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Meerut News: पुरुषोत्तम मास आज से...15 जून तक रहेगा
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- सृष्टि संचालक का यह प्रिय मास, पूजा-पाठ से बरसेगी हरि कृपा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। लोक व्यवहार में संक्रांति रहित मास अधिकमास आध्यात्मिक विषयों में अत्यंत पुण्यदायी होने के कारण पुरुषोत्तम मास सहित अन्य नामों से जाना जाता है। यह मास सामान्य 12 माह से अलग अधिक और अतिरिक्त है। यह विशेष मास 17 मई से शुरू हो रहा है जो 15 जून तक चलेगा। आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक कल्याण के लिए यह विशेष और शुभ फलदायक मास है।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि सृष्टि संचालक भगवान विष्णु का यह प्रिय मास है। इसमें श्रीकृष्ण और विष्णु की अनंत कृपा बरसती है। इस मास के स्वामी भगवान विष्णु हैं। इस पल का सदुपयोग आपके जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल सकते हैं। ग्रंथों के अनुसार जिस चंद्रमास में सूर्य संक्रांति का अभाव हो उस मास को अधिक मास कहते हैं। इसकी पौराणिक कथा के अनुसार अधिक मास को लोग मलमास कहने लगे। कुछ लोगों ने कहा कि अधिकमास का कोई स्वामी नहीं है। तब भगवान विष्णु ने कहा जो भी व्यक्ति अधिक मास में मेरी पूजा, उपासना और आराधना करेगा उसे वे प्रसन्न होकर अपना आर्शीवाद प्रदान करेंगे और सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करेंगे। अब यह पुरुषोत्तम मास कहलाएगा।
आचार्य मनीष स्वामी ने कहा कि अधिकमास दरअसल चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है। यह हर 32 माह, 16 दिन और आठ घंटे के अंतर से आता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार हर सूर्य वर्ष 365 दिन और छह घंटे एवं 11 सेकंड का माना जाता है। वहीं, चंद्र वर्ष 365 दिनों का माना जाता है। यानी दोनों में करीब 11 दिनों का अंतर होता है। जो तीन वर्ष में एक माह के लगभग हो जाता है। इसी कारण इसे अधिकमास कहा जाता है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। लोक व्यवहार में संक्रांति रहित मास अधिकमास आध्यात्मिक विषयों में अत्यंत पुण्यदायी होने के कारण पुरुषोत्तम मास सहित अन्य नामों से जाना जाता है। यह मास सामान्य 12 माह से अलग अधिक और अतिरिक्त है। यह विशेष मास 17 मई से शुरू हो रहा है जो 15 जून तक चलेगा। आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक कल्याण के लिए यह विशेष और शुभ फलदायक मास है।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि सृष्टि संचालक भगवान विष्णु का यह प्रिय मास है। इसमें श्रीकृष्ण और विष्णु की अनंत कृपा बरसती है। इस मास के स्वामी भगवान विष्णु हैं। इस पल का सदुपयोग आपके जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल सकते हैं। ग्रंथों के अनुसार जिस चंद्रमास में सूर्य संक्रांति का अभाव हो उस मास को अधिक मास कहते हैं। इसकी पौराणिक कथा के अनुसार अधिक मास को लोग मलमास कहने लगे। कुछ लोगों ने कहा कि अधिकमास का कोई स्वामी नहीं है। तब भगवान विष्णु ने कहा जो भी व्यक्ति अधिक मास में मेरी पूजा, उपासना और आराधना करेगा उसे वे प्रसन्न होकर अपना आर्शीवाद प्रदान करेंगे और सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करेंगे। अब यह पुरुषोत्तम मास कहलाएगा।
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आचार्य मनीष स्वामी ने कहा कि अधिकमास दरअसल चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है। यह हर 32 माह, 16 दिन और आठ घंटे के अंतर से आता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार हर सूर्य वर्ष 365 दिन और छह घंटे एवं 11 सेकंड का माना जाता है। वहीं, चंद्र वर्ष 365 दिनों का माना जाता है। यानी दोनों में करीब 11 दिनों का अंतर होता है। जो तीन वर्ष में एक माह के लगभग हो जाता है। इसी कारण इसे अधिकमास कहा जाता है।
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