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पांच लाख खर्च, फिर भी मच्छर जिंदा
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sat, 17 Sep 2016 02:40 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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वायरल, डेंगू और चिकनगुनिया से निपटने के लिए नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग हर कारगर कोशिश करने का दावा कर रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ ओर ही है। नगर निगम का कहना है कि मच्छरों को खत्म करने के लिए की गई फॉगिंग पर अब तक पांच लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। वहीं मैलाथियान का असर मच्छरों पर नहीं हो रहा है और लोग डेंगू, चिकनगुनिया की चपेट में आ रहे हैं। वहीं नगर स्वास्थ्य विभाग प्रतिदिन शहर के छह वार्डों में फागिंग के दावे कर रहा है। ऐसे में साफ है कि पूरे शहर में एक माह के भीतर केवल दो बार ही फागिंग हो सकती है।
ये हैं निगम के संसाधन
बड़ी मशीनें - तीन
छोटी मशीनें - 15
प्रतिदिन काम करने वाले कर्मचारी - 40
एक लीटर मैलाथियान में 20 लीटर डीजल
नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक लीटर मैलाथियान दवा में कम से कम 20 लीटर डीजल मिलाकर छिड़काव किया जाता है। मशीन से दवा के साथ धुएं के रूप में उड़ता दिखाई देने वाला डीजल ही है। जो मच्छरों पर सीधे अटैक करता है।
मच्छरों के लिए ब्लीचिंग पाउडर भी खतरनाक
नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरएस चौहान का कहना है कि मच्छरों को मारने के लिए जितना जरूरी मैलाथियान है उतना ही जरूरी डीजल और ब्लीचिंग पाउडर भी है। एक माह के भीतर शहर में कूड़ा घर और अन्य गंदगी वाले स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर के इस्तेमाल पर गौर करें तो 180 बोरों का इस्तेमाल किया जाता है। एक बोरे की कीमत 400 रुपये बताई जा रही है। यानी एक माह के भीतर लगभग 72 हजार रुपये का ब्लीचिंग पाउडर खर्च हो चुका है। एक लाख 26 हजार रुपये से 250 लीटर मैलाथियान की खरीद की गई।
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महापौर करा रहे फॉगिंग
महापौर हरिकांत अहलूवालिया को मलेरिया हुआ तो वह फागिंग मशीन लेकर सड़क पर आ गए। लगातार 20 दिन से वह शहर के मुख्य मार्गों पर अपने सामने ही फागिंग करा रहे हैं, लेकिन मच्छरों पर इसका कोई खास असर नहीं हो रहा है।
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ये हैं निगम के संसाधन
बड़ी मशीनें - तीन
छोटी मशीनें - 15
प्रतिदिन काम करने वाले कर्मचारी - 40
एक लीटर मैलाथियान में 20 लीटर डीजल
नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक लीटर मैलाथियान दवा में कम से कम 20 लीटर डीजल मिलाकर छिड़काव किया जाता है। मशीन से दवा के साथ धुएं के रूप में उड़ता दिखाई देने वाला डीजल ही है। जो मच्छरों पर सीधे अटैक करता है।
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मच्छरों के लिए ब्लीचिंग पाउडर भी खतरनाक
नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरएस चौहान का कहना है कि मच्छरों को मारने के लिए जितना जरूरी मैलाथियान है उतना ही जरूरी डीजल और ब्लीचिंग पाउडर भी है। एक माह के भीतर शहर में कूड़ा घर और अन्य गंदगी वाले स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर के इस्तेमाल पर गौर करें तो 180 बोरों का इस्तेमाल किया जाता है। एक बोरे की कीमत 400 रुपये बताई जा रही है। यानी एक माह के भीतर लगभग 72 हजार रुपये का ब्लीचिंग पाउडर खर्च हो चुका है। एक लाख 26 हजार रुपये से 250 लीटर मैलाथियान की खरीद की गई।
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महापौर करा रहे फॉगिंग
महापौर हरिकांत अहलूवालिया को मलेरिया हुआ तो वह फागिंग मशीन लेकर सड़क पर आ गए। लगातार 20 दिन से वह शहर के मुख्य मार्गों पर अपने सामने ही फागिंग करा रहे हैं, लेकिन मच्छरों पर इसका कोई खास असर नहीं हो रहा है।