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पश्चिम के स्कूलों में दूषित जल पी रहे नौनिहाल
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 30 Aug 2016 02:32 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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मोटी फीस वसूलकर चमकदार व्यवस्थाएं का दावा करने वाले विद्यालयों में नौनिहाल जहरीला पानी पीने के लिए मजबूर हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पश्चिमी उप्र के स्कूलों की पेयजल गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगाए हैं।
पिछले दिनों सेंटर फ ॉर एनवायरमेंटल साइंस के सर्वे में खुलासा हुआ कि मेरठ में 40 मीटर तक जल प्रदूषित है। खासतौर पर काली नदी के किनारे व औद्योगिक इकाइयों के पास कई स्थानों पर नाइट्रेट व आयरन की मात्रा बढ़ी है। भूजल रिचार्ज के प्रयासों में कमी के कारण पानी दूषित हो रहा है। जल में नाइट्रेट की मात्रा 209 मिलीग्राम प्रति लीटर, आयरन 30 फीसदी नमूनों में एक हजार मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक मिली है।
हाल यह कि अब जिले में 150 फुट गहरी बोरिंग में भी प्रदूषित जल निकल रहा है। पानी में बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ सहित हैवी मेटल्स का लोड बढ़ गया है। जिले में जलालपुर, कोहल, खिर्वा सहित काली नदी से सटे गांवों के सभी प्राथमिक विद्यालयों में पानी की स्थिति बेहद खराब है। दौराला, जानी, खरखौदा ब्लॉक के गांव इसमें शामिल हैं।
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जल में बढ़ा बैक्टीरिया का लोड
जिलों के स्कूलों में बढ़ते जल प्रदूषण का कारण पानी में बैक्टीरिया लोड का बढ़ना है। पानी में औद्योगिक प्रदूषण के कारण बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ, शैवाल, कवक, कठोरता, चिकनाहट सहित कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का संक्रमण भयावह स्तर पर पहुंच चुका है। पानी में लेड, आयरन, हैवी मेटल्स के अलावा अब आर्सेनिक की मात्रा भी बढ़ने लगी है। इसका खुलासा पिछले दिनों केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड की रिपोर्ट में हुआ है।
बीमारी का बड़ा कारण जलीय प्रदूषण
जिले में 100 से अधिक पब्लिक स्कूल, 1367 माध्यमिक, बेसिक स्कूल हैं। जहां कई विद्यार्थी रोजाना जहरीला पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 1365 स्कूलों व 1765 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच में अधिकांश बच्चों में संक्रमण बड़े स्तर पर पाया। बच्चों में बीमारी का बड़ा कारण जलीय प्रदूषण निकला। जिले के अधिकांश गांवों के भूजल में आयरन, कॉपर, जिंक का हैवी लोड मिला है। दौराला व अन्य इलाकों में 150 फिट गहराई तक प्रदूषित जल पाया गया।
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पिछले दिनों सेंटर फ ॉर एनवायरमेंटल साइंस के सर्वे में खुलासा हुआ कि मेरठ में 40 मीटर तक जल प्रदूषित है। खासतौर पर काली नदी के किनारे व औद्योगिक इकाइयों के पास कई स्थानों पर नाइट्रेट व आयरन की मात्रा बढ़ी है। भूजल रिचार्ज के प्रयासों में कमी के कारण पानी दूषित हो रहा है। जल में नाइट्रेट की मात्रा 209 मिलीग्राम प्रति लीटर, आयरन 30 फीसदी नमूनों में एक हजार मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक मिली है।
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हाल यह कि अब जिले में 150 फुट गहरी बोरिंग में भी प्रदूषित जल निकल रहा है। पानी में बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ सहित हैवी मेटल्स का लोड बढ़ गया है। जिले में जलालपुर, कोहल, खिर्वा सहित काली नदी से सटे गांवों के सभी प्राथमिक विद्यालयों में पानी की स्थिति बेहद खराब है। दौराला, जानी, खरखौदा ब्लॉक के गांव इसमें शामिल हैं।
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जल में बढ़ा बैक्टीरिया का लोड
जिलों के स्कूलों में बढ़ते जल प्रदूषण का कारण पानी में बैक्टीरिया लोड का बढ़ना है। पानी में औद्योगिक प्रदूषण के कारण बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ, शैवाल, कवक, कठोरता, चिकनाहट सहित कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का संक्रमण भयावह स्तर पर पहुंच चुका है। पानी में लेड, आयरन, हैवी मेटल्स के अलावा अब आर्सेनिक की मात्रा भी बढ़ने लगी है। इसका खुलासा पिछले दिनों केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड की रिपोर्ट में हुआ है।
बीमारी का बड़ा कारण जलीय प्रदूषण
जिले में 100 से अधिक पब्लिक स्कूल, 1367 माध्यमिक, बेसिक स्कूल हैं। जहां कई विद्यार्थी रोजाना जहरीला पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 1365 स्कूलों व 1765 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच में अधिकांश बच्चों में संक्रमण बड़े स्तर पर पाया। बच्चों में बीमारी का बड़ा कारण जलीय प्रदूषण निकला। जिले के अधिकांश गांवों के भूजल में आयरन, कॉपर, जिंक का हैवी लोड मिला है। दौराला व अन्य इलाकों में 150 फिट गहराई तक प्रदूषित जल पाया गया।