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अवैध फैक्टरी में आग पर पुलिस-प्रशासन मौन
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अवैध फैक्टरी में आग पर पुलिस-प्रशासन मौन
खरखौदा/मेरठ। हापुड़ रोड पर पेंट की अवैध फैक्टरी में आग लगने के बाद भी पुलिस-प्रशासन मौन है। अभी तक भी कोई सरकारी विभाग जांच करने के लिए नहीं पहुंचा। अवैध फैक्टरी में भारी मात्रा में थिनर और केमिकल कहां से आया और क्यों एकत्र किया जा रहा था, इसका जवाब खरखौदा पुलिस के पास भी नहीं है। इसे अवैध मानने से ही इंकार करने पर खरखौदा पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
हापुड़ रोड पर गांव हाजीपुर के सामने रविवार को पेंट की अवैध फैक्टरी में भीषण आग लगी थी। आग लगने का शुरुआती कारण केमिकल मिलाने के दौरान रिएक्शन होना बताया गया था। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने इस फैक्टरी से कोई एनओसी मिलने से इंकार किया था। बताया था कि यहां बिजली का कनेक्शन नहीं था। जनरेटर से फैक्टरी चलाई जा रही थी।
इंस्पेक्टर खरखौदा मनीष बिष्ट ने कभी इसे फैक्टरी तो कभी गोदाम बताया। लेकिन थिनर और केमिकल के करीब 200 ड्रम यहां क्यों रखे थे और पेंट किस आधार पर बनाया जा रहा था, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। यही नहीं पुलिस-प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार विभाग ने इस फैक्टरी की जांच करना भी उचित नहीं समझा।
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पहले भी उठे सवाल
खरखौदा पुलिस की भूमिका पर उठते रहे हैं सवाल:
इससे पहले भी अवैध मीट प्लांट के मामले में खरखौदा पुलिस की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। साल 2014 में एक अधिकारी के निर्देश पर करीब 700 क्विंटल अवैध मीट पकड़ा गया था। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मीट गायब कर दिया था। जिसके बाद खरखौदा थाना प्रभारी और सीओ का ट्रांसफर हुआ था।
खरखौदा क्षेत्र में अवैध फैक्टरियों का जाल
धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र सहित क्षेत्र में न जाने कितनी फैक्टरी अवैध हैं। जिनमें आए दिन हादसे होते रहते हैं। लेकिन पुलिस, प्रशासन व संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण कोई कार्रवाई नहीं होती। काले तेल के गोदाम में भी केमिकल मिलान के दौरान गांव कैली व गांव लालपुर में भीषण आग की घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन पुलिस की मिलीभगत से यह धंधा चल रहा है।
कैसे अवैध बता सकते हैं
कौन सी फैक्टरी वैध और कौन की अवैध है, इसकी पुष्टि संबंधित विभाग ही कर सकता है। पुलिस इसे कैसे अवैध बता सकती है। फैक्टरी में आग लगने की घटना में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।
- मनीष बिष्ट, इंस्पेक्टर खरखौदा
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खरखौदा/मेरठ। हापुड़ रोड पर पेंट की अवैध फैक्टरी में आग लगने के बाद भी पुलिस-प्रशासन मौन है। अभी तक भी कोई सरकारी विभाग जांच करने के लिए नहीं पहुंचा। अवैध फैक्टरी में भारी मात्रा में थिनर और केमिकल कहां से आया और क्यों एकत्र किया जा रहा था, इसका जवाब खरखौदा पुलिस के पास भी नहीं है। इसे अवैध मानने से ही इंकार करने पर खरखौदा पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
हापुड़ रोड पर गांव हाजीपुर के सामने रविवार को पेंट की अवैध फैक्टरी में भीषण आग लगी थी। आग लगने का शुरुआती कारण केमिकल मिलाने के दौरान रिएक्शन होना बताया गया था। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने इस फैक्टरी से कोई एनओसी मिलने से इंकार किया था। बताया था कि यहां बिजली का कनेक्शन नहीं था। जनरेटर से फैक्टरी चलाई जा रही थी।
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इंस्पेक्टर खरखौदा मनीष बिष्ट ने कभी इसे फैक्टरी तो कभी गोदाम बताया। लेकिन थिनर और केमिकल के करीब 200 ड्रम यहां क्यों रखे थे और पेंट किस आधार पर बनाया जा रहा था, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। यही नहीं पुलिस-प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार विभाग ने इस फैक्टरी की जांच करना भी उचित नहीं समझा।
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पहले भी उठे सवाल
खरखौदा पुलिस की भूमिका पर उठते रहे हैं सवाल:
इससे पहले भी अवैध मीट प्लांट के मामले में खरखौदा पुलिस की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। साल 2014 में एक अधिकारी के निर्देश पर करीब 700 क्विंटल अवैध मीट पकड़ा गया था। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मीट गायब कर दिया था। जिसके बाद खरखौदा थाना प्रभारी और सीओ का ट्रांसफर हुआ था।
खरखौदा क्षेत्र में अवैध फैक्टरियों का जाल
धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र सहित क्षेत्र में न जाने कितनी फैक्टरी अवैध हैं। जिनमें आए दिन हादसे होते रहते हैं। लेकिन पुलिस, प्रशासन व संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण कोई कार्रवाई नहीं होती। काले तेल के गोदाम में भी केमिकल मिलान के दौरान गांव कैली व गांव लालपुर में भीषण आग की घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन पुलिस की मिलीभगत से यह धंधा चल रहा है।
कैसे अवैध बता सकते हैं
कौन सी फैक्टरी वैध और कौन की अवैध है, इसकी पुष्टि संबंधित विभाग ही कर सकता है। पुलिस इसे कैसे अवैध बता सकती है। फैक्टरी में आग लगने की घटना में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।
- मनीष बिष्ट, इंस्पेक्टर खरखौदा