सरकारी अस्पतालों का बुरा हाल, फटे गद्दे, स्ट्रेचर व बेड से चादर गायब, मरीज-तीमारदार यहां सब लाचार
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गद्दे फटे, बेड से चादर गायब
जिला अस्पताल में प्रथम तल पर बने जनरल वार्ड में कई बेड ऐसे मिले, जिनमें गद्दे फटे हुए हैं और उन पर चादर भी डाली हुई नहीं है। मरीज बिना चादर और फटे गद्दे पर ही लेटने को मजबूर हैं। यहां चंद बेड पर ही मॉनिटर लगे हैं, वह भी शोपीस बने हुए हैं। इन्हें कम ही चलाया जाता है।
दुरुस्त की जाएगी व्यवस्था
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल का कहना है कि बेड पर चादर न होने का पता कराया जाएगा, क्योंकि चादर की पर्याप्त उपलब्धता है। अस्पताल को लगातार बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. धीरज बालियान का कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त स्ट्रेचर हैं। कई बार मरीज ही स्ट्रेचर पर नहीं जाते हैं।
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स्ट्रेचर खींचते परिजन
मेडिकल कॉलेज में मरीजों को स्ट्रेचर के लिए परेशान होना पड़ता है। तीमारदार या मरीज खुद ड्रिप लेकर चलने को मजबूर होते हैं। अगर बिना चादर-तकिये का कभी स्ट्रेचर मिल जाए तो तीमारदारों को खुद स्ट्रेचर खींचकर ले जाना पड़ता है। वार्ड ब्वाय या स्टाफ उन्हेंले जाने की जहमत नहीं उठाते हैं।