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Meerut News: स्टांप घोटाले में क्राइम ब्रांच की अधूरी विवेचना पर उठ रहे सवाल

Mon, 24 Feb 2025 01:48 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 24 Feb 2025 01:48 AM IST
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Questions are being raised on the crime branch's incomplete investigation into the stamp scam.
मेरठ। स्टांप घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू को ट्रांसफर होने का पत्र जारी होने पर क्राइम ब्रांच की विवेचना भी अधर में लटक गई है। पुलिस ने विवेचना को आगे नहीं बढ़ाया है, सिर्फ बयानों पर कैसे चार्जशीट तैयार हो सकती है। मेरठ व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के साथ पीड़ित व्यापारी अक्सर रोजाना पुलिस-प्रशासन अधिकारियों के कार्यालय में चक्कर काट रहे हैं। फोरेंसिक लैब से फर्जी स्टांप के मिलान कॉपी की रिपोर्ट तक नहीं पुलिस ले पाई है। इसे लेकर पुलिस की विवेचना पर भी सवाल उठना लाजिमी है।
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997 रजिस्ट्री में फर्जी स्टांप लगाया गया है, इसको क्राइम ब्रांच अपनी विवेचना में प्रमाणित नहीं कर पा रही है। स्टांप पर लगी मुहर और हस्ताक्षर फर्जी बताकर कोषागार ने पल्ला झाड़ लिया है। स्टांप फर्जी है या असली, विभागीय अधिकारियों ने कोई लिखित में जवाब पुलिस को नहीं दिया। इसकी प्रकरण की जांच आगे नहीं बढ़ी तो पुलिस ने पत्राचार कर विवेचना को ईओडब्ल्यू में ट्रांसफर कराने के लिए शासन से मांग की। इसको स्वीकृति मिल गई, लेकिन जांच ट्रांसफर करने की प्रक्रिया लंबी होना बताकर मामला अटका हुआ है।
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रजिस्ट्री कराने वाले लोग शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों से मिले। उनका कहना है कि स्टांप घोटाले की जांच में रजिस्ट्री और कोषागार के अधिकारियों से पूछताछ की जाए। विभागीय अधिकारी स्टांप घोटाले में मुख्य आरोपी बनाए जाए। मेरठ व्यापार मंडल महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा का कहना है कि क्राइम ब्रांच ने सिर्फ अधिकारियों के बयान कर विवेचना में खानापूर्ति की जा रही है। पुलिस या ईओडब्ल्यू ने विवेचना ठीक से नहीं तो आरोपी बच जाएंगे।
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एडीएम वित्त सूर्यकांत त्रिपाठी का कहना कि मामले की जांच क्राइम ब्रांच में चल रही है। शासन स्तर से भी एसआईटी गठित है, जोकि इससे संबंधित जांच करने में लगी हुई है। स्टांप घोटाले के प्रकरण में मुख्य आरोपी विशाल वर्मा, एके गुप्ता, राहुल वर्मा सहित पांच लोग जेल में निरुद्ध है।
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