनों किसानों से जमीन पर बात न बन पाने से कई स्थानों पर कार्य रुक गया था। हालांकि कोरोना काल में भी डीएफसी का कार्य जारी रहा। अभी तक सबसे भारी गर्डर 100 टन के आसपास रहा था। एक महीने में 36 गर्डर रखे जा चुके हैं। वहीं, दिल्ली रोड को क्रॉस करने के लिए भी गर्डर रखा जाना है। गर्डर रखते वक्त दिल्ली-मेरठ रोड बंद करने के बजाय एक छोटा सा हिस्सा तैयार कर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा।

गर्डर रखे जाने के दौरान प्रोजेक्ट मैनेजर घनश्याम तिवारी, साइट इंचार्ज सुनीत कुमार शर्मा, प्रीतम, आशुतोष वर्मा, विंदेश मिश्रा और एलएंडटी और डीएफसीसी इंचार्ज डॉ. रमन चौधरी मौजूद रहे। 

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