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21 साल में पहली बार मेरठ में हुई इतनी बारिश कि टूट गए रिकॉर्ड
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मोदीपुरम। मौसम का मिजाज एक बार फिर गड़बड़ा गया है। मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश बुधवार को भी पूरे दिन रुक-रुककर जारी रही। जानीखुर्द के आसपास हल्की ओलावृष्टि भी हुई। अगर साढ़े चार मिमी बारिश और हो गई तो जनवरी 1999 में हुई बारिश का रिकॉर्ड टूट जाएगा। जनजीवन प्रभावित होने के साथ यह बारिश फसलों के लिए भी नुकसानदेह है।
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम में यह बदलाव आया है। पहाड़ों में जहां बर्फबारी हो रही है, वहीं मैदानी इलाकों में बारिश। ठंड और तेज हवाओं के चलते लोग घरों में दुबके रहे। दिन व रात के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक 21 साल में 1 से 8 जनवरी के बीच पहली बार रिकार्ड 36 मिमी बारिश दर्ज की गई। सन 1999 में 44.3 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, इससे पहले 1989 में 48.3 मिमी बारिश हुई थी। अभी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। बृहस्पतिवार को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे। कोहरे के साथ बारिश के भी आसार हैं। तापमान गिरने से कड़ाके की ठंड फिर से लौटेगी। बुधवार को अधिकतम तापमान 14.5 और न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आर्द्रता अधिकतम 98 व न्यूनतम 91 प्रतिशत दर्ज की गई। एक जनवरी से अब तक 36 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। हवा की रफ्तार चार किमी प्रतिघंटा रही।
प्रदूषण से मिली राहत
तेज बारिश व सर्द हवाओं के चलने से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में भी गिरावट दर्ज की गई है। मेरठ का एक्यूआई 107 पर पहुंच गया। पल्लवपुरम के लोगों ने भी प्रदूषण से राहत महसूस की। बुधवार को पल्लवपुरम का एक्यूआई स्तर 99 दर्ज किया गया ।
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गेहूं की पछेती बुवाई पिछड़ी
गन्ने की कटाई के बाद जो किसान गेहूं की बुवाई करने की सोच रहे थे, उनके लिए बारिश ने मुसीबत खड़ी कर दी है। बारिश के बाद ओट (पलेवा) होने में कम से कम 15 से 20 दिन लगेंगे, जिसके बाद तापमान में वृद्धि होने लगेगी। दिन भी बड़ा होने लगेगा। गेहूं की फसल की बुवाई के लिए कम तापमान चाहिए, जबकि उसे पकने के लिए बड़े दिन व अधिक तापमान चाहिए। इस बारिश से सबसे अधिक उन किसानों को निराशा लगी है, जो पछेती फसल में गेहूं की बुवाई करने की सोच रहे थे। फूलों, सब्जियों और सरसों की फसल भी बारिश से प्रभावित होगी। बारिश बंद होने के बाद समय से पानी की निकासी कर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। सरसों की फसल पर यूरिया छिड़ककर रोग से बचाया जा सकता है।
अभी सक्रिय रहेगा पश्चिमी विक्षोभ
वेस्ट यूपी में अभी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। बृहस्पतिवार को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे। कोहरा व धुंध होने के आसार बने रहेंगे। हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है। तापमान में गिरावट होने से ठंड का प्रकोप बढ़ेगा।
डा. एन. सुभाष, मौसम वैज्ञानिक, आईआईएफएसआर
सन बारिश
1999 44.3
2000 0.0
2001 9.5
2002 0.0
2003 0.0
2004 0.0
2005 0.0
2006 1.2
2007 0.0
2008 0.0
2009 0.0
2010 0.0
2011 0.0
2012 3.0
2013 0.0
2014 0.0
2015 15.8
2016 0.0
2017 29.3
2018 0.0
2019 1.3
2020 36.0
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पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम में यह बदलाव आया है। पहाड़ों में जहां बर्फबारी हो रही है, वहीं मैदानी इलाकों में बारिश। ठंड और तेज हवाओं के चलते लोग घरों में दुबके रहे। दिन व रात के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक 21 साल में 1 से 8 जनवरी के बीच पहली बार रिकार्ड 36 मिमी बारिश दर्ज की गई। सन 1999 में 44.3 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, इससे पहले 1989 में 48.3 मिमी बारिश हुई थी। अभी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। बृहस्पतिवार को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे। कोहरे के साथ बारिश के भी आसार हैं। तापमान गिरने से कड़ाके की ठंड फिर से लौटेगी। बुधवार को अधिकतम तापमान 14.5 और न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आर्द्रता अधिकतम 98 व न्यूनतम 91 प्रतिशत दर्ज की गई। एक जनवरी से अब तक 36 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। हवा की रफ्तार चार किमी प्रतिघंटा रही।
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प्रदूषण से मिली राहत
तेज बारिश व सर्द हवाओं के चलने से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में भी गिरावट दर्ज की गई है। मेरठ का एक्यूआई 107 पर पहुंच गया। पल्लवपुरम के लोगों ने भी प्रदूषण से राहत महसूस की। बुधवार को पल्लवपुरम का एक्यूआई स्तर 99 दर्ज किया गया ।
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गेहूं की पछेती बुवाई पिछड़ी
गन्ने की कटाई के बाद जो किसान गेहूं की बुवाई करने की सोच रहे थे, उनके लिए बारिश ने मुसीबत खड़ी कर दी है। बारिश के बाद ओट (पलेवा) होने में कम से कम 15 से 20 दिन लगेंगे, जिसके बाद तापमान में वृद्धि होने लगेगी। दिन भी बड़ा होने लगेगा। गेहूं की फसल की बुवाई के लिए कम तापमान चाहिए, जबकि उसे पकने के लिए बड़े दिन व अधिक तापमान चाहिए। इस बारिश से सबसे अधिक उन किसानों को निराशा लगी है, जो पछेती फसल में गेहूं की बुवाई करने की सोच रहे थे। फूलों, सब्जियों और सरसों की फसल भी बारिश से प्रभावित होगी। बारिश बंद होने के बाद समय से पानी की निकासी कर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। सरसों की फसल पर यूरिया छिड़ककर रोग से बचाया जा सकता है।
अभी सक्रिय रहेगा पश्चिमी विक्षोभ
वेस्ट यूपी में अभी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। बृहस्पतिवार को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे। कोहरा व धुंध होने के आसार बने रहेंगे। हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है। तापमान में गिरावट होने से ठंड का प्रकोप बढ़ेगा।
डा. एन. सुभाष, मौसम वैज्ञानिक, आईआईएफएसआर
सन बारिश
1999 44.3
2000 0.0
2001 9.5
2002 0.0
2003 0.0
2004 0.0
2005 0.0
2006 1.2
2007 0.0
2008 0.0
2009 0.0
2010 0.0
2011 0.0
2012 3.0
2013 0.0
2014 0.0
2015 15.8
2016 0.0
2017 29.3
2018 0.0
2019 1.3
2020 36.0