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ईश्वर की कृपा वाला ही सबसे धनी : फादर पिंटो
Sun, 21 Dec 2025 08:57 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sun, 21 Dec 2025 08:57 PM IST
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सरधना। क्रिसमस महोत्सव से पूर्व ऐतिहासिक रोमन कैथोलिक चर्च में प्रभु यीशु के आगमन काल से पूर्व
रोमन कैथोलिक चर्च में प्रभु यीशु के आगमन काल की नौरोजी प्रार्थना श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न
- चर्च परिसर में सजी सुंदर चरनी, देखने के लिए उमड़े श्रद्धालु
नौरोजी प्रार्थना में प्रभु यीशु के संदेशों का वर्णन
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। क्रिसमस महोत्सव से पूर्व ऐतिहासिक रोमन कैथोलिक चर्च में प्रभु यीशु के आगमन काल की नौरोजी प्रार्थना श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर चर्च परिसर में सुंदर चरनी सजाई गई, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। प्रार्थना के दौरान फादर वलेरियन पिंटो और फादर मार्टिन रावत ने बताया कि सांसारिक वैभव से कहीं बढ़कर ईश्वर की करुणा और दया का महत्व है। जिनके पास ईश्वर की कृपा है, वही वास्तव में सबसे धनी हैं।
उन्होंने कहा कि कृपाओं की माता अत्यंत दयालु और कृपालु थीं। उन्होंने हमेशा सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। क्रिसमस की आध्यात्मिक तैयारियों में प्रभु यीशु के आदर और भक्ति में की जाने वाली प्रार्थनाओं का विशेष महत्व है। धर्म गुुरुओं ने कहा कि प्रभु यीशु ने विनम्रता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मानव रूप में इस संसार में जन्म लिया और एक साधारण चरनी में अवतरित हुए।
उन्होंने बताया कि बालक यीशु के आदर में नोवेना प्रार्थना प्रतिवर्ष 24 दिसंबर तक की जाती है। प्रभु यीशु ने मानव जीवन की सभी अवस्थाओं-बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था और प्रौढ़ावस्था का अनुभव किया। उन्होंने भी भूख-प्यास, थकान, पीड़ा और कष्ट सहते हुए प्रेम, दया और करुणा का संदेश दिया। कहा कि प्रभु यीशु का शरीर धारण करना ही उनकी पूर्ण विनम्रता का प्रमाण है। विश्व के सृष्टिकर्ता को जन्म के समय एक खाली कक्ष तक नसीब नहीं हुआ और उन्होंने शीतकाल की कठोर ठंड में गौशाला में जन्म लिया। प्रभु के जन्मोत्सव को मनाकर हम उन्हें अपने घरों और समुदायों में पुनः आमंत्रित करते हैं। प्रार्थना के समापन पर सभी ने विश्व शांति, भाईचारे और बीमारों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआ मांगी।
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- चर्च परिसर में सजी सुंदर चरनी, देखने के लिए उमड़े श्रद्धालु
नौरोजी प्रार्थना में प्रभु यीशु के संदेशों का वर्णन
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। क्रिसमस महोत्सव से पूर्व ऐतिहासिक रोमन कैथोलिक चर्च में प्रभु यीशु के आगमन काल की नौरोजी प्रार्थना श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर चर्च परिसर में सुंदर चरनी सजाई गई, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। प्रार्थना के दौरान फादर वलेरियन पिंटो और फादर मार्टिन रावत ने बताया कि सांसारिक वैभव से कहीं बढ़कर ईश्वर की करुणा और दया का महत्व है। जिनके पास ईश्वर की कृपा है, वही वास्तव में सबसे धनी हैं।
उन्होंने कहा कि कृपाओं की माता अत्यंत दयालु और कृपालु थीं। उन्होंने हमेशा सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। क्रिसमस की आध्यात्मिक तैयारियों में प्रभु यीशु के आदर और भक्ति में की जाने वाली प्रार्थनाओं का विशेष महत्व है। धर्म गुुरुओं ने कहा कि प्रभु यीशु ने विनम्रता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मानव रूप में इस संसार में जन्म लिया और एक साधारण चरनी में अवतरित हुए।
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उन्होंने बताया कि बालक यीशु के आदर में नोवेना प्रार्थना प्रतिवर्ष 24 दिसंबर तक की जाती है। प्रभु यीशु ने मानव जीवन की सभी अवस्थाओं-बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था और प्रौढ़ावस्था का अनुभव किया। उन्होंने भी भूख-प्यास, थकान, पीड़ा और कष्ट सहते हुए प्रेम, दया और करुणा का संदेश दिया। कहा कि प्रभु यीशु का शरीर धारण करना ही उनकी पूर्ण विनम्रता का प्रमाण है। विश्व के सृष्टिकर्ता को जन्म के समय एक खाली कक्ष तक नसीब नहीं हुआ और उन्होंने शीतकाल की कठोर ठंड में गौशाला में जन्म लिया। प्रभु के जन्मोत्सव को मनाकर हम उन्हें अपने घरों और समुदायों में पुनः आमंत्रित करते हैं। प्रार्थना के समापन पर सभी ने विश्व शांति, भाईचारे और बीमारों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआ मांगी।
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