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रामपुर तिराहा कांड: फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई, प्रकरण की चार फाइलें अभी तक लंबित

Sat, 27 Nov 2021 01:24 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 27 Nov 2021 01:24 PM IST
सार

उत्तराखंड निर्माण की नींव बने 27 साल पुराने रामपुर तिराहा कांड की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में शुरू होगी। सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक में केस चलेगा। मुजफ्फरनगर में प्रकरण की चार फाइलें अभी तक लंबित हैं। पढ़ें पूरी खबर।

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Rampur Tiraha case: Hearing will be held in fast track court, four files of the case are still pending
रामपुर तिराहा कांड का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड निर्माण की नींव बने 27 साल पुराने रामपुर तिराहा कांड की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में शुरू होगी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने चार मुकदमों के ट्रायल के लिए सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक को अधिकृत किया है। पैरवी के लिए दो अधिवक्ताओं की कमेटी भी बनाई गई है।

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एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों पर फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और मुकदमे दर्ज कराए थे। इनमें चार मुकदमों जिले में विचाराधीन हैं। पहले एसीजेएम द्वितीय की कोर्ट में मुकदमे की फाइल भेजी गई थी, लेकिन यहां लंबे समय से सुनवाई नहीं हो सकी थी।
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एसीजेएम द्वितीय के पत्र के बाद सीजेएम ने प्रकरण की सुनवाई के लिए सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक को अधिकृत किया है। अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने इसकी पुष्टि की है। नैनीताल में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ता रजनीश चौहान के साथ उन्हें पैरवी के लिए पैनल मेें रखा गया है।
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पुलिस की गोली से इनकी हुई थी मौत
देहरादून नेहरू कॉलोनी निवासी रविंद्र रावत उर्फ गोलू, भालावाला निवासी सतेंद्र चौहान, बदरीपुर निवासी गिरीश भदरी, अजबपुर निवासी राजेश लखेड़ा, ऋषिकेश निवासी सूर्यप्रकाश थपलियाल, ऊखीमठ निवासी अशोक कुमार और भानियावाला निवासी राजेश नेगी की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी।

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इस तरह हुई थी सीबीआई जांच
प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश 1995 में हुए थे। सीबीआई ने कई मुकदमे दर्ज कराएं, जो अदालत में चल रहे हैं। तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह और एसएसपी आरपी सिंह भी नामजद किए गए थे। नौ नवंबर, 2000 को उत्तराखंड का गठन हुआ था।

क्या था मामला
एक अक्तूबर, 1994 की रात उत्तराखंड की मांग के लिए आंदोलनकारी देहरादून से दिल्ली के लिए निकले थे। रात में रामपुर तिराहे पर पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया। पुलिस ने लाठीचार्ज और फायरिंग की। सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। महिलाओं के साथ अभद्रता की गई थी। मुजफ्फरनगर के लोगों ने आंदोलनकारियों की मदद की थी। 

केस-एक : सीबीआई बनाम मिलाप सिंह
केस-दो :  सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी
केस-तीन : सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा
केस-चार : सीबीआई बनाम ब्रजकिशोर सिंह

यह मामले कर दिए गए खत्म
सीबीआई द्वारा आरोपी बनाए गए तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मोती सिंह, तत्कालीन थानाध्यक्ष राजबीर सिंह और एक अन्य मामले में आरोपियों की मौत होने के कारण यह मामले खत्म हो गए हैं। अन्य प्रकरणों का ट्रायल चलेगा।

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