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पांच साल में लाखों के हैंडपंप जमीदोज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Apr 2018 01:37 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जिले में रखरखाव के अभाव में हर साल सैकड़ों हैंडपंप जमीदोज हो रहे हैं। लेकिन नगर निगम और जल निगम को इनकी फिक्र नहीं है, उनका जोर तो नए हैंडपंप लगाने पर है। जिस सरकारी हैंडपंप की उम्र दस साल आंकी जाती है वह एक-दो साल में ही भूमिगत हो जाता है। बीते पांच साल में शहर और देहात में जमीदोज हुए हैंडपंपों की संख्या 4500 भी मान लें तो खर्च धनराशि 21 करोड़ रुपये बैठती है। इससे साफ है कि सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है।
गिरते भूगर्भ जल स्तर और दूषित होते भूगर्भ जल के कारण जनता को स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए पूर्व में केन्द्र सरकार ने सरकारी हैंडपंप लगाने की योजना शुरू की थी। इसका लाभ जनता को बड़े स्तर पर मिला। अभी भी शहर और देहात के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां की जनता सरकारी हैंडपंप से ही प्यास बुझाती है।
जल निगम और नगर निगम लगवाता है हैंडपंप
महानगर में नगर निगम और देहात में जल निगम सरकारी हैंडपंप लगवाने का काम करता है। इस बार जल निगम की ओर से देहात में एक विधान सभा में 100-100 हैंडपंप लगवाए जाएंगे। उप्र सरकार ने सभी विधायकों को बराबर-बराबर हैंडपंप दिए हैं।
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ये है ठेकेदार की जिम्मेदारी
सरकारी हैंडपंप लगाने वाले ठेेकेदार पर एक साल तक हैंडपंप के रखरखाव की जिम्मेदारी तय है। इसके बाद ठेकेदार जल निगम कोहैंडओवर करते समय नल पूरी तरह चालू दिखाएगा। अगली हैंडओवर की प्रक्रिया जल निगम की तरफ से नगर निगम और ग्राम पंचायतों को होगी।
शहर में 10 हजार, देहात में 31 हजार हैंडपंप
महानगर और देहात मेें हैंडपंपों की संख्या 41 हजार है। प्रतिवर्ष यह संख्या एक हजार बढ़ जाती है। अगर सभी हैंडपंप सही रहें तो हर साल सरकारी नलों पर चार करोड़ 70 लाख रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे। हैंडपंपों के दुरुपयोग को देखते हुए केन्द्र सरकार पूर्व में ही नए हैंडपंप लगाने पर रोक लगा चुकी है।
150 की आबादी पर एक हैंडपंप
सरकारी मानकों के अनुसार पूर्व में जहां 250 की जनसंख्या पर एक हैंडपंप लगाया जाता था। अब यह मानक 150 की आबादी पर कर दिया गया है। साथ ही एक हैंडपंप से दूसरे हैंडपंप की दूरी 75 मीटर होनी चाहिए। लेकिन सरकारी मानकों को उस समय ठेंगा दिखा दिया जाता है जब कोई वीआईपी अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए जल निगम को हैंडपंप लगाने का आदेश देता है।
ग्राम पंचायतों के हाथों में हैंडपंप
देहात में हैंडपंपों का रखरखाव ग्राम पंचायतों को सौंपा गया है। सरकारी विभागों ने हैंडपंपों की निगरानी से मुंह मोड़ लिया है। यही कारण है कि खराब हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर भले ही ग्राम पंचायतों के सरकारी खजाने से धन खर्च हो रहा हो, लेकिन धरातल वह नजर नहीं आ रहा। हालात यह हैं कि काफी संख्या में खराब हैंडपंप ठीक होने की बजाय जमीदोज हो रहे हैं।
जनप्रतिनिधि भी नहीं गंभीर
शहर और देहात में जमीदोज हो रहे सरकारी हैंडपंपों को लेकर विधायक और सांसद भी गंभीर नहीं हैं। ये प्रतिनिधि हर साल विधान सभा में सवाल उठाकर नए हैंडपंपों की मांग तो करते हैं, लेकिन खराब हैंडपंपों को जमीदोज होने से रोकने के लिए कभी कोई सवाल सामने नहीं आया।
सीतराम, अधिशासी अभियंता, प्रथम जल निगम।
वर्जन====
