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विनम्र व्यक्ति ही धर्ममय जीवन जीता है : सौरभ सागर
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असौड़ा हाउस जैन मंदिर में श्री शांति विधान में अर्घ्य समर्पित किए
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। असौड़ा हाउस स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायत मंदिर में आचार्य सौरभ सागर के सानिध्य में शांति विधान श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ।
आचार्य सौरभ सागर ने धर्म, संस्कार और भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म केवल मंदिर जाने और पूजा-पाठ करने तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक स्वरूप व्यक्ति के आचरण, व्यवहार और विचारों में दिखाई देना चाहिए। सत्य, अहिंसा, क्षमा, करुणा और विनम्रता को जीवन में अपनाने वाला व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में धर्ममय जीवन जीता है।
विधानाचार्य पंडित संदीप शास्त्री के निर्देशन में धार्मिक क्रियाएं विधिपूर्वक संपन्न कराई गईं। श्रद्धालुओं ने 8, 16, 32 और 64 अर्घ्य समर्पित कर जिनेंद्र भगवान की आराधना की।
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शांति विधान में स्वर्ण शांतिधारा का सौभाग्य संस्कार जैन को प्राप्त हुआ। चार रजत शांतिधाराओं का पुण्य लाभ सीए रमाकांत जैन एवं सीए विशाल जैन, नितिन गोविल, अंकित जैन, हेमचंद जैन, निखिल जैन, संयम जैन को मिला।
इस अवसर पर राकेश जैन की ओर से भोज की व्यवस्था की गई। मंदिर परिसर में संरक्षक रमेश चंद जैन, जेके जैन तथा समिति से विनोद जैन, पूनम चंद जैन, मनोज जैन, कपिल जैन, संजय जैन, कमल जैन रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। असौड़ा हाउस स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायत मंदिर में आचार्य सौरभ सागर के सानिध्य में शांति विधान श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ।
आचार्य सौरभ सागर ने धर्म, संस्कार और भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म केवल मंदिर जाने और पूजा-पाठ करने तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक स्वरूप व्यक्ति के आचरण, व्यवहार और विचारों में दिखाई देना चाहिए। सत्य, अहिंसा, क्षमा, करुणा और विनम्रता को जीवन में अपनाने वाला व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में धर्ममय जीवन जीता है।
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विधानाचार्य पंडित संदीप शास्त्री के निर्देशन में धार्मिक क्रियाएं विधिपूर्वक संपन्न कराई गईं। श्रद्धालुओं ने 8, 16, 32 और 64 अर्घ्य समर्पित कर जिनेंद्र भगवान की आराधना की।
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शांति विधान में स्वर्ण शांतिधारा का सौभाग्य संस्कार जैन को प्राप्त हुआ। चार रजत शांतिधाराओं का पुण्य लाभ सीए रमाकांत जैन एवं सीए विशाल जैन, नितिन गोविल, अंकित जैन, हेमचंद जैन, निखिल जैन, संयम जैन को मिला।
इस अवसर पर राकेश जैन की ओर से भोज की व्यवस्था की गई। मंदिर परिसर में संरक्षक रमेश चंद जैन, जेके जैन तथा समिति से विनोद जैन, पूनम चंद जैन, मनोज जैन, कपिल जैन, संजय जैन, कमल जैन रहे।