{"_id":"636824927084c72ef14a85ab","slug":"only-35-medical-stores-are-giving-details-of-tb-patients-meerut-news-mrt6125253128","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीबी खत्म करने की मुहिम को लग रहा पलीता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टीबी खत्म करने की मुहिम को लग रहा पलीता
विज्ञापन
मेरठ। प्रधानमंत्री मोदी 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन मेडिकल स्टोर संचालक इसमें पलीता लगा रहे हैं। टीबी मुक्त जिला बनाने के लिए मेडिकल स्टोरों को टीबी की दवा लेने वाले मरीजों का हर माह ब्योरा जिला क्षय रोग कार्यालय पर देने के निर्देश दिए गए, लेकिन सूचना सिर्फ 35 मेडिकल स्टोर संचालक ही दे रहे हैं, जबकि करीब 1700 मेडिकल स्टोरों को यह सूचना देनी चाहिए।
35 भी किसी महीने ही देते हैं, किसी-किसी महीने तो यह संख्या 5-10 तक सिमट जाती है। इस संबंध में कई बार बैठकें को जा चुकी हैं, मगर नतीजे में बदलाव नहीं आया है। जिला क्षय रोग विभाग को लगता है कि मेडिकल स्टोर स्वामी कारोबार प्रभावित न हो इसलिए टीबी रोगियों का ब्योरा नहीं दे रहे हैं, क्योंकि ब्योरा मिलने के बाद जिला क्षय रोग अस्पताल की टीम मरीज के घर जाकर बीमारी संबंधी डिटेल इकट्ठा करके उन्हें अपनी देखरेख में मुफ्त दवाएं देंगे। वहीं गंभीर मरीजों को पांच सौ रुपये तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए जाते हैं। इसलिए मेडिकल स्टोर संचालकों को डर है कि डिटेल देने के बाद मरीज उनसे दवाएं लेना बंद कर देंगे। वहीं, मेडिकल स्टोर वाले कहते हैं कि जब से सरकार ने दवाइयां मुफ्त देने का ज्यादा प्रचार प्रसार किया है, उनके पास चंद मरीज ही आ रहे हैं। वहीं, पिछले पांच साल में जिले में टीबी के करीब 39 हजार मरीज मिल चुके हैं।
अब टीबी के मरीज मेडिकल स्टोरों पर कम आ रहे हैं। बैठक में कई बार यह सुझाव दिया गया कि टीबी की दवा जो तीन कम्पनियां सप्लाई करती हैं, उनसे उन हॉल सेलर की सूची ले ली जाए, जिन्हें सप्लाई कर रहे हैं। इससे जानकारी लेने में आसानी होगी, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।
विज्ञापन
- रजनीश कौशल, जिला महामंत्री केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन
कई बार बैठक कर टीबी रोगियों की सूचनाएं देने के लिए कहा जा चुका है, लेकिन फिर भी अधिकांश केमिस्ट सूचना नहीं दे रहे हैं। यदि ये लोग निरंतर सूचना दें तो टीबी रोग मुक्त अभियान और परवान चढ़े।
- डॉ. गुलशन राय , जिला क्षय रोग अधिकारी
लक्षण हों, कोरोना न निकले तो हो टीबी की जांच
शासन के निर्देश दे चुकी है कि अगर कोरोना जैसे लक्षण हैं और जांच में कोरोना नहीं निकलता है तो ऐसे मरीजों की टीबी की जांच कराई जानी चाहिए। इन मरीजों को टीबी हो सकती है।
विज्ञापन
35 भी किसी महीने ही देते हैं, किसी-किसी महीने तो यह संख्या 5-10 तक सिमट जाती है। इस संबंध में कई बार बैठकें को जा चुकी हैं, मगर नतीजे में बदलाव नहीं आया है। जिला क्षय रोग विभाग को लगता है कि मेडिकल स्टोर स्वामी कारोबार प्रभावित न हो इसलिए टीबी रोगियों का ब्योरा नहीं दे रहे हैं, क्योंकि ब्योरा मिलने के बाद जिला क्षय रोग अस्पताल की टीम मरीज के घर जाकर बीमारी संबंधी डिटेल इकट्ठा करके उन्हें अपनी देखरेख में मुफ्त दवाएं देंगे। वहीं गंभीर मरीजों को पांच सौ रुपये तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए जाते हैं। इसलिए मेडिकल स्टोर संचालकों को डर है कि डिटेल देने के बाद मरीज उनसे दवाएं लेना बंद कर देंगे। वहीं, मेडिकल स्टोर वाले कहते हैं कि जब से सरकार ने दवाइयां मुफ्त देने का ज्यादा प्रचार प्रसार किया है, उनके पास चंद मरीज ही आ रहे हैं। वहीं, पिछले पांच साल में जिले में टीबी के करीब 39 हजार मरीज मिल चुके हैं।
विज्ञापन
अब टीबी के मरीज मेडिकल स्टोरों पर कम आ रहे हैं। बैठक में कई बार यह सुझाव दिया गया कि टीबी की दवा जो तीन कम्पनियां सप्लाई करती हैं, उनसे उन हॉल सेलर की सूची ले ली जाए, जिन्हें सप्लाई कर रहे हैं। इससे जानकारी लेने में आसानी होगी, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।
विज्ञापन
- रजनीश कौशल, जिला महामंत्री केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन
कई बार बैठक कर टीबी रोगियों की सूचनाएं देने के लिए कहा जा चुका है, लेकिन फिर भी अधिकांश केमिस्ट सूचना नहीं दे रहे हैं। यदि ये लोग निरंतर सूचना दें तो टीबी रोग मुक्त अभियान और परवान चढ़े।
- डॉ. गुलशन राय , जिला क्षय रोग अधिकारी
लक्षण हों, कोरोना न निकले तो हो टीबी की जांच
शासन के निर्देश दे चुकी है कि अगर कोरोना जैसे लक्षण हैं और जांच में कोरोना नहीं निकलता है तो ऐसे मरीजों की टीबी की जांच कराई जानी चाहिए। इन मरीजों को टीबी हो सकती है।