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Meerut News: पानी के टैंक में ओवर फ्लो रोकने के लिए गए आविष्कार मिला पेटेंट
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। छत पर रखे जाने वाली पानी की टंकियों से ओवर फ्लो रोकने के लिए बिजनौर के हेमंत कुमार ने एक आविष्कार किया है। भारत सरकार के बौद्धिक संपदा केंद्र द्वारा इस आविष्कार को पेटेंट दिया गया।
हेमन्त कुमार ने बताया कि ओवर फ्लो रोकने के लिए फ्लोट वॉल्व नामक जो उपकरण फिलहाल प्रयोग में लाया जा रहा है उससे यह आविष्कार अधिक टिकाऊ होगा। यह टंकियों से ओवर फ्लो के कारण होने वाली पानी की बर्बादी को रोकने में अधिक सक्षम है।
सरकार से इस आविष्कार को पेटेंट संख्या 482295 ग्रांट की गई है। पेटेंट के लिए आवेदन सन 2017 में किया गया था। पेटेंट अधिनियम 1970 के अधीन यह अगले बीस वर्षों के लिए अनुदत्त किया गया है।
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घरेलू जल भंडारण टंकियों को उन्नत करने के लिए हेमन्त ने अभी तक तीन आविष्कार किए जिनमें से यह पहला है जिसे पेटेंट मिला। ये आविष्कार जल संरक्षण से संबंधित हैं।
हेमंत कुमार नूरपुर क्षेत्र के ग्राम फीना के रहने वाले हैं और वर्तमान में सिंचाई विभाग लखनऊ में सहायक अभियंता के रूप कार्यरत हैं। इनको तकनीकी लेखन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के हिन्दी संस्थान द्वारा प्रतिष्ठित संपूर्णानंद पुरस्कार और जल अभियांत्रिकी में उत्कृष्ट शोध के डॉ. एएन खोसला पदक भी मिल चुका है।
हेमंत स्थानीय इतिहास पर शोध पूर्ण कार्य के लिए भी जाने जाते हैं। इसके पहले भी इनके दो आविष्कारों को भारत सरकार से पेटेंट मिल चुका है।
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बिजनौर। छत पर रखे जाने वाली पानी की टंकियों से ओवर फ्लो रोकने के लिए बिजनौर के हेमंत कुमार ने एक आविष्कार किया है। भारत सरकार के बौद्धिक संपदा केंद्र द्वारा इस आविष्कार को पेटेंट दिया गया।
हेमन्त कुमार ने बताया कि ओवर फ्लो रोकने के लिए फ्लोट वॉल्व नामक जो उपकरण फिलहाल प्रयोग में लाया जा रहा है उससे यह आविष्कार अधिक टिकाऊ होगा। यह टंकियों से ओवर फ्लो के कारण होने वाली पानी की बर्बादी को रोकने में अधिक सक्षम है।
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सरकार से इस आविष्कार को पेटेंट संख्या 482295 ग्रांट की गई है। पेटेंट के लिए आवेदन सन 2017 में किया गया था। पेटेंट अधिनियम 1970 के अधीन यह अगले बीस वर्षों के लिए अनुदत्त किया गया है।
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घरेलू जल भंडारण टंकियों को उन्नत करने के लिए हेमन्त ने अभी तक तीन आविष्कार किए जिनमें से यह पहला है जिसे पेटेंट मिला। ये आविष्कार जल संरक्षण से संबंधित हैं।
हेमंत कुमार नूरपुर क्षेत्र के ग्राम फीना के रहने वाले हैं और वर्तमान में सिंचाई विभाग लखनऊ में सहायक अभियंता के रूप कार्यरत हैं। इनको तकनीकी लेखन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के हिन्दी संस्थान द्वारा प्रतिष्ठित संपूर्णानंद पुरस्कार और जल अभियांत्रिकी में उत्कृष्ट शोध के डॉ. एएन खोसला पदक भी मिल चुका है।
हेमंत स्थानीय इतिहास पर शोध पूर्ण कार्य के लिए भी जाने जाते हैं। इसके पहले भी इनके दो आविष्कारों को भारत सरकार से पेटेंट मिल चुका है।