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50 में से 13 कॉलेजों ने ही दी शिक्षकों की वरिष्ठता सूची
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50 में से सिर्फ 13 कॉलेजों ने दी शिक्षकों की वरिष्ठता सूची
मेरठ। एडेड कॉलेज शायद हाईकोर्ट से ऊपर हो गए हैं। शिक्षकों की वरिष्ठता सूची बार-बार मांगे जाने के बावजूद नहीं दी जा रही है। एडेड कॉलेजों में मैनेजमेंट खूब गड़बड़झाला कर रहा है। करीब 20 प्राचार्यों की कुर्सी बचाने के लिए सारा खेल चल रहा है। विवि प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर जल्द सूची नहीं भेजी तो शासन को इन कॉलेजों की रिपोर्ट भेज दी जाएगी। पूरे मामले में विवि प्रशासन को हाईकोर्ट में भी जवाब देना है। ऐसे में कुलपति ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कॉलेज लापरवाही करेंगे, उनको भुगतना होगा।
मेरठ और सहारनपुर मंडल में 50 एडेड कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में करीब 800 शिक्षक हैं। कॉलेजों में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में अब तक वह कार्यकाल भी जुड़ रहा है, जहां से वह पहले स्थानांतरण होकर आए हैं। कई कॉलेजों में प्रबंध समिति और शिक्षकों ने अपने हिसाब से वरिष्ठता सूची तय की हुई है। इस मामले में हाईकोर्ट ने पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालयों में वरिष्ठता सूची के बारे में स्पष्ट कर दिया था। विवि ने रिट का हवाला देते हुए कॉलेजों को निर्देश दिए थे कि किसी भी एडेड कॉलेज में अब शिक्षक की वह सेवा नहीं जुड़ेगी जो उन्होंने नियमित शिक्षक के रूप में न दी हो। इसके अलावा अगर कोई शिक्षक पिछले कॉलेज में नियमित होने के बाद किसी दूसरे कॉलेज में स्थानांतरित होकर आते हैं तो उनके कॉलेज की वरिष्ठता सूची में पिछले कॉलेज की सेवा का कार्यकाल नहीं जुड़ेगा।
जबकि विश्वविद्यालय की सूची में उनका पूरा सेवाकाल जोड़ते हुए वरिष्ठता सूची बनेगी। ऐसे में शिक्षक कॉलेज में उसी तिथि से वरिष्ठ माने जाएंगे, जब से उन्होंने ज्वाइन किया है। इन आदेशों के बाद सभी कॉलेजों में शिक्षकों की वरिष्ठता में बड़ा बदलाव हो जाएगा। 20 के करीब प्राचार्य भी बदल सकते हैं। ऐसे में अधिकतर कॉलेजों में मैनेजमेंट के सामने इससे परेशानी खड़ी हो गई है। दरअसल, कई जगहों पर ऐसे शिक्षक भी वरिष्ठता सूची में आगे आ जाएंगे, जिनको मैनेजमेंट प्राचार्य नहीं बनाना चाहता। कई जगहों पर दिक्कत यह होगी कि नियमानुसार प्राचार्य नहीं बनाने पर दूसरे शिक्षक इसकी शिकायत कुलपति या हाईकोर्ट में कर सकते हैं।
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विवि के निर्देश पर शुक्रवार तक सिर्फ 13 कॉलेजों ने ही वरिष्ठता सूची भेजी है। मेरठ से अभी तक सिर्फ एएस पीजी कॉलेज मवाना की ही सूची आई है। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि सभी कॉलेजों को स्पष्ट कर दिया गया था कि अगर वह समय से सूची नहीं भेजेंगे तो वह हाईकोर्ट की अवमानना के दायरे में आ जाएंगे। इसका अंतिम रिमाइंडर जारी किया जा रहा है।
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मेरठ। एडेड कॉलेज शायद हाईकोर्ट से ऊपर हो गए हैं। शिक्षकों की वरिष्ठता सूची बार-बार मांगे जाने के बावजूद नहीं दी जा रही है। एडेड कॉलेजों में मैनेजमेंट खूब गड़बड़झाला कर रहा है। करीब 20 प्राचार्यों की कुर्सी बचाने के लिए सारा खेल चल रहा है। विवि प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर जल्द सूची नहीं भेजी तो शासन को इन कॉलेजों की रिपोर्ट भेज दी जाएगी। पूरे मामले में विवि प्रशासन को हाईकोर्ट में भी जवाब देना है। ऐसे में कुलपति ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कॉलेज लापरवाही करेंगे, उनको भुगतना होगा।
मेरठ और सहारनपुर मंडल में 50 एडेड कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में करीब 800 शिक्षक हैं। कॉलेजों में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में अब तक वह कार्यकाल भी जुड़ रहा है, जहां से वह पहले स्थानांतरण होकर आए हैं। कई कॉलेजों में प्रबंध समिति और शिक्षकों ने अपने हिसाब से वरिष्ठता सूची तय की हुई है। इस मामले में हाईकोर्ट ने पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालयों में वरिष्ठता सूची के बारे में स्पष्ट कर दिया था। विवि ने रिट का हवाला देते हुए कॉलेजों को निर्देश दिए थे कि किसी भी एडेड कॉलेज में अब शिक्षक की वह सेवा नहीं जुड़ेगी जो उन्होंने नियमित शिक्षक के रूप में न दी हो। इसके अलावा अगर कोई शिक्षक पिछले कॉलेज में नियमित होने के बाद किसी दूसरे कॉलेज में स्थानांतरित होकर आते हैं तो उनके कॉलेज की वरिष्ठता सूची में पिछले कॉलेज की सेवा का कार्यकाल नहीं जुड़ेगा।
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जबकि विश्वविद्यालय की सूची में उनका पूरा सेवाकाल जोड़ते हुए वरिष्ठता सूची बनेगी। ऐसे में शिक्षक कॉलेज में उसी तिथि से वरिष्ठ माने जाएंगे, जब से उन्होंने ज्वाइन किया है। इन आदेशों के बाद सभी कॉलेजों में शिक्षकों की वरिष्ठता में बड़ा बदलाव हो जाएगा। 20 के करीब प्राचार्य भी बदल सकते हैं। ऐसे में अधिकतर कॉलेजों में मैनेजमेंट के सामने इससे परेशानी खड़ी हो गई है। दरअसल, कई जगहों पर ऐसे शिक्षक भी वरिष्ठता सूची में आगे आ जाएंगे, जिनको मैनेजमेंट प्राचार्य नहीं बनाना चाहता। कई जगहों पर दिक्कत यह होगी कि नियमानुसार प्राचार्य नहीं बनाने पर दूसरे शिक्षक इसकी शिकायत कुलपति या हाईकोर्ट में कर सकते हैं।
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विवि के निर्देश पर शुक्रवार तक सिर्फ 13 कॉलेजों ने ही वरिष्ठता सूची भेजी है। मेरठ से अभी तक सिर्फ एएस पीजी कॉलेज मवाना की ही सूची आई है। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि सभी कॉलेजों को स्पष्ट कर दिया गया था कि अगर वह समय से सूची नहीं भेजेंगे तो वह हाईकोर्ट की अवमानना के दायरे में आ जाएंगे। इसका अंतिम रिमाइंडर जारी किया जा रहा है।