महानगर में खराब पड़े ऐसे हैंडपंपों का भी सत्यापन कराया जा रहा है जो सड़कों में दब गए हैं। संख्या तो अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन ऐसे हैंडपंपों से इंकार नहीं किया जा सकता है। शीघ्र ही ऐसी सूची जारी कर दी जाएगी। कुछ खराब हैंडपंपों को ठीक करने का काम इसी सप्ताह शुरू होगा।
एसके सिन्हा, महाप्रबंधक जल, नगर निगम जलकल।
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गिरते भूगर्भ जल स्तर और दूषित होते भूगर्भ जल के कारण जनता को स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए पूर्व में केन्द्र सरकार ने सरकारी हैंडपंप लगाने की योजना शुरू की थी। इसका लाभ जनता को बड़े स्तर पर मिला। अभी भी शहर और देहात के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां की जनता सरकारी हैंडपंप से ही प्यास बुझाती है।
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जल निगम और नगर निगम लगवाता है हैंडपंप
महानगर में नगर निगम और देहात में जल निगम सरकारी हैंडपंप लगवाने का काम करता है। इस बार जल निगम की ओर से देहात में एक विधान सभा में 100-100 हैंडपंप लगवाए जाएंगे। उप्र सरकार ने सभी विधायकों को बराबर-बराबर हैंडपंप दिए हैं।
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ये है ठेकेदार की जिम्मेदारी
सरकारी हैंडपंप लगाने वाले ठेेकेदार पर एक साल तक हैंडपंप के रखरखाव की जिम्मेदारी तय है। इसके बाद ठेकेदार जल निगम कोहैंडओवर करते समय नल पूरी तरह चालू दिखाएगा। अगली हैंडओवर की प्रक्रिया जल निगम की तरफ से नगर निगम और ग्राम पंचायतों को होगी।
शहर में 10 हजार, देहात में 31 हजार हैंडपंप
महानगर और देहात मेें हैंडपंपों की संख्या 41 हजार है। प्रतिवर्ष यह संख्या एक हजार बढ़ जाती है। अगर सभी हैंडपंप सही रहें तो हर साल सरकारी नलों पर चार करोड़ 70 लाख रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे। हैंडपंपों के दुरुपयोग को देखते हुए केन्द्र सरकार पूर्व में ही नए हैंडपंप लगाने पर रोक लगा चुकी है।
150 की आबादी पर एक हैंडपंप
सरकारी मानकों के अनुसार पूर्व में जहां 250 की जनसंख्या पर एक हैंडपंप लगाया जाता था। अब यह मानक 150 की आबादी पर कर दिया गया है। साथ ही एक हैंडपंप से दूसरे हैंडपंप की दूरी 75 मीटर होनी चाहिए। लेकिन सरकारी मानकों को उस समय ठेंगा दिखा दिया जाता है जब कोई वीआईपी अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए जल निगम को हैंडपंप लगाने का आदेश देता है।
ग्राम पंचायतों के हाथों में हैंडपंप
देहात में हैंडपंपों का रखरखाव ग्राम पंचायतों को सौंपा गया है। सरकारी विभागों ने हैंडपंपों की निगरानी से मुंह मोड़ लिया है। यही कारण है कि खराब हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर भले ही ग्राम पंचायतों के सरकारी खजाने से धन खर्च हो रहा हो, लेकिन धरातल वह नजर नहीं आ रहा। हालात यह हैं कि काफी संख्या में खराब हैंडपंप ठीक होने की बजाय जमीदोज हो रहे हैं।
जनप्रतिनिधि भी नहीं गंभीर
शहर और देहात में जमीदोज हो रहे सरकारी हैंडपंपों को लेकर विधायक और सांसद भी गंभीर नहीं हैं। ये प्रतिनिधि हर साल विधान सभा में सवाल उठाकर नए हैंडपंपों की मांग तो करते हैं, लेकिन खराब हैंडपंपों को जमीदोज होने से रोकने के लिए कभी कोई सवाल सामने नहीं आया।
सीतराम, अधिशासी अभियंता, प्रथम जल निगम।
वर्जन====
महानगर में खराब पड़े ऐसे हैंडपंपों का भी सत्यापन कराया जा रहा है जो सड़कों में दब गए हैं। संख्या तो अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन ऐसे हैंडपंपों से इंकार नहीं किया जा सकता है। शीघ्र ही ऐसी सूची जारी कर दी जाएगी। कुछ खराब हैंडपंपों को ठीक करने का काम इसी सप्ताह शुरू होगा।
एसके सिन्हा, महाप्रबंधक जल, नगर निगम जलकल।