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पुलिस की पाठशाला: एसपी क्राइम बोले- अक्षरज्ञान के साथ वेल्यू और फिजिकल फिटनेस भी सिखाएं स्कूल

Fri, 07 Dec 2018 09:36 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 07 Dec 2018 09:36 PM IST
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police ki pathshala, SP Crime said, teach value and physical fitness along in school
पुलिस की पाठशाला में बोलते एसपी क्राइम - फोटो : अमर उजाला

स्कूल विद्यार्थियों को सिर्फ सिलेबस पूरा कराने का काम न करें, बल्कि उन्हें फिजिकल फिटनेस और नैतिक ता का पाठ भी पढ़ाएं। समाज को किताबी ज्ञान के साथ अच्छे नागरिकों की जरुरत है जो शिक्षण संस्थान ही पूरी कर सकते हैं। यह बात एसपी क्राइम बी. पी अशोक ने पुलिस की पाठशाला में कही। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत शुक्रवार को आईआईएमटी एकेडमी में पुलिस की पाठशाला का आयोजन हुआ। पाठशाला में एसपी क्राइम बी.पी अशोक ने छात्राओं के सवालों के जवाब दिए। स्मार्ट फोन का सही प्रयोग, सोशल मीडिया पर सतर्क रहने के टिप्स सहित परेशानी में फंसे होने पर पुलिस की मदद कैसे लें आदि की जानकारी दी। स्कूल प्रिंसिपल अल्पना बैजल ने अतिथियों का स्वागत किया। एसपी क्राइम ने छात्राओं के साथ शिक्षिकाओं के सवालों के भी जवाब दिए। उन्होंने बच्चियों को मन से डर भगाने का संदेश दिया। शिक्षिकाओं को इंटरेक्टिव लर्निंग व बच्चों के मन से जुड़ने के टिप्स दिए। इस अवसर पर स्कूल शिक्षिका शबनम गौड़ व मानव शर्मा सहित स्टाफ मौजूद रहा। अंत में सभी ने शपथ ली। 

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सोशल मीडिया के प्रयोग में रहें सतर्क
एसपी क्राइम ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा सोशल मीडिया पर कोई भी निजी जानकारी, निजी तस्वीरें, पारिवारिक स्थिति या जानकारियां साझा न करें। कोई गलत मैसेज करे तुरंत उसकी शिकायत पुलिस में करें। गैरजरुरी या भड़काऊ पोस्ट न करें। अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेसट को स्वीकार न करें। सोशल मीडिया पर निजी बातें शेयर न करें और अनवांटेड गेम्स या बेवसाइट खोलने से बचें।

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आप शिक्षक हैं दरोगा न बनें
शिक्षिकाओं ने एसपी क्राइम से कहा कि लोग कहते हैं कि शिक्षक बच्चों को वेल्यू सिखाएं, लेकिन आजकल माहौल ऐसा हो गया है कि टीचर बच्चे को कुछ कह नहीं सकते। बच्चे को गलती पर डांट या मार दें तो अभिभावक हंगामा कर देते हैं। इस जवाब में एसपी क्राइम ने कहा कि आप शिक्षक हैं, शिक्षक बनकर व्यवहार करें। दरोगा न बनें। मारपीट शिक्षक का काम नहीं होता, उसका काम व्यवहारिक शिक्षा देना है। शिक्षक तो अधिकारों को प्रयोग करना सिखाते हैं उन्हें स्वयं अधिकार की आवश्यकता नहीं हैं। बच्चों को इंटरेक्टिव एजुकेशन दें।

बगीचे में भगाया गणित का डर
एसपी क्राइम ने कहा मैं गणित से बहुत डरता था। भाग (डिवाइडेशन) देना नहीं आता था बहुत घबराता था। तो मेरे शिक्षक मुझे आम के बाग में यह कहकर ले गए चलो आज तुम्हें आम खिलाता हूं। सब छात्रों को आम के बाग में घुमाऊंगा। हम सब बहुत खुश हुए कि आज तो टीचरजी घुमाने ले जा रहे हैं। हम खुशी-खुशी आम के बाग में घूमने गए। वहां उन्होंने हमें आम भी खिलाए। फिर एक गोला बनाया और उसे दो हिस्सों में बांटकर इतने रोचक ढंग से हमें भाग देना सिखाया कि वो विधि एकदम दिमाग में फिट हो गई। तब मुझे लगा अरे भाग करना कितना आसान है। उसके बाद भाग देना कभी नहीं भूला। डीलिट् की उच्च डिग्री ले ली लेकिन आम के बाग में गणित का डर दूर होने का वो किस्सा आज भी याद है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी  शिक्षक पढ़ाई को मनोरंजक और इंटरेक्टिव लर्निंग कराएं तो छात्र कामयाब होंगे। 
 
एसपी क्राइम के प्रमुख सुझाव
. स्कूलों में लड़कियों को फिजिकली फिट रखने पर ध्यान दिया जाए, उन्हें कराटे व जिम भी सिखाया जाए
. स्कूलों में लड़कियों को पर्सनेलिटी डवलपमेंट और ड्राइविंग भी सिखाई जाए
. लड़कियों को फिजिकली, मेंटली मजबूत किया जाए
. स्मार्टफोन को स्मार्ट ब्रेन की तरह प्रयोग करें 
. अपने पास नजदीकी पुलिस थाना, चौकी का नंबर जरुर रखें। डॉयल 100 से आप ये नंबर ले सकते हैं
. छेड़खानी या कोई भी परेशानी हो तो मम्मी-पापा, टीचर्स या पुलिस को जरुर बताएं

