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27 अगस्त से करूंगा आमरण अनशन: विपिन मनोठिया
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फोटो
27 अगस्त से करूंगा आमरण अनशन: विपिन मनोठिया
एससीएसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समर्थन में कहा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। विपिन मनोठिया ने बृहस्पतिवार को सूरजकुंड पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अति दलितों के उपवर्गीकरण के समर्थन में 27 अगस्त को मेरठ के कमिश्नरी पार्क में शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अति वंचित समाज के लोग पहुंचेंगे। साथ ही विपिन मनोठिया ने 27 अगस्त से आमरण अनशन पर बैठने का एलान किया। कहा कि जब तक उत्तर प्रदेश सरकार इस बिल को पारित नहीं करती, तब तक अनशन जारी रहेगा।
विपिन मनोठिया सपा नेता हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि उनके इस एलान से पार्टी का कोई मतलब नहीं है। न ही सपा नेता के तौर पर वह ऐसा कह रहे हैं। वह वाल्मीकि समाज के नेता होने के नाते ऐसा कह रहे हैं। वह अति दलितों के उपवर्गीकरण के समर्थन में हैं।
उन्होंने कहा कि दो स्टेट तेलंगाना, हरियाणा राज्य में ये बिल पारित हो चुके हैं, इसलिए समस्त अति दलित समाज मुख्यमंत्री से इस बिल को पारित करने की मांग करता है। ये फैसला जो सुप्रीम कोर्ट का एक अगस्त को आया है, ये बिल साल 1975 में पंजाब में लागू हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा वाल्मीकि समाज को दिया गया था।
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प्रेस वार्ता में दिनेश कुमार कोरी सभा, लोकेश चंद्रा खटीक, राकेश दिवाकर धोबी, राजपाल भारती, भारत रोहतगी आदि रहे।
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27 अगस्त से करूंगा आमरण अनशन: विपिन मनोठिया
एससीएसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समर्थन में कहा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। विपिन मनोठिया ने बृहस्पतिवार को सूरजकुंड पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अति दलितों के उपवर्गीकरण के समर्थन में 27 अगस्त को मेरठ के कमिश्नरी पार्क में शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अति वंचित समाज के लोग पहुंचेंगे। साथ ही विपिन मनोठिया ने 27 अगस्त से आमरण अनशन पर बैठने का एलान किया। कहा कि जब तक उत्तर प्रदेश सरकार इस बिल को पारित नहीं करती, तब तक अनशन जारी रहेगा।
विपिन मनोठिया सपा नेता हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि उनके इस एलान से पार्टी का कोई मतलब नहीं है। न ही सपा नेता के तौर पर वह ऐसा कह रहे हैं। वह वाल्मीकि समाज के नेता होने के नाते ऐसा कह रहे हैं। वह अति दलितों के उपवर्गीकरण के समर्थन में हैं।
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उन्होंने कहा कि दो स्टेट तेलंगाना, हरियाणा राज्य में ये बिल पारित हो चुके हैं, इसलिए समस्त अति दलित समाज मुख्यमंत्री से इस बिल को पारित करने की मांग करता है। ये फैसला जो सुप्रीम कोर्ट का एक अगस्त को आया है, ये बिल साल 1975 में पंजाब में लागू हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा वाल्मीकि समाज को दिया गया था।
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प्रेस वार्ता में दिनेश कुमार कोरी सभा, लोकेश चंद्रा खटीक, राकेश दिवाकर धोबी, राजपाल भारती, भारत रोहतगी आदि रहे।