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Meerut News: बहसूमा में गन्ने की अगेती प्रजाति में पोका बोइंग रोग का प्रकोप
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बहसूमा। कृषि ठाकुर विशेषज्ञ मुकेश सिंह गन्ने में पोक्का बोइंग रोग दिखाते हुए किसान को
संवाद न्यूज एजेंसी
बहसूमा। क्षेत्र में गन्ने की अगेती प्रजाति कोशा 0238 व 0118 में पोका बोइंग रोग तेजी से फैल रहा है। टॉप बोरर जैसे लक्षण दिखने से किसान असमंजस में हैं। समय पर नियंत्रण न होने पर गन्ने की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञ मुकेश सिंह और नवीन चंद्रा ने रोग के लक्षण बताए। पोका बोइंग में गन्ने की ऊपरी पत्तियां मुड़कर पीली पड़ जाती हैं और सिकुड़ती हैं। गन्ने की बढ़वार धीमी हो जाती है। यह फफूंद जनित बीमारी है, जो टॉप बोरर जैसी दिखती है। यह ऊपर की तीन से चार पोरियों में सड़न पैदा करती है। इससे गन्ना ऊपर से सूखने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे चीरने पर टॉप बोरर की तरह कोई सुंडी नहीं मिलती। इससे इसकी सही पहचान होती है। मुकेश सिंह ने समय पर नियंत्रण न होने पर उपज में भारी गिरावट की चेतावनी दी। उन्होंने किसानों से नियमित निरीक्षण और शुरुआती उपचार की अपील की।
विशेषज्ञों ने कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 500 ग्राम, कार्बेन्डाजिम 500 ग्राम या रोको (थायोफिनेट मिथाइल) 500 ग्राम का सुझाव दिया। इन दवाओं को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। वैकल्पिक रूप से, इनकी दोगुनी मात्रा मिट्टी में मिलाकर तुरंत सिंचाई करें। रोगग्रस्त खेतों में तत्काल यूरिया का प्रयोग बंद करने की सलाह दी गई है।
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बहसूमा। क्षेत्र में गन्ने की अगेती प्रजाति कोशा 0238 व 0118 में पोका बोइंग रोग तेजी से फैल रहा है। टॉप बोरर जैसे लक्षण दिखने से किसान असमंजस में हैं। समय पर नियंत्रण न होने पर गन्ने की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञ मुकेश सिंह और नवीन चंद्रा ने रोग के लक्षण बताए। पोका बोइंग में गन्ने की ऊपरी पत्तियां मुड़कर पीली पड़ जाती हैं और सिकुड़ती हैं। गन्ने की बढ़वार धीमी हो जाती है। यह फफूंद जनित बीमारी है, जो टॉप बोरर जैसी दिखती है। यह ऊपर की तीन से चार पोरियों में सड़न पैदा करती है। इससे गन्ना ऊपर से सूखने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे चीरने पर टॉप बोरर की तरह कोई सुंडी नहीं मिलती। इससे इसकी सही पहचान होती है। मुकेश सिंह ने समय पर नियंत्रण न होने पर उपज में भारी गिरावट की चेतावनी दी। उन्होंने किसानों से नियमित निरीक्षण और शुरुआती उपचार की अपील की।
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विशेषज्ञों ने कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 500 ग्राम, कार्बेन्डाजिम 500 ग्राम या रोको (थायोफिनेट मिथाइल) 500 ग्राम का सुझाव दिया। इन दवाओं को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। वैकल्पिक रूप से, इनकी दोगुनी मात्रा मिट्टी में मिलाकर तुरंत सिंचाई करें। रोगग्रस्त खेतों में तत्काल यूरिया का प्रयोग बंद करने की सलाह दी गई है।
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