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मवीमीरा गांव में दहशत का माहौल
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दौराला। मवीमीरा गांव में सिगरेट खरीदने के दौरान हुए विवाद के बाद फायरिंग व पथराव की घटना में बृहस्पतिवार को भी किसी पक्ष ने तहरीर नहीं दी। फायरिंग की घटना से गांव में दहशत का माहौल है। पुलिस ने गश्त कर शांति बनाए रखने की अपील की।
मवीमीरा गांव में बुधवार देर रात कुछ युवक सिगरेट खरीद रहे थे। इस दौरान उनकी दूसरे समुदाय के युवकों से विवाद हो गया। देखते ही देखते दोनों पक्षों में मारपीट हो गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों में जमकर फायरिंग व पथराव हुआ था। गांव में लगभग 15 से 20 राउंड फायरिंग होने से गांव में दहशत का माहौल फैल गया था। हमले में सचिन, सुंदर, प्रवेश व मीनू घायल हो गए थे। दौराला के अलावा कई थानों की फोर्स ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला था। इसके बाद मामला शांत हुआ। बृहस्पतिवार को लोग बच्चों को बाहर भेजने से भी कतरा रहे थे। हालांकि पुलिस ने दूसरे दिन भी गांव में गश्त कर शांति बनाए रखने की अपील की।
चुनाव के दौरान होती है घटना
पंचायत चुनाव आते ही मवीमीरा गांव में इस तरह की घटना हर बार होती है। 2015 के पंचायत चुनाव से पहले ही भी गांव में सांप्रदायिक रूप देने का प्रयास किया गया था। तब थाना प्रभारी डीपी सिंह को इस झगड़े की वजह से हटाकर परशुराम को चार्ज दिया गया था। पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी के चलते बड़ी घटना होने से बची थी। वर्तमान में भी चुनाव नजदीक है और गांव का माहौल फिर से बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बुधवार रात हुई घटना के बाद से एलआईयू भी सतर्क हो गया है। एलआईयू ने रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी है।
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मवीमीरा गांव में बुधवार देर रात कुछ युवक सिगरेट खरीद रहे थे। इस दौरान उनकी दूसरे समुदाय के युवकों से विवाद हो गया। देखते ही देखते दोनों पक्षों में मारपीट हो गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों में जमकर फायरिंग व पथराव हुआ था। गांव में लगभग 15 से 20 राउंड फायरिंग होने से गांव में दहशत का माहौल फैल गया था। हमले में सचिन, सुंदर, प्रवेश व मीनू घायल हो गए थे। दौराला के अलावा कई थानों की फोर्स ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला था। इसके बाद मामला शांत हुआ। बृहस्पतिवार को लोग बच्चों को बाहर भेजने से भी कतरा रहे थे। हालांकि पुलिस ने दूसरे दिन भी गांव में गश्त कर शांति बनाए रखने की अपील की।
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चुनाव के दौरान होती है घटना
पंचायत चुनाव आते ही मवीमीरा गांव में इस तरह की घटना हर बार होती है। 2015 के पंचायत चुनाव से पहले ही भी गांव में सांप्रदायिक रूप देने का प्रयास किया गया था। तब थाना प्रभारी डीपी सिंह को इस झगड़े की वजह से हटाकर परशुराम को चार्ज दिया गया था। पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी के चलते बड़ी घटना होने से बची थी। वर्तमान में भी चुनाव नजदीक है और गांव का माहौल फिर से बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बुधवार रात हुई घटना के बाद से एलआईयू भी सतर्क हो गया है। एलआईयू ने रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी है।
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