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Meerut News: 2030 के कॉमनवेल्थ और 2036 ओलंपिक खेलों के लिए खिलाड़ी होंगे तैयार
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मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का निरीक्षण करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। स्रोत : सूचना विभा
खेलों के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके मेरठ में अब प्रदेश का पहला खेल विश्वविद्यालय शुरू होने जा रहा है। यह विश्वविद्यालय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का एक बड़ा अवसर प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को 2030 के कॉमनवेल्थ खेलों और 2036 के ओलंपिक खेलों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में खिलाड़ियों को तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उनका लक्ष्य है कि खेल विश्वविद्यालय से निकले खिलाड़ी इन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करें।
विश्वविद्यालय का निर्माण और डिजाइन
मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। विश्वविद्यालय के भवनों का डिजाइन भारतीय पौराणिक मंदिरों की नागर शैली से प्रेरित है, जो कोणार्क के सूर्य मंदिर, पुरी के जगन्नाथ मंदिर और सोमनाथ मंदिर की वास्तुकला की याद दिलाता है। परिसर का पूरा खाका इसी शैली में तैयार किया गया है। वर्तमान में, विश्वविद्यालय में एक बीपीईएस (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) कोर्स शुरू किया जा चुका है, जिसकी कक्षाएं अगस्त 2025 से कृषि विश्वविद्यालय में चल रही हैं। अप्रैल से नए सत्र की कक्षाएं खेल विश्वविद्यालय परिसर से ही संचालित की जाएंगी।
पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण की व्यवस्था
खेल विश्वविद्यालय में 12 नियमित खेल पाठ्यक्रम शुरू होंगे, जिनमें डिग्री, डिप्लोमा और पीएचडी जैसे विभिन्न स्तर के कोर्स शामिल होंगे। खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए पूर्व खिलाड़ियों को कोच के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जिससे युवा खिलाड़ियों को अनुभवी मार्गदर्शन मिल सके। साईं (भारतीय खेल प्राधिकरण) के स्पोर्ट्स सेंटरों की तरह, यहां भी खिलाड़ियों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। खेल विज्ञान के माध्यम से उनकी शारीरिक क्षमताओं का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा।
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खेल विज्ञान प्रयोगशाला का निर्माण
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, खेल विश्वविद्यालय में एक आधुनिक खेल विज्ञान प्रयोगशाला का निर्माण भी किया जाएगा। यह प्रयोगशाला देश-विदेश के स्पोर्ट्स सेंटरों की तर्ज पर विकसित की जाएगी। इसके निर्माण से खिलाड़ियों को अपनी शारीरिक क्षमता के आकलन और सुधार के लिए बेंगलुरु या अन्य राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रयोगशाला में खिलाड़ी की शारीरिक क्षमता का सटीक मूल्यांकन किया जा सकेगा और किसी भी कमी को दूर करने के उपाय सुझाए जाएंगे। उम्मीद है कि इस विश्वविद्यालय के निर्माण से मेरठ से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या में वृद्धि होगी।
हर कमिश्नरी में बनेगा स्पोर्ट्स कॉलेज
खेल विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। प्रदेश सरकार की योजना है कि हर कमिश्नरी में एक स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना की जाएगी। जिस प्रकार हर जनपद में स्टेडियम बनाए जा रहे हैं, उसी प्रकार कमिश्नरी स्तर पर खेल कॉलेजों का निर्माण किया जाएगा। इससे खेल प्रतिभाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
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विश्वविद्यालय का निर्माण और डिजाइन
मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। विश्वविद्यालय के भवनों का डिजाइन भारतीय पौराणिक मंदिरों की नागर शैली से प्रेरित है, जो कोणार्क के सूर्य मंदिर, पुरी के जगन्नाथ मंदिर और सोमनाथ मंदिर की वास्तुकला की याद दिलाता है। परिसर का पूरा खाका इसी शैली में तैयार किया गया है। वर्तमान में, विश्वविद्यालय में एक बीपीईएस (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) कोर्स शुरू किया जा चुका है, जिसकी कक्षाएं अगस्त 2025 से कृषि विश्वविद्यालय में चल रही हैं। अप्रैल से नए सत्र की कक्षाएं खेल विश्वविद्यालय परिसर से ही संचालित की जाएंगी।
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पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण की व्यवस्था
खेल विश्वविद्यालय में 12 नियमित खेल पाठ्यक्रम शुरू होंगे, जिनमें डिग्री, डिप्लोमा और पीएचडी जैसे विभिन्न स्तर के कोर्स शामिल होंगे। खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए पूर्व खिलाड़ियों को कोच के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जिससे युवा खिलाड़ियों को अनुभवी मार्गदर्शन मिल सके। साईं (भारतीय खेल प्राधिकरण) के स्पोर्ट्स सेंटरों की तरह, यहां भी खिलाड़ियों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। खेल विज्ञान के माध्यम से उनकी शारीरिक क्षमताओं का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा।
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खेल विज्ञान प्रयोगशाला का निर्माण
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, खेल विश्वविद्यालय में एक आधुनिक खेल विज्ञान प्रयोगशाला का निर्माण भी किया जाएगा। यह प्रयोगशाला देश-विदेश के स्पोर्ट्स सेंटरों की तर्ज पर विकसित की जाएगी। इसके निर्माण से खिलाड़ियों को अपनी शारीरिक क्षमता के आकलन और सुधार के लिए बेंगलुरु या अन्य राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रयोगशाला में खिलाड़ी की शारीरिक क्षमता का सटीक मूल्यांकन किया जा सकेगा और किसी भी कमी को दूर करने के उपाय सुझाए जाएंगे। उम्मीद है कि इस विश्वविद्यालय के निर्माण से मेरठ से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या में वृद्धि होगी।
हर कमिश्नरी में बनेगा स्पोर्ट्स कॉलेज
खेल विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। प्रदेश सरकार की योजना है कि हर कमिश्नरी में एक स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना की जाएगी। जिस प्रकार हर जनपद में स्टेडियम बनाए जा रहे हैं, उसी प्रकार कमिश्नरी स्तर पर खेल कॉलेजों का निर्माण किया जाएगा। इससे खेल प्रतिभाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।