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संशोधित राज्यमंत्री के विरोधी भी हुए सक्रिय
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कपिल देव अग्रवाल के विरोधी भी हुए सक्रिय
मुजफ्फरनगर। प्रदेश के कौशल विकास राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के भाई के ललित अग्रवाल के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सियासत तेज हो गई है। पार्टी में भी उनके विरोधी सक्रिय हो गए है। भाजपा संगठन को उनसे जुड़े पुराने विवादों की जानकारी भेजी जा रही है। आरएसएस के पदाधिकारियों को भी जिले के संघ और भाजपा के कार्यकर्ता जानकारी दे रहे हैं। खुफिया विभाग भी इस मामले में जानकारी जुटा रहा है।
निजी कंपनी के मोबाइल फोन की लॉन्चिंग व प्रचार में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की फोटो के इस्तेमाल करने के मामले में पीएमओ के संज्ञान लेते ही प्रशासनिक मशीनरियां सक्रिय हो गईं। कपिलदेव अग्रवाल के संबंध में भी अब जानकारियां जुटाई जा रही है। पीएमओ और मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरे मामले को लेकर संवेदनशील है। आईबी सहित अन्य खुफिया एजेंसी लखनऊ से लेकर मुजफ्फरनगर तक इस पूरे मामले को खंगालने में लगे हैं। पीएमओ और मुख्यमंत्री कार्यालय खुफिया एजेंसियों के माध्यम से राज्यमंत्री के मोबाइल कंपनी के साथ संबंध खंगालने में जुट गया है। पीएमओ और मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरे मामले को लेकर संवेदनशील है। आईबी सहित अन्य खुफिया एजेंसी लखनऊ से लेकर मुजफ्फरनगर तक इस पूरे मामले को खंगालने में लगे हैं। इस बात की जांच हो रही है कि मोबाइल कंपनी की आड़ में बड़े स्तर पर किसी फ्रॉड की तैयारी तो नहीं थी। जानकारी में यह बात सामने आई है कि अभी तक बाजार में न तो मोबाइल है और न ही उसे बनाने की फैक्टरी। खुफिया विभाग यह पता करने में जुटा है कि राज्यमंत्री का कंपनी से ऐसा क्या संबंध है, जो वह लखनऊ से लेकर नोएडा तक के कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।
चेयरमैन रहते हुए थे अधिकार सीज
मुजफ्फरनगर। प्रदेश के राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के शहर का चेयरमैन रहते हुए भी आरोपों के चलते अधिकार सीज हुए थे। डेढ़ माह तक वित्तीय अधिकार सीज होने के कारण तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अरुण प्रकाश प्रशासक रहे थे।
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मुजफ्फरनगर। प्रदेश के कौशल विकास राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के भाई के ललित अग्रवाल के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सियासत तेज हो गई है। पार्टी में भी उनके विरोधी सक्रिय हो गए है। भाजपा संगठन को उनसे जुड़े पुराने विवादों की जानकारी भेजी जा रही है। आरएसएस के पदाधिकारियों को भी जिले के संघ और भाजपा के कार्यकर्ता जानकारी दे रहे हैं। खुफिया विभाग भी इस मामले में जानकारी जुटा रहा है।
निजी कंपनी के मोबाइल फोन की लॉन्चिंग व प्रचार में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की फोटो के इस्तेमाल करने के मामले में पीएमओ के संज्ञान लेते ही प्रशासनिक मशीनरियां सक्रिय हो गईं। कपिलदेव अग्रवाल के संबंध में भी अब जानकारियां जुटाई जा रही है। पीएमओ और मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरे मामले को लेकर संवेदनशील है। आईबी सहित अन्य खुफिया एजेंसी लखनऊ से लेकर मुजफ्फरनगर तक इस पूरे मामले को खंगालने में लगे हैं। पीएमओ और मुख्यमंत्री कार्यालय खुफिया एजेंसियों के माध्यम से राज्यमंत्री के मोबाइल कंपनी के साथ संबंध खंगालने में जुट गया है। पीएमओ और मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरे मामले को लेकर संवेदनशील है। आईबी सहित अन्य खुफिया एजेंसी लखनऊ से लेकर मुजफ्फरनगर तक इस पूरे मामले को खंगालने में लगे हैं। इस बात की जांच हो रही है कि मोबाइल कंपनी की आड़ में बड़े स्तर पर किसी फ्रॉड की तैयारी तो नहीं थी। जानकारी में यह बात सामने आई है कि अभी तक बाजार में न तो मोबाइल है और न ही उसे बनाने की फैक्टरी। खुफिया विभाग यह पता करने में जुटा है कि राज्यमंत्री का कंपनी से ऐसा क्या संबंध है, जो वह लखनऊ से लेकर नोएडा तक के कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।
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चेयरमैन रहते हुए थे अधिकार सीज
मुजफ्फरनगर। प्रदेश के राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के शहर का चेयरमैन रहते हुए भी आरोपों के चलते अधिकार सीज हुए थे। डेढ़ माह तक वित्तीय अधिकार सीज होने के कारण तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अरुण प्रकाश प्रशासक रहे थे।
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