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Meerut News: जैविक गुड से सेहत में सुधार, देश का हो रहा आर्थिक उद्धार
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मुजफ्फरनगर। जनपद के किसान और युवा कारोबारी केमिकल रहित व जैविक गुड़ तैयार कर ऑन डिमांड बेच रहे हैं। जैविक गुड़ बनाने के लिए किसानों को अच्छा भाव देकर गन्ने की केमिकल रहित खेती कराते हैं। के रस से बने गुड़ और अन्य उत्पाद की सप्लाई देश के कई राज्यों में करते हें। इनकी ओर से तैयार किया सादा गुड़ 40 से 50 रुपये और काजू-बादाम युक्त गुड़ 150 से 200 रुपये किलो तक बिक रहा है। यह गुड सेहत के लिए बेहतर है साथ ही कारोबार से टैक्स के माध्यम से देश का उद्धार हो रहा है।
जनपद में गुड़ उद्योग महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सेहत का ख्याल रखने वाले लोगों में जैविक गुड़ की मांग बढ़ी है। जनपद में तितावी, बेहड़ा सादात, रसूलपुर, कूकड़ा, नगला, पीनना और भोपा आदि गांव में जैविक गुड़ तैयार हो रहा है।
किसानों से महंगे दाम पर खरीद रहे हैं गन्ना
जिले में100 से अधिक कारोबारी जैविक गुड़ तैयार करा रहे हैं। इन्होंने क्षेत्र के किसानों से गन्ने की जैविक खेती का अनुबंध किया है। ये कारोबारी अपनी निगरानी में गन्ने की फसल तैयार कराकर चीनी मिल से अधिक दामों पर गन्ना खरीदते हैं ताकि केमिकल रहित गुड़ और शक्कर तैयार हो सके। जैविक गुड़ तैयार करने के लिए आम तौर पर 500 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर गन्ने की खरीद होती है।
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मैंगो फ्लेवर से लेकर काजू बादाम का गुड़
किसान उद्यमी आम तौर से सादा और खुरपा पाड़ से लेकर अन्य फ्लेवर वाले गुड़ तैयार करा दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा सप्लाई कर रहे हैं। इनमें मैंगो, ऑरेंज और चॉकलेट फ्लेवर के साथ हल्दी, सौंठ, सौंफ, इलायची, मूंगफली, तिल आदि का गुड़ भी शामिल है। जिसका दाम आम तौर से 40 रुपये से लेकर 200 रुपये किलो तक रहता है।
शिलाजीत वाला गुड़ बिकता है पांच हजार रुपये किलो
एग्री फार्म बडी प्रोड्यूसर संस्था की ओर से नंगला में संचालित कोल्हू में शिलाजीत और केसर युक्त गुड़ भी तैयार किया जा रहा है। जिसका दाम पांच हजार रुपये प्रति किलो तक है। हालाकि इस वैरायटी का गुड़ खरीदने वाले ग्राहक गिने-चुने ही हैं। शिलाजीत और केसर युक्त गुड़ आन डिमांड तैयार किया जाता है।
धीरे-धीरे बढ़ रहा जैविक गुड़ का कारोबार: राकेश कुमार
एग्री फार्म बडी प्रोड्यूसर संस्था संचालक राकेश कुमार का कहना है कि जनपद में जैविक गुड़ का कारोबार धीरे-धीरे बढ रहा है। अनुमान के अनुसार प्रति वर्ष जनपद से 25 लाख से अधिक का जैविक गुड़ सप्लाई होता है। जनपद के काफी किसानों का रुझान भी जैविक उत्पादों की ओर बढ़ा है। कई किसान केमिकल रहित गुड़ और शक्कर बनाकर बेच रहे हैं। इससे बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं।
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जनपद में गुड़ उद्योग महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सेहत का ख्याल रखने वाले लोगों में जैविक गुड़ की मांग बढ़ी है। जनपद में तितावी, बेहड़ा सादात, रसूलपुर, कूकड़ा, नगला, पीनना और भोपा आदि गांव में जैविक गुड़ तैयार हो रहा है।
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किसानों से महंगे दाम पर खरीद रहे हैं गन्ना
जिले में100 से अधिक कारोबारी जैविक गुड़ तैयार करा रहे हैं। इन्होंने क्षेत्र के किसानों से गन्ने की जैविक खेती का अनुबंध किया है। ये कारोबारी अपनी निगरानी में गन्ने की फसल तैयार कराकर चीनी मिल से अधिक दामों पर गन्ना खरीदते हैं ताकि केमिकल रहित गुड़ और शक्कर तैयार हो सके। जैविक गुड़ तैयार करने के लिए आम तौर पर 500 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर गन्ने की खरीद होती है।
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मैंगो फ्लेवर से लेकर काजू बादाम का गुड़
किसान उद्यमी आम तौर से सादा और खुरपा पाड़ से लेकर अन्य फ्लेवर वाले गुड़ तैयार करा दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा सप्लाई कर रहे हैं। इनमें मैंगो, ऑरेंज और चॉकलेट फ्लेवर के साथ हल्दी, सौंठ, सौंफ, इलायची, मूंगफली, तिल आदि का गुड़ भी शामिल है। जिसका दाम आम तौर से 40 रुपये से लेकर 200 रुपये किलो तक रहता है।
शिलाजीत वाला गुड़ बिकता है पांच हजार रुपये किलो
एग्री फार्म बडी प्रोड्यूसर संस्था की ओर से नंगला में संचालित कोल्हू में शिलाजीत और केसर युक्त गुड़ भी तैयार किया जा रहा है। जिसका दाम पांच हजार रुपये प्रति किलो तक है। हालाकि इस वैरायटी का गुड़ खरीदने वाले ग्राहक गिने-चुने ही हैं। शिलाजीत और केसर युक्त गुड़ आन डिमांड तैयार किया जाता है।
धीरे-धीरे बढ़ रहा जैविक गुड़ का कारोबार: राकेश कुमार
एग्री फार्म बडी प्रोड्यूसर संस्था संचालक राकेश कुमार का कहना है कि जनपद में जैविक गुड़ का कारोबार धीरे-धीरे बढ रहा है। अनुमान के अनुसार प्रति वर्ष जनपद से 25 लाख से अधिक का जैविक गुड़ सप्लाई होता है। जनपद के काफी किसानों का रुझान भी जैविक उत्पादों की ओर बढ़ा है। कई किसान केमिकल रहित गुड़ और शक्कर बनाकर बेच रहे हैं। इससे बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं।

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