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सावधान! केवल 15 अस्पतालों के पास है फायर एनओसी
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मेरठ। जनपद में बिना फायर एनओसी के अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। अगर कोई हादसा हो जाए तो बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। दमकल विभाग के आंकड़ों के अनुसार 15 अस्पतालों को छोड़ दें तो 90 प्रतिशत से ज्यादा अस्पतालों में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं हैं। विभाग समय-समय पर अस्पताल संचालकों को नोटिस भेजने की कार्रवाई करता है। लेकिन यह कार्रवाई भी महज खानापूर्ति साबित होती है। बिना फायर एनओसी चल रहे अस्पतालों में लोग जान जोखिम में डालकर उपचार ले रहे हैं और पुलिस-प्रशासन बेखबर है।
जनपद में 243 छोटे-बड़े अस्पतालों का संचालन हो रहा है। दमकल विभाग के आंकड़ों के अनुसार 15 अस्पतालों को छोड़कर शेष अन्य सभी बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि अस्पतालों में हादसे नहीं होते। कई बार हादसे हुए और अस्पताल पूरी तरह दमकल विभाग पर निर्भर रहा। छोटी घटना होने के कारण तो आग पर काबू पा लिया गया। लेकिन अगर कभी किसी दिन कोई बड़ा हादसा किसी अस्पताल में हो जाये तो किसी बड़ी अनहोनी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। समय-समय पर फायर विभाग ऐसे अस्पतालों को नोटिस भेजकर जगाने का प्रयास करता है। प्रशासन को भी इसकी रिपोर्ट भेजी जाती है। लेकिन प्रशासन की चुप्पी यह बताती है कि शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार हो रहा है।
फायर एनओसी के लिए मानक निर्धारित
फायर विभाग के अनुसार बहुमंजिला इमारत, स्कूल-कॉलेज, सरकारी विभाग या फिर अस्पताल हों, सभी के लिए फायर एनओसी लेना जरूरी है। नेशनल बिल्डिंग कोड के तहत सुरक्षा की दृष्टि से यह बेहद जरूरी है। लेकिन सर्वाधिक इसी की अनदेखी की जाती है।
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अस्पताल के लिए ये हैं मानक निर्धारित
- एरिया - 1000 वर्ग मीटर और 15 मीटर तक ऊंचाई (बेड)
अग्निशामक यंत्र, मैन्युअल इलेक्ट्रिक फायर अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर सिस्टम (बेसमेंट हो तो), पानी टैंक क्षमता 5000 लीटर और 450 एलपीएम क्षमता का पंप।
- एरिया - 1000 वर्ग मीटर और 15 मीटर तक ऊंचाई (बिना बेड)
अग्निशामक यंत्र, हौजरील, मैन्युअल इलेक्ट्रिक फायर अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर सिस्टम (बेसमेंट हो तो), दो टैंक क्षमता 5-5 हजार लीटर और 450 एलपीएम क्षमता के दो पंप।
- डबल स्टोरी अस्पताल (बेड)
वेटराइजर, ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, ऑटोमेटिक स्मॉग डिटेक्शन अलार्म, 75 हजार लीटर का अंडरग्राउंड टैंक, 10 हजार लीटर का टेरिस टैंक, 1620 एलपीएम का एक डीजल, एक इलेक्ट्रिक और 180 एलपीएम का एक जॉकी पंप और अग्निशामक यंत्र।
- 15 मीटर से 24 मीटर तक ऊंचाई वाले अस्पताल
अग्निशामक यंत्र, हौजरील, वेटराइजर, यार्ड हाईड्रेंट, ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, मैन्यूअल और ऑटोमेटिक स्मॉग डिटेक्शन अलार्म सिस्टम, 1.5 लाख लीटर क्षमता का अंडर ग्राउंड वाटर टैंक, 20 हजार लीटर क्षमता का टैरिस टैंक, 2280 एलपीएम क्षमता के एक इलेक्ट्रिक और एक डीजल पंप के अलावा 180 एलपीएम के दो जॉकी पंप।
(नोट - यदि ऊंचाई 24 से 45 मीटर हो तो उसमें टैंक की और पंप की क्षमता बढ़ जाती है)
समय-समय पर देते हैं नोटिस
