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सीएचसी में दो घंटे तड़पती रही गर्भवती
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सीएचसी में दो घंटे तड़पती रही गर्भवती
मेरठ। गर्भवती महिला सीएचसी में फर्श पर दो घंटे तक तड़पती रही परंतु उसे इलाज नहीं मिल सका। इतना ही नहीं सूचना देने के बावजूद दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। सीएमओ ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
परतापुर क्षेत्र के भूड़बराल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां बुधवार को एक महिला डिलीवरी के लिए पहुंची। यहां न तो इमरजेंसी सेवा मिली और न ही चिकित्सक मौजूद था। इसके चलते गर्भवती दो घंटे तक फर्श पर पड़ी दर्द से तड़पती रही परंतु किसी ने सुध नहीं ली। आरोप है कि पीड़ित के देवर ने स्टाफ से बात की तो वे भी डॉक्टर नहीं होने की जानकारी देकर टालते रहे। इस बारे में सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि महिला को दूसरी जगह रेफर किया गया था। एंबुलेंस दूसरी कॉल पर व्यस्त थी। इसलिए उसे पहुंचने में देर हुई। इस दौरान उनसे बेड पर आराम करने के लिए कहा गया परंतु वे बाहर ही इंतजार करते रहे। मामले की जांच कराई जा रही है। यदि कोई दोषी पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दावा कुछ और हकीकत कुछ ओर
वैसे तो स्वास्थ्य विभाग बेहतर इलाज और 15 मिनट में एंबुलेंस आपके द्वार पर पहुंचने का दंभ भरता है। हालांकि कई बार हकीकत कुछ और सामने आती है। इस मामले में भी संवेदनहीनता सामने आई है।
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मेरठ। गर्भवती महिला सीएचसी में फर्श पर दो घंटे तक तड़पती रही परंतु उसे इलाज नहीं मिल सका। इतना ही नहीं सूचना देने के बावजूद दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। सीएमओ ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
परतापुर क्षेत्र के भूड़बराल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां बुधवार को एक महिला डिलीवरी के लिए पहुंची। यहां न तो इमरजेंसी सेवा मिली और न ही चिकित्सक मौजूद था। इसके चलते गर्भवती दो घंटे तक फर्श पर पड़ी दर्द से तड़पती रही परंतु किसी ने सुध नहीं ली। आरोप है कि पीड़ित के देवर ने स्टाफ से बात की तो वे भी डॉक्टर नहीं होने की जानकारी देकर टालते रहे। इस बारे में सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि महिला को दूसरी जगह रेफर किया गया था। एंबुलेंस दूसरी कॉल पर व्यस्त थी। इसलिए उसे पहुंचने में देर हुई। इस दौरान उनसे बेड पर आराम करने के लिए कहा गया परंतु वे बाहर ही इंतजार करते रहे। मामले की जांच कराई जा रही है। यदि कोई दोषी पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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दावा कुछ और हकीकत कुछ ओर
वैसे तो स्वास्थ्य विभाग बेहतर इलाज और 15 मिनट में एंबुलेंस आपके द्वार पर पहुंचने का दंभ भरता है। हालांकि कई बार हकीकत कुछ और सामने आती है। इस मामले में भी संवेदनहीनता सामने आई है।
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