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भक्ति, प्रेम और संवेदना ही परम तत्व की ओर ले जाती है : शिवम शास्त्री
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सरधना। नगर के मोहल्ला छावनी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल श्रद्धालु। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना।नगर के मोहल्ला छावनी स्थित विश्व भारती पब्लिक स्कूल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक पंडित शिवम शास्त्री जी ने कहा कि जब मनुष्य अपनी संवेदनाओं को परम तत्व से जोड़ता है, तो वे प्रेम में परिवर्तित हो जाती हैं। यही सात्विक प्रेम वह साधन है, जिससे परमात्मा भी द्रवित हो उठते हैं।
उन्होंने कहा कि जब यही संवेदनाएं संसार से जुड़ती हैं, तो वे मोह का रूप ले लेती हैं और मोह ही वह बंधन है जो प्राणी को उसके धर्म, कर्तव्य और आत्मिक विकास से विमुख कर दुखों के मार्ग पर ले जाता है। पितामह भीष्म ने अपनी संवेदनाओं को परमात्मा से जोड़ते हुए सर सैया पर लेटे भी भगवान को अपने समीप आने के लिए विवश कर दिया। यह दर्शाता है कि यदि जीवन स्वार्थमुक्त प्रेम से परिपूर्ण हो, तो न केवल संसार, बल्कि परमात्मा की प्राप्ति भी संभव है। शिवम शास्त्री ने आगे कहा कि जब कोई मनुष्य संवेदनहीन, स्वार्थी, क्रोधी और आसुरी प्रवृत्तियों से युक्त हो जाता है, तो न केवल भगवान, बल्कि समाज भी उसका तिरस्कार करने लगता है। कार्यक्रम में अनिता शर्मा, श्रद्धा, राजबाला, रिचा, राखी, बृजेश, सियानंद, राज नारायण, नरेंद्र पंडित, जयपाल, बृजभूषण त्यागी, जयकरण, सुशील, सतीश, शिवम, राजा, हर्ष, राजेश, राजू, नंदकिशोर, बिजेन्द्र, विनोद, सुबोध, शामिल रहे।
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सरधना।नगर के मोहल्ला छावनी स्थित विश्व भारती पब्लिक स्कूल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक पंडित शिवम शास्त्री जी ने कहा कि जब मनुष्य अपनी संवेदनाओं को परम तत्व से जोड़ता है, तो वे प्रेम में परिवर्तित हो जाती हैं। यही सात्विक प्रेम वह साधन है, जिससे परमात्मा भी द्रवित हो उठते हैं।
उन्होंने कहा कि जब यही संवेदनाएं संसार से जुड़ती हैं, तो वे मोह का रूप ले लेती हैं और मोह ही वह बंधन है जो प्राणी को उसके धर्म, कर्तव्य और आत्मिक विकास से विमुख कर दुखों के मार्ग पर ले जाता है। पितामह भीष्म ने अपनी संवेदनाओं को परमात्मा से जोड़ते हुए सर सैया पर लेटे भी भगवान को अपने समीप आने के लिए विवश कर दिया। यह दर्शाता है कि यदि जीवन स्वार्थमुक्त प्रेम से परिपूर्ण हो, तो न केवल संसार, बल्कि परमात्मा की प्राप्ति भी संभव है। शिवम शास्त्री ने आगे कहा कि जब कोई मनुष्य संवेदनहीन, स्वार्थी, क्रोधी और आसुरी प्रवृत्तियों से युक्त हो जाता है, तो न केवल भगवान, बल्कि समाज भी उसका तिरस्कार करने लगता है। कार्यक्रम में अनिता शर्मा, श्रद्धा, राजबाला, रिचा, राखी, बृजेश, सियानंद, राज नारायण, नरेंद्र पंडित, जयपाल, बृजभूषण त्यागी, जयकरण, सुशील, सतीश, शिवम, राजा, हर्ष, राजेश, राजू, नंदकिशोर, बिजेन्द्र, विनोद, सुबोध, शामिल रहे।

सरधना। नगर के मोहल्ला छावनी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल श्रद्धालु। आयोजक
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