छात्राओं के सवाल एसपी क्राइम के जवाब
सवाल- छात्राओं के लिए कौन से कोर्स की पढ़ाई अच्छी है? कीर्ति
जवाब- एक वक्त था जब छात्राओं को होमसाइंस ही पढ़ने दिया जाता था। अब छात्राएं मैथ्स भी पढ़ रही हैं और हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। 
सवाल- अपराधी को 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने लाने के कानून का पालन क्यों नहीं होता? विधि गोयल
जवाब- इस नियम का पालन होता है। संसाधनिक समस्याओं व दूरी के कारण ही देर होती है। 12 घंटे में ही अपराधी को पेश कर देते हैं।
सवाल- पुराने ज़माने में लड़कियों को पढ़ने से क्यों रोकते थे? नव्या वर्मा
जवाब- पहले महिलाओं को कमज़ोर और घर संभालने तक ही सीमित रखा जाता था, इसी सोच के कारण उन्हें शिक्षा से वंचित रखा गया। लेकिन अब सोच बहुत बदली है।
सवाल- दिन-रात लड़कियों को ही क्यों बताए जाते हैं? इसकी वजह से हमारी पढ़ाई भी नहीं हो पाती? शैली
जवाब- यह गलत सोच है छात्राओं को पूरी छूट मिलनी चाहिए। बेटियों को फिजिकली, मेंटली मजबूत बनाएं और छूट भी दें। 
सवाल- पुलिस किसी अपराधी को एफआईआर दर्ज होने के बाद ही अरेस्ट क्यों करती है? अनिषा
जवाब- हर मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद ही अरेस्ट करने का इंतज़ार नहीं होता। घटना की संवेदनशीलता देखकर अपराधी को अरेस्ट करते हैं।
सवाल- सामान्य वर्ग को आइएएस परीक्षा में कम अटैम्पट क्यों मिलते हैं? अंतरा
जवाब- लोक सेवा आयोग द्वारा प्रशासनिक परीक्षा में किस वर्ग को कितने अटैम्पट मिलेंगे यह तय है। इसकी वजह समाज के पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को ऊपर उठाना है। 
सवाल- बाल मजदूरी क ी शिकायत हम कहां, कैसे कर सकते हैं? फातिमा
जवाब- बाल मजदूरी के खिलाफ  पूरा कानून बना है। अगर कहीं कोई बच्चा काम करते मिले तो निकट थाना, चौकी पर शिकायत करें। 1098 हेल्पलाइन या डायल 100 पर भी शिकायत कर सकते हैं।
सवाल-  पुलिस की संख्या बढ़ी है, लेकिन अपराध क्यों नहीं घट रहा? निशा
जवाब- यह मिथ है कि अपराध बढ़ा है। अपराध पर काफी नियंत्रण हुआ है। जनसंख्या बढ़ी है, लेकिन अपराध नियंत्रित हुए हैं।
सवाल- बलात्कारी को फांसी देना ही पर्याप्त सजा है, बेटियों को आत्मरक्षा के गुर नहीं सिखा सकते? समीरा
जवाब- बेटियों को कराटे, मार्शल आर्ट बिल्कुल सिखाना चाहिए। ताकि बेटियां छेड़खानी, वॉइलेंस हर मुश्किल का सामना कर सकें। 
सवाल- 18 साल से कम उम्र के अपराधी को कम सजा क्यों मिलती है? हलीमा
जवाब- जुवेनाइल एक्ट में काफी बदलाव हुआ है। निर्भया कांड के बाद 18 साल से कम आयु के अपराधियों की सजा के प्रावधान भी बदले हैं।
सवाल- मैं आईपीएस कैसे बन सकती हूं? मुस्कान
जवाब- यूपीएससी की ओर से सिविल सर्विसेज परीक्षा होती है। इस परीक्षा को किसी भी विषय से स्नातक विद्यार्थी दे सकता है। परीक्षा पास करने के बाद ही चयन होता है।
सवाल- जेल में रिश्वत देकर अपराधी छूट क्यों जाते हैं? वाणी शर्मा
जवाब- ऐसा नहीं है अपराधी कोई भी हो एक बार सजा मिलने के बाद उसे छोड़ा नहीं जा सकता। 
सवाल- हमेशा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात ही क्यों की जाती है? आयुषी
जवाब- भ्रष्टाचार, लिंगभेद और जातिवाद हमारे देश की तीन बड़ी समस्याएं हैं। लिंगभेद को खत्म करने के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया गया है। लेकिन लड़कों को भी संस्कार देना जरुरी है।
सवाल- सोशल मीडिया पर कोई गलत मैसेज आए तो कैसे बचें? उत्तरा
जवाब- हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर एक्टिव है। निजी जानकारी, फोटो कभी सोशल मीडिया पर शेयर न करें। कोई गलत मैसेज भेजे तो फौरन अपने मम्मी-पापा, टीचर्स और पुलिस से साझा करें।

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