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संतोष से मिलती है शांति : प्रतीक सागर महाराज
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे दशलक्षण धर्म महापर्व के नौवें दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से अभिषेक और पूजन कर पुण्य अर्जित किया। समवशरण जिनालय में तीन लोक महामंडल विधान की मंगल क्रियाएं विधानाचार्य पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने मंगलाष्टक के साथ शुरू कराई। मल्लिनाथ भगवान की शांतिधारा पंकज जैन और सविता जैन ने की।
प्रतीक सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को आकिंचन धर्म का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि संसार में रमने के कारण मनुष्य विकारों में उलझता चला जाता है। व्यक्ति अपने किए और प्राप्त किए में संतोष रखे तो उसे शांति मिल सकती है। संतोष के अभाव में तीनों लोक की अपार संपदा मिलने के बाद भी मनुष्य सुखी नहीं हो सकता। मोह, राग, द्वेष, ईर्ष्या और लालच अशांति का कारण बनते हैं।
तीन लोक विधान में भगवान के 1008 नामों की आराधना की गई। शाम को शास्त्र प्रवचन में क्षेत्र अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन ने कहा कि संसारी प्राणी अपने दुखों से उतना दुखी नहीं होता, जितना पड़ोसी के सुख को देखकर होता है। उन्होंने आत्मा के शुद्ध और ज्ञायक स्वरूप पर प्रकाश डाला।
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संगीतमय आरती में महिलाओं और पुरुषों ने भजनों पर भक्ति कर वातावरण भक्तिमय कर दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के पुरस्कार अमित जैन इंदूरानी की ओर से प्रदान किए गए। कार्यक्रम में महामंत्री मुकेश जैन सराफ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, सुनील जैन, विजय कुमार जैन, मुकेश जैन, अतुल जैन, उमेश जैन और कमल जैन सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा।
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हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे दशलक्षण धर्म महापर्व के नौवें दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से अभिषेक और पूजन कर पुण्य अर्जित किया। समवशरण जिनालय में तीन लोक महामंडल विधान की मंगल क्रियाएं विधानाचार्य पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने मंगलाष्टक के साथ शुरू कराई। मल्लिनाथ भगवान की शांतिधारा पंकज जैन और सविता जैन ने की।
प्रतीक सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को आकिंचन धर्म का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि संसार में रमने के कारण मनुष्य विकारों में उलझता चला जाता है। व्यक्ति अपने किए और प्राप्त किए में संतोष रखे तो उसे शांति मिल सकती है। संतोष के अभाव में तीनों लोक की अपार संपदा मिलने के बाद भी मनुष्य सुखी नहीं हो सकता। मोह, राग, द्वेष, ईर्ष्या और लालच अशांति का कारण बनते हैं।
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तीन लोक विधान में भगवान के 1008 नामों की आराधना की गई। शाम को शास्त्र प्रवचन में क्षेत्र अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन ने कहा कि संसारी प्राणी अपने दुखों से उतना दुखी नहीं होता, जितना पड़ोसी के सुख को देखकर होता है। उन्होंने आत्मा के शुद्ध और ज्ञायक स्वरूप पर प्रकाश डाला।
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संगीतमय आरती में महिलाओं और पुरुषों ने भजनों पर भक्ति कर वातावरण भक्तिमय कर दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के पुरस्कार अमित जैन इंदूरानी की ओर से प्रदान किए गए। कार्यक्रम में महामंत्री मुकेश जैन सराफ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, सुनील जैन, विजय कुमार जैन, मुकेश जैन, अतुल जैन, उमेश जैन और कमल जैन सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा।