Interview: ये है पारुल के गोल्ड मेडल जीतने का राज, अमर उजाला को बताई पूरी बात, मां को देख हुईं भावुक, बोलीं...
Asian Games 2023 : पारुल चौधरी ने अमर उजाला से खास बातचीत में गोल्ड मेडल जीतने का राज बताया है। जानिए आखिर गोल्ड मेडल जीतने से चंद सेकेंड पहले पारुल के मन में क्या ख्याल आया था।
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एशियन गेम्स में दो पदक जीतने वाली इकलौता गांव की बेटी पारुल चौधरी कहती हैं कि रजत पदक लाकर मैं बहुत खुश थी, लेकिन उत्साह अगले दिन दौड़ में गोल्ड लाने के लिए था। रातभर नींद नहीं आई। सुबह पांच बजे सोई। अगले दिन जब मैं दौड़ रही थी तो अंतिम क्षण में मेरे दिमाग में बस यही था कि पारुल आज तेरे पास चांस है। अगर चूक गई तो डीएसपी बनने का सपना पूरा नहीं होगा। मैंने अपनी पूरी जान लगा दी और गोल्ड मेडल जीत लिया। आगे का लक्ष्य ओलंपिक में जीत हासिल करने का होगा।
पदक जीतकर गांव पहुंचीं गोल्डन गर्ल पारुल चौधरी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि गोल्ड के लिए दौड़ी तो शुरुआत में कुछ नर्वस थी, लेकिन बढ़ते कदमों के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ता गया। आगे जापानी धावक अच्छा दौड़ रही थी। अंत में दस सेकेंड बचे तो दिमाग में बस यही सोचा कि आज अगर मेडल नहीं मिला तो डीएसपी नहीं बन पाऊंगी, मेरा ये सपना टूट जाएगा। इसी सोच के साथ मैंने पूरी ताकत लगा दी और अंतिम क्षणों में देश के लिए गोल्ड मेडल जीत लिया।
पारुल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2022 में जो खेल नीति बनाई है, वह अच्छी है। अब योगी बाबा डीएसीपी बना देंगे। देश के लिए मेडल हासिल करने के लिए देशवासियों और परिवार की दुआओं के लिए धन्यवाद।
मां को देखकर हुई भावुक... बोली, मेडल की असली हकदार आप
मां राजेश देवी सुबह से ही बेटी का इंतजार कर रहीं थीं। घर के गेट पर थाली सजाकर राजेश देवी और परिवार के अन्य सदस्य खड़े थे। जैसे ही पारुल चौधरी घर की दहलीज पर पहुंची तो आंखों से आंसू निकल पड़े। अपने गले से मेडल निकालकर मां राजेश देवी के गले में डाल दिया और फिर पैर छूकर आशीर्वाद लिया। गले लगकर बोली मां, मेडल की असली हकदार आप हो, आपकी वजह से ही यह मेडल आया है।
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गोल्डन गर्ल पारुल चौधरी ने कहती हैं कि उसके मेडल के असली हकदार उसके पिता कृष्णपाल और माता राजेश देवी हैं। उनकी प्रेरणा और मेहनत से ही वह इस मुकाम तक पहुंची हैं। अगर माता-पिता और भाई रोहित, व राहुल चौधरी और बहन प्रीति का सहयोग नहीं मिलता तो आज मेडल नहीं आता। सभी के सहयोग से यह संभव हो पाया है।
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