रक्षाबंधन 2019: देशी गाय के गोबर से बन रहीं सुंदर राखियां, त्योहार के साथ करें पर्यावरण का संरक्षण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बार रक्षाबंधन पर बहन भाइयों की कलाई पर चाइनीज राखी नहीं, बल्कि देशी गायों की गोबर से बनी राखियां बांधेंगी। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में नगीना स्थित श्रीकृष्ण गोशाला में देशी गाय के गोबर से राखी बनाई जा रही हैं। ये राखी बाजार में भी उतारी जाएंगी। लखनऊ की एक संस्था ने भी राखी खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। नष्ट होने के बाद भी ये राखी पर्यावरण को हानि नहीं पहुंचाएंगी।
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्यार का संदेश देने वाला पर्व है। भाइयों की कलाई में राखी बांधकर बहनें उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं। सनातन परंपरा के प्रतीक इस पर्व पर भाइयों की कलाई पर पहले स्वदेशी राखियां बांधी जाती थीं, लेकिन अब उनके स्थान पर चीन में बनी राखियां आ गई हैं। लेकिन इस बार नगीना स्थित श्रीकृष्ण गोशाला ने रक्षाबंधन पर गाय के गोबर से बनी राखियां बाजार में उतारने की तैयारी कर ली है।
श्रीकृष्ण गोशाला में देशी नस्ल की लाल सिंधी गाय हैं। लाल सिंधी गाय के गोबर से गोशाला में राखी बनाई जा रही हैं। गाय के गोबर को शेप देकर उसे एक धागे से बांधा जाएगा। इससे जहां गोशाला की आमदनी बढ़ेगी, वहीं इससे देश की मुद्रा भी विदेश में जाने से बचेगी।
खास बात यह है कि चाइना की राखी में ज्यादातर प्लास्टिक आदि का प्रयोग होता है। यह राखी टूटने के बाद एकदम से नष्ट नहीं होती हैं। इनमें प्रयोग होने वाली सामग्री पर्यावरण को प्रदूषित करती है, लेकिन देशी गाय के गोबर से बनी राखी नष्ट होने के बाद मिट्टी में घुलकर उसे उपजाऊ ही बनाएंगी। एक राखी की कीमत 50 रुपये रखी गई है।
देशी गाय का गोबर और मूत्र वरदान
गोबर शब्द दो शब्दों से मिलकर बनता है, गो और बर। गो का मतलब होता है गाय और बर का मतलब होता है वरदान। भारतीय संस्कृति में देशी गाय के गोबर व मूत्र को वरदान माना गया है।
गोशाला संचालक अलका लाहोटी के अनुसार देशी गायों का गोबर स्वास्थ्य व पर्यावरण को किसी तरह की हानि नहीं पहुंचाएगा। ऐसी राखी को सभी अपनाएं। इससे जिलेवासी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से गोशाला की आर्थिक मदद करके गोमाता की सेवा भी कर सकते हैं।