जिले में 90 प्रतिशत से अधिक अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं है। हमारे यहां 15 अस्पताल ही ऐसे दर्ज हैं, जिनके पास एनओसी है। इनमें जिला और मेडिकल अस्पताल भी हैं। अस्पताल संचालकों को समय-समय पर नोटिस भेजे जाते हैं। ज्यादा से ज्यादा मानक पूरा करने का दबाव बनाया जाता है। बावजूद इसके कोई ध्यान नहीं देता। इससे जुड़ी जानकारी मुख्यालय को भेज दी जाती है। -अजय कुमार शर्मा, सीएफओ
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जनपद में 243 छोटे-बड़े अस्पतालों का संचालन हो रहा है। दमकल विभाग के आंकड़ों के अनुसार 15 अस्पतालों को छोड़कर शेष अन्य सभी बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि अस्पतालों में हादसे नहीं होते। कई बार हादसे हुए और अस्पताल पूरी तरह दमकल विभाग पर निर्भर रहा। छोटी घटना होने के कारण तो आग पर काबू पा लिया गया। लेकिन अगर कभी किसी दिन कोई बड़ा हादसा किसी अस्पताल में हो जाये तो किसी बड़ी अनहोनी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। समय-समय पर फायर विभाग ऐसे अस्पतालों को नोटिस भेजकर जगाने का प्रयास करता है। प्रशासन को भी इसकी रिपोर्ट भेजी जाती है। लेकिन प्रशासन की चुप्पी यह बताती है कि शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार हो रहा है।
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फायर एनओसी के लिए मानक निर्धारित
फायर विभाग के अनुसार बहुमंजिला इमारत, स्कूल-कॉलेज, सरकारी विभाग या फिर अस्पताल हों, सभी के लिए फायर एनओसी लेना जरूरी है। नेशनल बिल्डिंग कोड के तहत सुरक्षा की दृष्टि से यह बेहद जरूरी है। लेकिन सर्वाधिक इसी की अनदेखी की जाती है।
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अस्पताल के लिए ये हैं मानक निर्धारित
- एरिया - 1000 वर्ग मीटर और 15 मीटर तक ऊंचाई (बेड)
अग्निशामक यंत्र, मैन्युअल इलेक्ट्रिक फायर अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर सिस्टम (बेसमेंट हो तो), पानी टैंक क्षमता 5000 लीटर और 450 एलपीएम क्षमता का पंप।
- एरिया - 1000 वर्ग मीटर और 15 मीटर तक ऊंचाई (बिना बेड)
अग्निशामक यंत्र, हौजरील, मैन्युअल इलेक्ट्रिक फायर अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर सिस्टम (बेसमेंट हो तो), दो टैंक क्षमता 5-5 हजार लीटर और 450 एलपीएम क्षमता के दो पंप।
- डबल स्टोरी अस्पताल (बेड)
वेटराइजर, ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, ऑटोमेटिक स्मॉग डिटेक्शन अलार्म, 75 हजार लीटर का अंडरग्राउंड टैंक, 10 हजार लीटर का टेरिस टैंक, 1620 एलपीएम का एक डीजल, एक इलेक्ट्रिक और 180 एलपीएम का एक जॉकी पंप और अग्निशामक यंत्र।
- 15 मीटर से 24 मीटर तक ऊंचाई वाले अस्पताल
अग्निशामक यंत्र, हौजरील, वेटराइजर, यार्ड हाईड्रेंट, ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, मैन्यूअल और ऑटोमेटिक स्मॉग डिटेक्शन अलार्म सिस्टम, 1.5 लाख लीटर क्षमता का अंडर ग्राउंड वाटर टैंक, 20 हजार लीटर क्षमता का टैरिस टैंक, 2280 एलपीएम क्षमता के एक इलेक्ट्रिक और एक डीजल पंप के अलावा 180 एलपीएम के दो जॉकी पंप।
(नोट - यदि ऊंचाई 24 से 45 मीटर हो तो उसमें टैंक की और पंप की क्षमता बढ़ जाती है)
समय-समय पर देते हैं नोटिस
जिले में 90 प्रतिशत से अधिक अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं है। हमारे यहां 15 अस्पताल ही ऐसे दर्ज हैं, जिनके पास एनओसी है। इनमें जिला और मेडिकल अस्पताल भी हैं। अस्पताल संचालकों को समय-समय पर नोटिस भेजे जाते हैं। ज्यादा से ज्यादा मानक पूरा करने का दबाव बनाया जाता है। बावजूद इसके कोई ध्यान नहीं देता। इससे जुड़ी जानकारी मुख्यालय को भेज दी जाती है। -अजय कुमार शर्मा, सीएफओ