पल भर में बुझ गया घर का इकलौता चिराग, सदमे में मां
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वंश और विक्की पक्के दोस्त थे। घर के पास ही कोचिंग सेंटर था, इसलिए रोजाना दोनों पैदल ही कोचिंग जाते थे। सहपाठी कार्तिक के अनुसार वंश पापा की बाइक ले गया था और पल भर में हुए हादसे ने दोनों परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस घटना से परिजन ही नहीं बल्कि उनके दोस्त भी सदमे में हैं।
पापा नहीं देते थे बाइक
एसओ मेडिकल के अनुसार वंश घर का इकलौता चिराग था। घर में बाइक और स्कूटी होते हुए भी उसके पापा संजीव शर्मा वंश को बाइक या स्कूटी ले जाने नहीं देते थे। लेकिन वंश बिना बताए बाइक ले गया था। इस हादसे ने घर का इकलौता चिराग बुझा दिया।
दोनों परिवारों में कोहराम
वंश के पिता गैस एजेंसी में काम करते हैं। जबकि विक्की के पिता आनंद नागर रोडवेज कर्मी हैं। इस हादसे के बाद दोनों परिवारों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। वंश की मां सरिता के अलावा विक्की के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।
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हेलमेट होता तो बच जाती जान
पुलिस के अनुसार दोनों छात्रों ने ही हेलमेट नहीं लगाया हुआ था। दोनों की मौत का कारण सिर में घातक चोट लगना रहा। यदि दोनों हेलमेट लगाए होते तो शायद जान बच जाती।
पहले भी हो चुके हादसे
दो माह पूर्व परतापुर हाईवे पर बाइक पुल से गिरने पर खतौली निवासी पुनीत (24), मानवेंद्र (18) और गांव निलोहा मवाना निवासी मोहित (24) की मौत हो गई थी। उन्होंने भी हेलमेट नहीं लगाया था। इससे पूर्व कंकरखेड़ा में भी कोहरे की वजह से बाइक ट्रक से टकराने से दो दोस्तों की मौत हो गई थी।
हादसों का हाईवे
मवाना रोड को मेरठ-पौड़ी हाईवे (एनएच-119) के नाम से भी जाना जाता है। साकेत चौराहे से छोटा मवाना चौकी तक के करीब 18 किमी के दायरे में कई बड़े हादसे हो चुके हैं। छात्र अभिषेक की मौत भी सैनी पुल के नजदीक हुई, जो डेंजर जोन में आता है। तीन दिन पूर्व भी इसी पुल के पास इंचौली निवासी बाइक सवार युवक की मौत हुई थी।
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