संकट: जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराना है तो नंबर ले जाइए...जुलाई में आइए, वापस लौट रहे मरीज
मेरठ जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराना है तो आपको वेटिंग मिलेगी। ऐसे में मरीज या तो निजी लैब में महंगी जांच कराए या फिर जुलाई तक इंतजार करे। यहां आने अल्ट्रासाउंड कराने आने वाले तकरीबन 50 मरीजों को हर दिन इसी तरह तारीखें मिल रही हैं।
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विस्तार
अगर आपको मेरठ जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराना है तो फिलहाल इसे भूल जाइए। जांच कराने के लिए आपको नंबर मिलेगा और दो माह बाद की तारीख। यहां हर रोज 50 से ज्यादा लोगों को इसी तरह तारीख मिल रही है। अब मरीज या तो निजी लैब में महंगी जांच कराए या फिर जुलाई तक इंतजार करे।
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. एसके नंदा बताते हैं कि जिला अस्पताल और महिला जिला अस्पताल दोनों जगह एक ही रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव त्यागी की तैनाती है। वह सुबह आठ बजे से 11 बजे तक एक्सरे की जांच और अल्ट्रासाउंड करते हैं। इसके बाद महिला जिला अस्पताल चले जाते हैं। रेडियोलॉजी विभाग के लिए हर रोज 200 से 250 जांच लिखी जाती हैं। इनमें सवा सौ से ज्यादा एक्सरे और 40 से 50 अल्ट्रासाउंड ही हो पाते हैं।
केस स्टडी-1
साबुन गोदाम निवासी पूनम पेट दर्द की परेशानी में जिला अस्पताल आईं। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड लिखा। रेडियोलॉजी विभाग में गईं तो अल्ट्रासाउंड के लिए जुलाई की तारीख दी गई।
केस स्टडी-2
घंटाघर के बसंत कुमार को लिवर की समस्या है। कुछ दवाइयां देकर फिजिशियन ने अल्ट्रासाउंड जरूरी बताया। रेडियोलॉजी विभाग में पहुंचे तो दो माह बाद का नंबर मिला।
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केस स्टडी-3
इस्लामनगर के दिलशाद के गॉल ब्लेडर में (पित्त की थैली) पथरी है। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा है, ताकि पथरी का साइज पता चल सके, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया।
अरीश रिजवी
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए यह परेशानी इन तीनों की नहीं, यहां हर रोज 50 से ज्यादा लोगों को इसी तरह तारीख मिल रही है। अब या तो मरीज निजी लैब में महंगी जांच कराएं या फिर जुलाई तक इंतजार करें।
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. एसके नंदा बताते हैं कि पीएल शर्मा जिला अस्पताल और महिला जिला अस्पताल दोनों जगह एक ही रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव त्यागी की तैनाती है। वह सुबह आठ बजे से 11 बजे तक एक्सरे की जांच और अल्ट्रासाउंड करते हैं। इसके बाद महिला जिला अस्पताल चले जाते हैं।
रेडियोलॉजी विभाग के लिए हर रोज 200 से 250 जांच लिखी जाती हैं। इनमें सवा सौ से ज्यादा एक्सरे और 40 से 50 अल्ट्रासाउंड ही हो पाते हैं। जो गंभीर मरीज अस्पताल में भर्ती होते हैं उनकी जांच प्राथमिकता के आधार की जाती है।
सीटी स्कैन भी एक दिन बाद
मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर एक्सरे तक की रिपोर्ट अगले दिन दी जा रही है। सीटी स्कैन के लिए भी एक दिन पहले पंजीकरण कराना पड़ता है। इस अव्यवस्था के बावजूद इसे ठीक करने के लिए गंभीरता से कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद हैं खाली
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद खाली हैं। डॉ. संजीव त्यागी की भी महिला जिला अस्पताल में मूल तैनाती है, यहां अटैच हैं। पूरे प्रदेश में ही रेडियोलॉजिस्ट की कमी है, जिस कारण यह दिक्कत आ रही है।
क्या हैं जांच के रेट
जांच जिला अस्पताल प्राइवेट में
अल्ट्रासाउंड मुफ्त 800-1000 रुपये
डिजिटल एक्सरे मुफ्त 250-600 रुपये
सीटी स्कैन मुफ्त 1500-10000 रुपये
जांच में देरी बन सकती है जानलेवा
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि लिवर, गॉल ब्लैडर या फिर ट्यूमर आदि की जांच और इलाज सही समय पर न हो तो यह मरीज के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। जांच तो जितनी जल्दी हो, उतना बेहतर है।
मेडिकल का इंटरनेट हुआ ठप, 45 मिनट नहीं बने पर्चे
मेडिकल कॉलेज में शनिवार को इंटरनेट करीब 45 मिनट तक नहीं चला, जिस कारण सुबह 10 से 11 बजे के बीच ओपीडी में कंप्यूटर से पर्चे नहीं बन पाए। इस कारण ओपीडी में पर्चा काउंटर पर मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। मरीज और तीमारदार परेशान रहे।
इस दौरान कुछ कर्मचारियों ने कुछ पर्चे मैन्युअल बनाई, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण अव्यवस्था हावी रही। इस संबंध में लोगों ने चिकित्सकों से शिकायत भी की। प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि इंटरनेट में समस्या थी, धीमा हो गया था। थोड़ी देर बाद स्पीड सही हो गई। ओपीडी में ढाई हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे थे। कुछ मरीज ऐसे भी रहे, जो लाइन में लगे-लगे परेशान हो गए और बिना पर्चा बनवाए ही वापस लौट गए।