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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Pushing the water indiscriminately, the threat of increased earthquake

पानी का अंधाधुंध दोहन, बढ़ा भूकंप का खतरा

Mon, 24 Jun 2019 04:09 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Mon, 24 Jun 2019 04:09 AM IST
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स्पेन की तरह ही मेरठ सहित एनसीआर में भूजल का दोहन महंगा पड़ सकता है। स्पेन में कुछ वर्ष पूर्व भूकंप आने के पीछे मुख्य कारण यही माना गया कि वहां का जल स्तर 300 फीट से नीचे चला गया था। मेरठ में भी इस समय कई स्थानों पर जल स्तर 200 फीट से नीचे जा चुका है, जो  बड़ा खतरा बन सकता है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने अलर्ट जारी करते हुए जिला पुलिस-प्रशासन और सेना को गाइड लाइन जारी की है।
विकास की आंधी में हम हरियाली और भूमिगत जल को खोते जा रहे हैं। देखते-देखते ही महानगर ही नहीं छोटे शहर भी कंक्रीट के जंगल में तब्दील होते जा रहे हैं। इसके लिए भूजल का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। औद्योगिक इकाइयों के अलावा रोजमर्रा की तमाम गतिविधियों में भूजल का अधिक प्रयोग होने से लगातार जल स्तर गिर रहा है।
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200 फीट पहुंचा स्तर
कभी जिले में भूजल स्तर 50 फीट के आसपास होता था। लेकिन आज कई स्थानों पर 200 फीट तक गिर चुका है। यह स्थिति खतरनाक दिशा में जा रही है, जो मेरठ सहित वेस्ट यूपी के लिए खतरे की घंटी है।  
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बज चुकी खतरे की घंटी
भूकंप की संवेदनशीलता में मेरठ जोन-4 में है। आंकड़ों की मानें तो दिसंबर में हर दूसरे दिन भूकंप आया। नवंबर में एक दिन में एक से ज्यादा भूकंप के झटके लगे। गनीमत रही कि रिक्टर स्केल पर इनकी तीव्रता 3-5 फ्रीक्वेंसी रही। जानकारों की मानें तो साल 2019 के शुरुआत में मेरठ समेत एनसीआर में भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4 मापी गई थी। पहली बार भूकंप का केंद्र मेरठ-बागपत के बीच माना गया था। यह खतरे की घंटी थी। जानकारों का कहना है कि भविष्य में इनकी फ्रीक्वेंसी बढ़ सकती है। यहां भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। पेड़ खत्म होने से जमीन का जड़त्व शून्य हो रहा है। यहां बनाई जा रहीं अधिकांश ऊंची इमारतें पिलर पर खड़ी हैं, जो तीव्र भूकंप को नहीं झेल पाएंगी। पानी के अभाव में मिट्टी का स्थायित्व कम हो रहा है। साल में इसके गिरने का स्तर एक मीटर का है।
नहीं बनाई योजना
जमीन के भीतर पानी जमीन को खिसकने से रोकता है। थोड़ी बहुत जमीन खिसकने से होने वाले कंपन को पानी अपने आप संभाल लेता है। लेकिन भूजल स्तर गिरने या पानी खत्म होने से जमीन खोखली हो गई है। हल्का सा कंपन भी जमीन को धंसा देता है। बिल्डरों ने इमारतें तो बना दीं। लेकिन ग्राउंड वाटर रिचार्ज करने के लिए कोई योजना नहीं बनाई।
तालाब बन गए इतिहास
बारिश जहां लगातार कम होती जा रही है तो तालाब भी लगातार खत्म हो रहे हैं। राजस्व विभाग के आंकड़ों में जिले में 3062 तालाब दर्ज हैं। लेकिन पिछले दिनों जब भौतिक सत्यापन हुआ तो करीब 1944 तालाब ही अस्तित्व में मिले। इनमें भी करीब 1530 पर छोटे-बड़े कब्जे हैं। कुछ तालाबाें पर पक्के निर्माण हो चुके हैं तो कुछ को बंद कर दिया गया है।
सरकार ने किया अलर्ट जारी
गिरते जल स्तर और भूकंप के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने अलर्ट जारी किया है। जिसमें अधिकारियों को भूकंप के लिए जर्जर मकानों और भूकंप आने पर ट्रैफिक व्यवस्था को सही करने के आदेश दिए हैं।

लाना होगा ग्राउंड वाटर बिल
नीर फाउंडेशन के निदेशक रमन त्यागी का कहना है कि लगातार गिरते जलस्तर पर अब सरकार को गंभीर हो जाना चाहिए। यूपी में बसपा सरकार ग्राउंड वाटर बिल लागू नहीं कर पाई। भाजपा सरकार ने अपने घोषणापत्र में तालाब विकास प्राधिकरण बनाने का वादा किया था। ऐसे में अब सरकार को ग्राउंड वाटर बिल जल्द लाना होगा। क्योंकि अब जागरूकता अभियान चलाकर काम नहीं चलेगा। यदि इसी तरह भूगर्भ जल का दोहन होता रहा तो निश्चित रूप से महाप्रलय का खतरा गहरा जाएगा।
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