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जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव में भाजपाइयों के बीच ही छिड़ गयी जंग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Aug 2017 07:07 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव में भाजपाइयाें के बीच ही जंग छिड़ गयी है। चुनाव में विपक्ष जहां दूर बैठकर हाथ ताप रहा है, वहीं भाजपाइयों के बीच जंग तेज हो गयी है। भाजपा एक बड़ा धड़ा जहां खुलकर कुलविंदर सिंह के पक्ष में खड़ा है, तो विधायक संगीत सोम का नाम सपना हुड्डा के पक्ष में खुलकर सामने आ रहा है।
जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव से भाजपा नेतृत्व किनारा कर चुका है। लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसी राजनीति शुरू हुई कि भाजपाई खुद आपस में उलझ गये। पार्टी के स्थानीय नेताओं जिलाध्यक्ष, सांसद और विधायकों ने बैठक कर अपने स्तर से चुनाव लड़ाने का मन बनाया। जिसके लिए प्रत्याशी चयन पर चर्चा हुई। इस चर्चा में तीन नाम कुलविंदर सिह, मीनाक्षी भराला और रोहताश पहलवान के नाम पैनल में शामिल रहे। लेकिन इस बैठक में सरधना विधायक ठा. संगीत सोम बीमारी के चलते शामिल नहीं हुए। जब संगीत सोम से कुलविंदर सिंह के नाम को लेकर बात की गयी तो उन्होंने मुखर होकर विरोध दर्ज करा दिया। संगीत सोम ने कहा कि कुलविंदर सिंह को छोड़कर किसी को भी प्रत्याशी तय कर दें, उन्हें आपत्ति नहीं है।
लेकिन संगीत सोम के इस विरोध को दरकिनार कर पार्टी के बड़े धड़े ने कुलविंदर के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी। इसके बाद ठा. संगीत सोम की तरफ से अप्रत्यक्ष रुप से सपना हुड्डा को समर्थन दे दिया गया। जिससे पार्टी में खलबली मच गयी। सूत्रों के अनुसार बुधवार सुबह तक भी ठा. संगीत सोम को मनाने और दबाव बनाने के प्रयास जहां दूसरे धड़े की तरफ से होते रहे। वहीं संगीत सोम ने भी स्पष्ट कर दिया कि मीनाक्षी भराला या रोहताश पहलवान में से किसी एक को प्रत्याशी घोषित कर दें तो वह अपने पूर्ण समर्थन के साथ न केवल चुनाव में शामिल होंगे, बल्कि सपना हुड्डा जो कि उनके विधानसभा क्षेत्र से हैं, उनका पर्चा वापिस कराने का पूरा प्रयास करेंगे। लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पायी। अब दोनो ही धड़े एक दूसरे के खिलाफ कमर कसकर खड़े हो गये हैं। ऐसे में चुनाव कहीं न कहीं भाजपाइयों के बीच ही खींचता नजर आ रहा है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव पूरी तरह शतरंज के खेल की तरह नजर आ रहा है। कल तक जो सपाई खेमा विपक्ष का संयुक्त प्रत्याशी घोषित कर मैदान में ताल ठोक रहा था, आज उसका प्रत्याशी भी मैदान में नहीं उतरा। साफ हो चुका है कि इस खेमे का समर्थन भाजपाई खेमे के पक्ष में आ चुका है। इस समर्थन के बाद सवाल ये उठ रहा है कि कल तो जो भाजपाई सीमा प्रधान के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाकर जांच की बात कर रहे थे, क्या अब वह उसकी जांच करा पाएंगे।
सीमा प्रधान के खिलाफ अविश्वास में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप थे। उनके इस्तीफा देने के बाद जो पहली बोर्ड बैठक हुई, उसमें भी जांच कराने की मांग उठी। जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई तो सपा नेता अतुल प्रधान ने प्रेस कान्फ्रेंस कर विपक्ष से संयुक्त प्रत्याशी उतारने का ऐलान करते हुए डा. मनोज अधाना को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
लेकिन अंतिम समय में जब कुलविंदर सिंह और सपना हुड्डा के नाम सामने आये तो उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस में सपना हुड्डा के खिलाफ मोर्चा खोला। लेकिन कुलविंदर सिंह को लेकर कोई बयान नहीं दिया। इसके बाद विपक्ष से कोई नामांकन भी नहीं हुआ। ऐसे में चर्चा तेज है कि जांच के नाम पर क्लीन चिट के समझौते पर भाजपा ने विपक्ष को साध लिया है।
