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सॉफ्टवेयर का नाम पर खुद ही सुविधाओं पर डाका डाल रहा पीवीएनएल, शासन के आदेशों का उल्लंघन

Mon, 02 Dec 2019 02:53 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 02 Dec 2019 02:53 PM IST
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PVVNL is doing scam in electricity bills in Meerut
प्रतीकात्मक तस्वीर

उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं देने का दावा करने वाला पीवीवीएनएल खुद लोगों की सुविधाओं पर डाका डाल रहा है। सॉफ्टवेयर की गलती के नाम पर रोजाना करीब तीन लाख रुपये की छूट गटकी जा रही है। इससे न केवल उपभोक्ता अधिकारों का हनन हो रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक  आयोग के आदेश का भी उल्लंघन किया जा रहा है।

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उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश की बिजली कंपनियों का राजस्व बढ़ाने और ईमानदार उपभोक्ताओं को लाभ देने के लिए नियत समय से पहले बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को बिल पर 1 फीसदी की छूट देने का प्रावधान किया था।
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पीवीवीएनएल ने इसे अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर में भी अपग्रेड करा दिया था, लेकिन पिछले कई महीने से कंपनी के करीब 30 फीसदी उपभोक्ताओं को इस तरह की छूट ही नहीं मिल पा रही है, जो छूट बिल पर दिखाई जाती है वह अगले बिल में एरियर के रूप में फिर से जुड़कर आ जाती है।

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केस एक
पांडव नगर निवासी कमलेश अवस्थी हर बार ड्यू डेट से पहले अपना बिल जमा कराते हैं। बिल में जो एक फीसदी की छूट उन्हें मिलती है वह अगले बिल में फिर से जुड़कर आ जाती है। ऐसा एक दो महीने से नहीं बल्कि कई महीने से हो रहा है। जुलाई में उन्हें 24.40 रुपये की छूट मिली थी जो अगस्त के बिल में जुड़कर आ गई। अगस्त में 18.76 रुपये की छूट मिली थी जो सितंबर के बिल में जोड़कर दे दी गई।

केस दो
गंगानगर निवासी जय सिंह ने बताया कि वे भी अंतिम तिथि से पहले बिल जमा कराते हैं, लेकिन दी गई छूट अगले महीने जुड़कर आ जाती है। ये पिछले कई महीने से हो रहा है। शिकायत करने पर कर्मचारी अगले महीने से छूट मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

30 फीसदी उपभोक्ताओं को नहीं मिल रही सुविधा 
पीवीवीएनएल के अंतर्गत आने वाले 14 जिलों में रोजाना करीब एक लाख उपभोक्ता अपना बिल अदा करते हैं। इनमें से करीब 30 फीसदी यानि तीस हजार उपभोक्ताओं को एक फीसदी की छूट नहीं मिल पा रही है।

औसतन एक हजार रुपये के बिल पर यह छूट दस रुपये बैठती है। 30 हजार उपभोक्ताओं को मिलने वाली 3 लाख रुपये रोजाना की छूट विभाग के खाते में जा रही है। मेरठ शहर में भी करीब 25 हजार रोजाना की छूट डकारी जा रही है।

सॉफ्टवेयर की गलती बताकर झाड़ रहे पल्ला
विभागीय अधिकारी इसमें सॉफ्टवेयर की गलती बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामी आने से ऐसा हो जाता है। बिल संशोधन के समय इसे ठीक कर दिया जाता है।

संज्ञान में नहीं, यदि ऐसा है तो दिखवाया जाएगा
ये मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो इसे दिखवाया जाएगा। उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जाएगा। समय से बिल जमा कराने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली छूट दिलाई जाएगी। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ 

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