अतुल प्रधान ने मुखिया को दी तरजीह(Hइस पूरे प्रकरण में एक बात और खुलकर सामने आ गयी है। सपा नेता अतुल प्रधान जिनकी सरधना विधायक ठा. संगीत सोम और मुखिया गुर्जर दोनों से तगड़ी अदावत थी। उसमें उन्होंने मुखिया गुर्जर से छिड़ी अदावत को भुलाते हुए ठा. संगीत सोम के खिलाफ मोर्चा जारी रखा है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव से भाजपा नेतृत्व किनारा कर चुका है। लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसी राजनीति शुरू हुई कि भाजपाई खुद आपस में उलझ गये। पार्टी के स्थानीय नेताओं जिलाध्यक्ष, सांसद और विधायकों ने बैठक कर अपने स्तर से चुनाव लड़ाने का मन बनाया। जिसके लिए प्रत्याशी चयन पर चर्चा हुई। इस चर्चा में तीन नाम कुलविंदर सिह, मीनाक्षी भराला और रोहताश पहलवान के नाम पैनल में शामिल रहे। लेकिन इस बैठक में सरधना विधायक ठा. संगीत सोम बीमारी के चलते शामिल नहीं हुए। जब संगीत सोम से कुलविंदर सिंह के नाम को लेकर बात की गयी तो उन्होंने मुखर होकर विरोध दर्ज करा दिया। संगीत सोम ने कहा कि कुलविंदर सिंह को छोड़कर किसी को भी प्रत्याशी तय कर दें, उन्हें आपत्ति नहीं है।
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लेकिन संगीत सोम के इस विरोध को दरकिनार कर पार्टी के बड़े धड़े ने कुलविंदर के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी। इसके बाद ठा. संगीत सोम की तरफ से अप्रत्यक्ष रुप से सपना हुड्डा को समर्थन दे दिया गया। जिससे पार्टी में खलबली मच गयी। सूत्रों के अनुसार बुधवार सुबह तक भी ठा. संगीत सोम को मनाने और दबाव बनाने के प्रयास जहां दूसरे धड़े की तरफ से होते रहे। वहीं संगीत सोम ने भी स्पष्ट कर दिया कि मीनाक्षी भराला या रोहताश पहलवान में से किसी एक को प्रत्याशी घोषित कर दें तो वह अपने पूर्ण समर्थन के साथ न केवल चुनाव में शामिल होंगे, बल्कि सपना हुड्डा जो कि उनके विधानसभा क्षेत्र से हैं, उनका पर्चा वापिस कराने का पूरा प्रयास करेंगे। लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पायी। अब दोनो ही धड़े एक दूसरे के खिलाफ कमर कसकर खड़े हो गये हैं। ऐसे में चुनाव कहीं न कहीं भाजपाइयों के बीच ही खींचता नजर आ रहा है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव पूरी तरह शतरंज के खेल की तरह नजर आ रहा है। कल तक जो सपाई खेमा विपक्ष का संयुक्त प्रत्याशी घोषित कर मैदान में ताल ठोक रहा था, आज उसका प्रत्याशी भी मैदान में नहीं उतरा। साफ हो चुका है कि इस खेमे का समर्थन भाजपाई खेमे के पक्ष में आ चुका है। इस समर्थन के बाद सवाल ये उठ रहा है कि कल तो जो भाजपाई सीमा प्रधान के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाकर जांच की बात कर रहे थे, क्या अब वह उसकी जांच करा पाएंगे।
सीमा प्रधान के खिलाफ अविश्वास में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप थे। उनके इस्तीफा देने के बाद जो पहली बोर्ड बैठक हुई, उसमें भी जांच कराने की मांग उठी। जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई तो सपा नेता अतुल प्रधान ने प्रेस कान्फ्रेंस कर विपक्ष से संयुक्त प्रत्याशी उतारने का ऐलान करते हुए डा. मनोज अधाना को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
लेकिन अंतिम समय में जब कुलविंदर सिंह और सपना हुड्डा के नाम सामने आये तो उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस में सपना हुड्डा के खिलाफ मोर्चा खोला। लेकिन कुलविंदर सिंह को लेकर कोई बयान नहीं दिया। इसके बाद विपक्ष से कोई नामांकन भी नहीं हुआ। ऐसे में चर्चा तेज है कि जांच के नाम पर क्लीन चिट के समझौते पर भाजपा ने विपक्ष को साध लिया है।
अतुल प्रधान ने मुखिया को दी तरजीह(Hइस पूरे प्रकरण में एक बात और खुलकर सामने आ गयी है। सपा नेता अतुल प्रधान जिनकी सरधना विधायक ठा. संगीत सोम और मुखिया गुर्जर दोनों से तगड़ी अदावत थी। उसमें उन्होंने मुखिया गुर्जर से छिड़ी अदावत को भुलाते हुए ठा. संगीत सोम के खिलाफ मोर्चा जारी रखा है।